जागरण वाले मेरे पीछे पड़े हैं : डा. अतुल कृष्ण

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डा. अतुल कृष्णसुभारती समूह के सर्वेसर्वा हैं डा. अतुल भटनागर. अब इन्होंने अपना नाम बदल लिया है. हो गए हैं डा. अतुल कृष्ण. मेरठ में मुख्यालय और ठिकाना है इनका. अस्पताल, अखबार, ट्रस्ट, समाजसेवा... जाने क्या क्या काम धंधे हैं इनके. अरबों-खरबों का कारोबार, समाज-व्यापार है. दैनिक प्रभात नाम से हिंदी अखबार कई शहरों से निकालते हैं.

उर्दू अखबार भी निकलता है. चैनल भी लांच करने जा रहे हैं. इस सबके साथ-साथ कई मोर्चों पर अपने विरोधियों से जंग भी लड़ रहे हैं. उन पर हत्या करने-कराने का आरोप है. सीबीआई चार्जशीट दायर कर चुकी हैं. उनके दुश्मन कहते हैं- डाक्टर साहब तो अब जेल गए या कि तब गए. पर डाक्टर हैं कि जमे हुए हैं सुभारती मुख्यालय के अपने कमरे में, अपनी कुर्सी पर. कहते हैं- ''गलत आरोप लगा है मेरे उपर. अंत तक लड़ूंगा. भले जेल चला जाऊं, लेकिन झुकूंगा नहीं. मेरा एक सिद्धांत है, अन्याय के खिलाफ कभी नहीं झुकता. अंत तक लड़ता हूं. मेरी बर्बादी की दुआ करने वालों के मंसूबे कभी पूरे न होंगे.''

अतुल कृष्ण से मुलाकात कैसे हुई, ये भी बता देते हैं. पिछले दिनों मैं मेरठ गया हुआ था. दैनिक जागरण, मेरठ में कई बरस रहा हूं, सो कई अजीज लोग मेरठ में हैं मेरे. साथ ही बिटिया का एक पीपीएफ एकाउंट भी मेरठ में संचालित है, उन्हीं दिनों से, जिसमें बीते वित्तीय बरस के लिए कुछ पैसे जमा करने थे. जागरण द्वारा खुलवाया गया सेलरी एकाउंट मेरठ में था, जो कई वर्षों से असंचालित था, सो, उसे बंद कर, उसमें के पैसे बिटिया के पीपीएफ एकाउंट में जमा कराने थे. ऐसे ही चंद फुटकर और निजी काम के चलते मेरठ प्रवास पर रहा. और हां, अमिताभ ठाकुर भी मेरठ में पोस्टेड हैं, सो उनसे भी मिलने का मन था. उसी प्रवास के दरम्यान अचानक एक शख्स मिले जो डाक्टर अतुल कृष्ण के काफी करीबी हैं. वे मीडिया से ही हैं. उनसे बात होने लगी. उन्होंने कहा कि डा. अतुल कृष्ण के बारे में मिथ ज्यादा प्रचारित है, सच्चाई कम, आप उनसे सीधे मिलकर जितने भी मुद्दे हैं उन पर दो टूक बात करिए.

मुझे भी लगा कि एक मीडिया हाउस के सर्वेसर्वा से मिल ही लेना चाहिए. यहां मैं बता दूं कि जब मैं दैनिक जागरण, मेरठ में चीफ रिपोर्टर था तो डा. अतुल कृष्ण और हरिओम आनंद में आपस में भयानक मारकाट शुरू हो गई थी. हरिओम आनंद सड़क पर आ गए थे. उन्होंने मीडिया, नेता, कार्यकर्ता सबके हाथ-पांव जोड़कर इस जंग में साथ देने के लिए अपील की. और जैसा कि अपन लोगों का स्वभाव है, जो मुश्किल में दिखता है, जो सड़कछाप दिखता है, उसी के साथ खड़े हो जाते हैं, बिना स्वार्थ. तब मैंने हरिओम आनंद की बातों, आरोपों, खुलासों को जमकर प्रकाशित किया-कराया जागरण में. और, न्यूज सेंस के हिसाब से देखा जाए तो न्यूज भी वही है. क्योंकि डा. अतुल कृष्ण के अंदरखाने के सचों का खुलासा कर रहे थे हरिओम आनंद. एक बड़े घराने में बवाल से रहस्यों की परत दर परत से पर्दा हट रहा था. बाद में इस आपसी जंग में एक मर्डर हुआ. अंततः हरिओम आनंद को सुभारती से पैसा मिला और उन्होंने आनंद हास्पिटल मेरठ में खड़ा कर दिया. पर कहा जाता है कि अब भी दोनों, डा. अतुल कृष्ण और हरिओम आनंद एक दूसरे को नीचा दिखाने और बर्बाद करने में कसर नहीं छोड़ते. दोनों मौके की ताक में रहते हैं. हरिओम आनंद आफेंसिव रहते हैं, तो डा. अतुल कृष्ण एक बड़े साम्राज्य को बचाने की खातिर कई तरह के हमलों से निपटने की प्रक्रिया में डिफेंसिव दिखते-रहते हैं.

