कैबिनेट सचिव शशांक शेखर के ग्रेजुएशन की मार्कशीट फर्जी!

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: नेता विरोधी दल शिवपाल यादव ने राज्‍यपाल को सौंपा ज्ञापन :  विधानसभा में नेता विरोधी दल शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व में शुक्रवार को पार्टी के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर उनका प्रदेश की बसपा सरकार के शासनकाल में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति व बदले की भावना से कार्यकर्ताओं के उत्पीडऩ तथा विधायिका को पंगु बनाने की साजिशों की ओर ध्यान आकृष्ट किया। राज्यपाल से मिलने के बाद राजभवन के गेट पर पत्रकारों से श्री यादव ने कहा कि कैबिनेट सचिव शशांक शेखर के ग्रेजुएशन की मार्कशीट फर्जी है। इसकी जांच होनी चाहिए।

श्री यादव ने राज्यपाल को पार्टी के आंदोलन के दौरान पुलिस बर्बरता, नेताओं के साथ दुर्व्‍यवहार तथा लोकतांत्रिक परम्पराओं के अवमूल्यन से भी अवगत कराया। इसके साथ ही नगरपालिका परिषद अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन को स्वीकृत न करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि मायावती के 4 साल के शासनकाल में मात्र 77 दिन विधान सभा की कार्यवाही चली है। जबकि नियमत: साल में इसकी 90 दिन बैठकें होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने विधान सभा में 21 फरवरी को मात्र 14 मिनट में वर्ष 2011-12 की एक लाख 80 हजार 45 करोड़ रुपए से अधिक की बजट मांगे व संबंधित विनियोग विधेयक बिना किसी चर्चा के पास करा लिए। नगर निकाय संबंधी महत्वपूर्ण विधेयक भी बिना चर्चा के पास हो गया।

विधान सभा की कार्यमंत्रणा समिति ने 1 मार्च 2011 तक सदन के कार्यक्रम निर्धारित किए थे। अनुत्पादक मदों में खर्च कर लगभग 40 हजार करोड़ रुपए का कमीशन मुख्यमंत्री ने प्राप्त किया है। पार्टी के आंदोलन में प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने दुर्व्‍यवहार किया। लखनऊ के पुलिस उपमहानिरीक्षक डीके ठाकुर द्वारा सुनील यादव तथा आनंद भदौरिया को पैरों के तले दबाकर पिटाई की गई। पुलिस हैवानियत पर उतरी हुई है। 10 मार्च को ही मुख्यमंत्री ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भविष्य में आंदोलन न करने और आंदोलन करने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी। सत्ता के नशे में चूर प्रदेश की मुख्यमंत्री लोकतंत्र की सारी मर्यादाओं की धज्जियां उड़ानें में लगी हैं।

तानाशाह मुख्यमंत्री तथा उनके ही पदचिन्हों पर चलते हुए प्रदेश के अधिकारियों ने 17 मार्च के विरोध दिवस को भी कुचलने के लिए सभी सीमाएं लांघ दी। प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव आवास पर ही नजर बंद रहे और उन्हें समाजवादी पार्टी कार्यालय तक नहीं आने दिया गया। इसलिए किसान विरोधी, जनविरोधी, भ्रष्टाचारी, अत्याचारी और तानाशाही बसपा सरकार को बर्खास्त करें। प्रतिनिधिंमडल में नेता अहमद हसन, माता प्रसाद पांडेय, अरविंद सिंह गोप, राजेन्द्र चौधरी आदि नेता शामिल थे। साभार : डेली न्‍यूज एक्‍िटविस्‍ट

डीएनए


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