सपाई नहीं मिले तो बच्‍चे को ही सपा कार्यकर्ता बनाया पुलिस ने

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: पुलिस के इस कमीनेपन पर भड़क उठे सिटी मजिस्‍ट्रेट : उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार के कुशासन के खिलाफ गुरूवार को गोरखपुर में समाजवादी पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन को असफल बनाने के लिए पुलिस प्रशासन की तैयारियां कारगर साबित हुईं हैं, पर केवल शहरों एवं कस्बों में। इस बार सपाईयों ने पहले की तरह सीनाजोरी नहीं दिखाई बल्कि लुकाछिपी का खेल खेला। गांवों में सपा का कार्यक्रम पूरी तरह सफल होने का दावा किया गया है।

शहरों एवं कस्बों में आंदोलन के लिए सपा ने तैयारियां तो बहुत की थीं, पर पुलिस का आक्रामक तेवर देखकर वे भूमिगत हो गये थे और पुलिस ने सपाइयों की गिरफ्तारी का आंकड़ा दिखाने के लिए एक दिन पहले रात में सड़कों पर जो भी मजदूर-राहगीर मिले उन्हें पकड़ लिया और आंदोलन के दिन सपा का कार्यकर्त्ता बनाकर शांतिभंग की आशंका में उनका चालान कर सिटी मजिस्‍ट्रेट के पास भेज दिया।

पकड़े गये कथित सपा कार्यकर्त्ताओं की आपबीती सुनकर सिटी मजिस्‍ट्रेट बड़े ही हैरत में पड़ गये और कहने लगे पुलिस ऐसा भी करती है! बात यहीं तक सीमित होती तो गनीमत रहती, इसी बीच कोतवाली पुलिस ने एक बालक का चालान कर वहां भेज दिया। सपा कार्यकर्त्ता के रूप में बालक को हथकड़ी में देखते ही सिटी मजिस्‍ट्रेट का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। गुस्‍साए मजिस्‍ट्रेट साह‍ब ने बोला किस थानेदार ने ऐसी हिमाकत की है, लगता है उसे कानून के बारे में कोई जानकारी सपानहीं है। बालक का मेडिकल करा लाने का आदेश सिपाही को दिया तो वह भागकर सीधे इंस्‍पेक्टर के पास पहुंच गया। सिटी मजिस्‍ट्रेट का आदेश जानते ही इंस्‍पेक्टर मामला समझ गये और फिर बालक को वहां दुबारा नहीं भेजकर खुद को बचाने की जुगत में लग गये।

इसी माह में बीते 7, 8 एवं 9 मार्च को समाजवादी पार्टी द्वारा चलाये गये प्रदेश व्यापी आंदोलन के दौरान सपा कार्यकर्त्ताओं ने जोरदार आंदोलन कर सरकार की नींद ही उड़ा दी थी, हालांकि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने लखनऊ ही नहीं प्रदेश के तमाम जिलों में अमानवीय कृत्य किया था। आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री ने एक प्रेस वार्ता कर सपा के मुखिया को आगाह किया कि दुबारा सपा ने बिना अनुमति अगर कोई आंदोलन कर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास किया तो कड़ाई से पेश आया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस चेतावनी को सपा ने बतौर चुनौती लिया और दूसरे चरण के आंदोलन की घोषणा कर दी।

17 मार्च गुरूवार को आंदोलन के तहत शहर ही नहीं गांवों एवं कस्बों तक में सभा करने और पर्चे बांटकर बसपा सरकार की जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करने को कहा गया था। सपा कार्यकर्त्ताओं के आंदोलन की तैयारियों को बिफल बनाने और उन्हे घरों से बाहर न निकलने देने के लिए पुलिस प्रशासन ने भी खूब तैयारियां की थी, इसके बावजूद सपा कार्यकर्त्ताओं की फौज बाहर निकली और कहीं मुख्यमंत्री मायावती की शव यात्रा निकाली तो कही पुतला दहन किया। सपा कार्यकत्ताओं को आदोलन के पहले पकड़ने में असफल रही पुलिस ने दुकानों से कामकर घर लौट रहे कर्मचारियों और मजदूरों की जाति पूछी, मुसलमान और यादव बताते ही उनको उठा लिया और रातभर पुलिस लाक अप में बंद रखा और अगले दिन सपा कार्यकर्त्ता बनाकर उनका चालान कर दिया।

कोतवाली थाने की पुलिस ने गोरखपुर महानगर में बलदेव प्लाजा स्थित एक दुकान में काम करने वाले चार कर्मचारियों को दुकान से घर जाते समय पकड़ लिया और सपाई बताकर शांतिभंग की आशंका में उनका चालान कर दिया। बेलीपार थानाक्षेत्र स्थित महावीर छपरा में तो पुलिस ने गुरूवार को वहां रहने वाले तप्पे शाही के बेटे के जन्मोत्सव को मनाने के लिए तम्बू कनात लगा था, रात में पहुंचकर उसे उखड़वा लिया और थाने उठा ले गई। शाही के घर वाले कहते रहे यह सब बच्चे के जन्मोत्सव कार्यक्रम की व्यवस्था के लिए किया गया है, पर पुलिस यह कहती रही उसे सूचना मिली है कि यह टेंट सपा की सभा करने के लिए लगाया गया है। बेलीपार पुलिस की इतनी कड़ी चौकसी के बाद भी सपा के स्थानीय कार्यकर्त्ताओं ने मुख्यमंत्री की शव यात्रा निकाली। यह अलग बात है कि पुलिस ने बाद में उन्हें पकड़ लिया।

पुलिस प्रशासन की सारी चौकसी शहर एवं कस्बों तक में ही सीमित रही। गोरखपुर जिले के सहजनवां विधान सभा क्षेत्र के भिटहां गांव में सपा के राष्‍ट्रीय सचिव डा. केसी पाण्डेय ने सभा की और प्रदेश की बसपा सरकार की कारगुजारियों की जानकारी गांव वालों को विस्तार से दिया। यहा सभा की अध्यक्षता टीएन चतुर्वेदी ने किया। इसी तरह बयासी बाजार में सपा के वरिष्ठ नेता लाल अमीन खां ने एक सभा की और सपा द्वारा प्रदेश की बसपा सरकार की गलत नीतियों की जानकारी देने संबंधी छपवाये गये पर्चों को बंटवाया। कैंपियरगंज में सभा तो नहीं हो पाई पर पर्चे जरूर बांटे गये। बड़गो में संतोष यादव की अगुवाई में और चौरीचौरा में कालीशंकर की अगुवाई में सभा होने का दावा किया गया है।

लेखक एसके सिंह गोरखपुर में पत्रकार हैं.


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