डा. अतुल कृष्ण से मेरठ के बागपत रोड पर स्थित सुभारती में मुलाकात हुई. देर तक बात हुई. मेरे सवाल सीधे और तीखे थे. कई बार डाक्टर के चेहरे के भाव कुछ सेकेंड्स के लिए उड़े नजर आए तो कई बार असहज होते दिखे. पर उन्होंने किसी सवाल को टाला नहीं. और न रोका. मैं अपने मोबाइल से उनके जवाब को रिकार्ड कर रहा था. उन्होंने सारे अप्रत्याशित और तीखे सवालों के जवाब दिए. और बेझिझक दिया, चेहरे के भावों को समेटते-सिकोड़ते. बेहद सामान्य कद काठी और पहनावे वाले डा. अतुल कृष्ण के चेंबर में महापुरुषों और पुरखों की तस्वीरें लगी थीं. उनसे पहला सवाल पूछा- डा. अतुल कृष्ण को मास्टरमाइंड माना जाता है. लोग जहां सोचना बंद करते हैं, अतुल वहां से सोचना शुरू करते हैं. ऐसी कई कथाएं हैं आपके बारे में. हकीकत क्या है? और, यह कि आप हर चाल बीस चाल आगे की सोचकर चलते हैं, जिंदगी के शतरंज के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं आप? कि आपको तो जेल में रहना चाहिए, पर इस वक्त आप अपने आफिस में काम कर रहे हैं? कि हरिओम आनंद ने आप पर ढेर सारे कई आरोप लगाए थे और इससे आपकी तस्वीर एक खलनायक की बनती है, क्या सच्चाई है? कि दैनिक जागरण, मेरठ में आपके खिलाफ लगातार बड़ी बड़ी खबरें आजकल छपने लगी हैं, कहीं ऐसा तो नहीं कि आपने भी अखबार शुरू कर दिया तो जागरण को मिर्ची लग गई है? ऐसे दर्जनों सवाल. डा. अतुल ने जो कुछ कहा, उसे संक्षेप में यहां दे रहा हूं, उन्हीं के शब्दों में.

डा. अतुल- दैनिक जागरण वाले मेरे पीछे पड़े हैं, ये सच है. इसलिए क्योंकि वे मेरे खिलाफ खबरें छापकर मुझे डराना चाहते हैं और इस डर को हथियार बनाकर मुझे ब्लैकमेल करके मुझसे पैसे उगाहना चाहते हैं. मेरे खिलाफ खबर छाप दी गई कि मैं बच्चों की तस्करी का धंधा करता हूं. ऐसी ही कई अनाप शनाप खबरें. पर उन्हें जान लेना चाहिए कि मैं अब उनसे ब्लैकमेल नहीं होने वाला. वे पहले दिन खबरें छापते हैं मेरे खिलाफ और अगले दिन विज्ञापन के आदमी को भेज देते हैं डील करने के लिए. लेकिन मैंने इस खेल में न पड़ने का फैसला लिया है. उन्हें जो जो छापना बनता है छापें. मैं उचित मंचों पर उनकी शिकायत करूंगा और उनसे आखिर तक लड़ूंगा. यह भी संभव है कि मेरे द्वारा अखबार निकालने से उन्हें कष्ट महसूस हो रहा हो लेकिन मीडिया क्षेत्र तो सभी के लिए है. मैं समाजसेवा, स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों में जुड़ा हुआ हूं. मीडिया में भी आ गया हूं. और, रही बात शतंरज व चाल की तो बता दूं कि शतरंज के दो विश्व विजेताओं ने दो अलग-अलग बातें कही हैं. एक ने कहा कि वह हर चाल बीस चाल आगे की सोचकर चलता है. और दूसरे ने कहा कि वे आगे की नहीं सोचता, सिर्फ तुरंत की बेहतरीन चाल सोचकर चलता है. तो मान लीजिए कि मैं तुरंत की चाल चलकर सोचता हूं. और यहां चाल का आशय नकारात्मक नहीं बल्कि अपने कर्तव्य से है. मैं सिद्धांतवादी आदमी हूं. मैं किसी को नष्ट करने या मिटाने में भरोसा नहीं करता. मेरी कोशिश अपनी लकीर को बड़ा करने की रहती है. मैं आरोपों और मुश्किलों से घबराता नहीं. रही हरिओम आनंद की बात तो उनको मैंने मेडिकल कालेज में रखा था. बिना उनसे कोई पैसे लिए. जब तक उनके पास एडमीशन का काम था, वे प्रसन्न थे. जब कुछ शिकायतों के बाद उनका काम बदला तो वे मेरे खिलाफ हो गए. वो आदमी मेरे खिलाफ हो गया जिसे मैंने चेयरमैन तक का पद दे डाला था. पर ईश्वर सब जानता है. हत्या के जिस प्रकरण की चर्चा आप कर रहे हैं, वो भी मेरे खिलाफ साजिश है. सीबीआई की चार्जशीट के खिलाफ अदालत जाऊंगा. मैं लड़ूंगा. अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाला आदमी हूं.

ऐसी ही कई बातें कहीं डा. अतुल कृष्ण ने. दुर्भाग्य यह कि मोबाइल वीडियो बनाते समय वायरस से अचानक मोबाइल हैंग हो गया और इस हमले से निपटने में पूरा रिकार्डेड वीडियो क्रैश हो गया. सो रिकार्डेड इंटरव्यू अपलोड न कर सका. जो कुछ मुख्य बातें स्मृति में रहीं, उसे दे दिया. अगर मेरठ दुबारा जाता हूं तो कोशिश करूंगा कि डा. अतुल कृष्ण का फिर इंटरव्यू करूं और लंबा इंटरव्यू करूं ताकि हर सवाल के सिलसिलेवार जवाब लोग पढ़-देख-सुन सकें. अगर आपके भी कोई सवाल डा. अतुल कृष्ण से हों तो उसे नीचे कमेंट बाक्स के जरिए हम तक पहुंचा सकते हैं ताकि उनका जवाब डा. अतुल कृष्ण से मांगा जा सके.

डा. अतुल कृष्ण के बारे में कुछ और जानकारी दैनिक जागरण वालों की किताब ''जागरण जेम'' से मिल सकती है. जिस दैनिक जागरण पर डा. अतुल कृष्ण आज ब्लैकमेल करने और पीछे पड़ने का आरोप लगाते हैं, उसी दैनिक जागरण ने उनके बारे में ''जागरण जेम'' नामक किताब में कसीदे पढ़े हैं. उसी किताब से डा. अतुल कृष्ण के चैप्टर को साभार लेकर यहां डाला जा रहा है-


Atul Krishna : A Multi-Dimensional Approach, Subharti University, Meerut

A multi-faceted personality, is how best one can describe Dr Atul Krishna. A reputed surgeon of North India, it is indeed no small wonder that he is also a prolific writer, one who has actually authored books and that too those with narratives based on incidents sourced from life experiences. It is with this dynamism that he has forged ahead to today stand proud and beaming as the Subharti University he founded transforms into a mini-empire. Starting with Subharti Institute of Medical Sciences, to Subharti Higher Education Group, Guru Gobind Singh Subharti Dental College, Netaji Subhash Chandra Bose Subharti Medical College, Subharti Institute of Technology and Engineering, Panna Dhai Maa Subharti Nursing College, Jyoti Rao Phulle Subharti Physiotherapy College. Sardar Patel Subharti Institute of Law and Subharti College of Management and Information Technology and B. Ed. the list spans an amazing range of disciplines. A fully equipped university with over 5,000 students, the Subharti Hospital, part of the campus, is one of the most acclaimed in Meerut. So when he says, "I have only one desire. I want to make Subharti the Oxford of India," one cannot help but sit up and take notice. It is but obvious that when Atul says something, he means it too, so perhaps we will be witness to the ultimate culmination of the revolution he started some years back.

His wife Dr Mukti Bhatnagar, President of the organization, lends her charisma and aura to every nook and corner of the campus. Other than administering, guiding, planning, incredible as it may sound, she has also contributed some magnificent paintings to make the corridors look vibrant and come alive in a burst of colours. That she is a dancer and singer too, makes us truly wonder at the storehouse of talent. When she says, "A woman is a mother first. I am the mother of the three children that I have borne and also to the thousands of students who come to our university," one can very well gauge the kind of sentiments this specialised entrepreneur attaches to the people associated with her work. Further her statement, "I would never want them to feel they are away from home," strengthens our belief in her complete involvement with the bouquet of Subharti institutions. Prioritising between her private and professional life, Dr Mukti left her practice for ten years to be with her children during their formative years, at her maternal home in Allahabad. "I cherish the time spent with Nanima and thank my mother for this," says their daughter Krishna. The way the conversation flowed from here, it was very evident that all three children bond very strongly with the parents. Daughter Shalya Raaj, following the footsteps of the parents, is a dental surgeon, teaching at Subharti Dental College. "Seeing our children now makes me very proud of my decision," says Mukti with satisfaction, as she sees them settle down to one or other vocation one by one.

Softspoken and gentle Dr Atul Krishna, was always attracted towards creating a casteless society. With his mother, Mrs Rajwati Bhatnagar, he launched the Subharti KKB Charitable Trust, in memory of his father, Dr KK Bhatnagar, to take the same ideals forward. "He is my idol and inspiration to what Subharti is today," he states with a hint of emotions. "In his honour we started our first primary schools in rural India and these charitable schools are still running today," he is proud to declare. One of the goals he pursues in life with a lot of passion, is removal of hatred born out of casteism and communalism. No wonder then that his children carry no surnames and are called Shalya Raaj, Krishna Moorti and Avani Kamal.

One cannot help but marvel at the grandeur of the institutions, that make no compromise with respect to their infrastructure and area of operation. Just the Subharti Dental College itself is located in a stately building on a sprawling area of over 1,50,000 square feet. The student exchange programmes here are happening with Tuft's University, Boston, USA and is also IGNOU study centre for implantology course. With eminent academicians from various fields heading the many institutes in the capacity of Principals and Directors, impressive faculty and a rich array of visiting professors, the placement cell is in an overdrive trying to establish long-lasting relationships with industries to garner maximum support for students in the job sector. The mind-blowing detailing of each and every aspect of the education centres, is capable of leaving anybody speechless. Yes, we have to admit. This doctor couple has left no stone unturned and not stopped at anything, even heaping more and more upon themselves, just in order to script this academic success story for the benefit of thousands of future professionals.

With the unique distinction of conforming to specifications for its collaboration with 'Smile Train' a New York based NGO, the charitable trust has given free treatment and operated upon patients of cleft lip and cleft palate. As if the list of achievements is still not long enough, the numerous teaching, learning workshops in a variety of fields to keep the students and staff updated, has a wide range of experts and delegates taking part from time to time. Check-up camps and participation in national programmes as well as rural health as focus area, together with several activities centred around their old age home and orphanage, make Subharti truly an unique venture.

Quite in the way that he has mastered the game of chess, Atul Krishna at every turn of life, plans his moves judiciously. He is a fan of the singer Pradeep and is virtually in love with Mukesh's, "Hum ko man ki shakti dena (Give me strength)," while his next choice, "Hum laye hain toofan se kashti nikal ke (We have sailed to safety through the storm)," speaks volumes for the feeling of completeness and achievement that he now nurtures after his many years of toil. A salute to Subharti is the kind of response one gets after getting exposed to this great initiative.


आभार

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

दिल्ली


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