कास्ट कटिंग : पीपुल्स में पुल आउट बंद, छंटनी शुरू

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गले पड़े सफेद हाथी से कैसे मुक्ति पाई जाए, यह पीपुल्स के मालिकों के समझ में नहीं आ रहा है। जो भी कॉस्ट कटिंग का फॉर्मूला दे रहा, उसे सिर-माथे लिया जा रहा है। ऐसे ही एक फॉर्मूले पर पीपुल्स समाचार ग्वालियर में अमल होने लगा है। संभाग के एडीशन में जाने वाले पुल आउट बंद कर दिए गए हैं और छंटनी होने लगी है। छंटनी का भय कर्मचारियों के मन में इसलिए भी बैठाया जा रहा है ताकि वे इंक्रीमेंट की बात कहना तो दूर मन में सोच भी नहीं सकें।

ग्वालियर से पीपुल्स समाचार के चार डाक संस्करण निकलते थे। इन चारों संस्करणों में चार-चार पेज के पुल आउट जाते थे। मूल अखबार 12 पेज का जाता था। अब बारह ही पेज में सब कुछ समेट दिया गया है। यानी चार पेज कर दिए गए हैं। अब जब पेज कम कर दिए गए हैं को पेज की मॉनिटरिंग करने वालों का क्या काम रहा? ऐसे में संभाग प्रमुख धर्मेंद्र भदौरिया को पहले तो सात दिन के अवकाश पर भेजा गया और अब उनसे पूरी तरह से नमस्कार कर ली गई। कहा जा रहा है कि ऐसा सभी संस्करणों में हो रहा है। इंदौर में Žयूरो बंद करने का फरमान पहले ही सुनाया जा चुका है।

कॉस्ट कटिंग के आलम यह है कि  पीपुल्स समाचार के कार्यकारी निदेशक धीरज वर्मा भी इससे अछूते नहीं हैं। वे कभी छह अंकों में वेतन पाते थे। अब उनका वेतन पांच अंकों में समेट दिया गया है। वो भी इसलिए क्योंकि धीरज के पिता पीपुल्स के मालिक सुरेश विजयवर्गीय के परिचित हैं। धीरज वर्मा से ग्वालियर यूनिट संभालने को कहा गया है। वे मंगलवार को ग्वालियर में थे। पीपुल्स की टीम को उन्होंने बताया कि हम ब्यूरो बंद नहीं कर रहे हैं, सिर्फ कॉस्ट कटिंग कर रहे हैं और कॉस्ट कटिंग के लिए ही पुल ऑउट बंद किए जा रहे हैं। चूंकि वे मालिक की भाषा बोल रहे थे, इसलिए लोगों ने सुना तो मौन साधकर पर लोगों को उनकी बातों पर भरोसा नहीं हुआ। पीपुल्स ग्वालियर में छंटनी की तलवार को देख दहशत का आलम है। लोग नई नौकरी तलाशने में जुट गए हैं क्योंकि उन्होंने माह जुलाई 2009 में पीपुल्स ज्वाइन किया था तब से एक पाई उनका वेतन नहीं बढ़ा है। इंक्रीमेंट की तो बात दूर महीने की बीस तारीख तक वेतन बंट पाता है। इससे पहले चार बार मकान-मालिक और तीन बार दूध वाला टोक चुका होता है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित


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Comments (10)Add Comment
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written by sanjay gupta, April 10, 2011
ismein maliko ki koi galti nahi hai unke sath lagatar vishwasghat ho raha hai, CEO ke charo taraf sidharth samal,shrikant kesarwani,dheeraj verma or bajaj jaisey log deewar bankar khare hai , yeh log aisey kisi bhi insaan ko sanstha mein tikney nahi dete jo ki CEO ko sahi rasta dikha sakey,yeh matr itna chahte hai ki CEO print media ko itna samajh sake jitna yeh teeno(sidharth,shrikant,dheeraj) google se dekh-dekh kar khud samjhe hai or sikha hai KUON KI EN TEENO KO HI PRINT MEDIA KA P BHI NAHI AATA.yeh teeno jante hai ki koi doosra akhbar inhe executive ki post par bhi nahi rakhega,V.P,E.D,G.M,BANNE KA MOKA BAR BAR NAHI MILTA.ab yadi bhavishya mein yaha se nikaley gaya tab en posto ke liye khud ka akhbar kholna parega.OR BAJAJ SAHAB KI TO AKHRI JUGAR LAG GAYI THI DOOSRA KOI BHI AKHBAR MALIK INKA NAAM BHI SUNNA PASAND NAHI KARTA
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written by ek patrakar, April 10, 2011
पीपुल्स वालों ने सबसे ज्यादा अत्याचार अपने गुना ऑफिस पर किया है....गुना की मेहनती टीम को एक झटके में बाहर निकल दिया गया l
हालांकि मैं पीपुल्स समाचार रोज तो नहीं पड़ता था, लेकिन गुना की खबरें शिवपुरी में भी सुर्खियाँ बटोरती थीं
यही कारण था की शिवपुरी में रहने के बाद भी मैंने पीपुल्स सिर्फ गुना की खबरें पड़ने के लिए सुरु किया
मैं गुना बियूरो नंदकिशोर कुशवाह को अच्छी तरह जानता था, गुना में काम करने के दोरान मेरी उस से दोस्ती हुई थी
इमानदारी बहुत है उसके अन्दर, लेकिन बेचारे के भाग्य फूटे थे जो पीपुल्स में आ गया
बस यही कहूँगा की पीपुल्स ने एक अच्छी टीम और अच्छे इंसानों को खो दिया
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written by ek patrakar , April 10, 2011
पीपुल्स वालों ने सबसे ज्यादा अत्याचार अपने गुना ऑफिस पर किया है....गुना की मेहनती टीम को एक झटके में बाहर निकल दिया गया l
हालांकि मैं पीपुल्स समाचार रोज तो नहीं पड़ता था, लेकिन गुना की खबरें शिवपुरी में भी सुर्खियाँ बटोरती थीं
यही कारण था की शिवपुरी में रहने के बाद भी मैंने पीपुल्स सिर्फ गुना की खबरें पड़ने के लिए सुरु किया
मैं गुना बियूरो नंदकिशोर कुशवाह को अच्छी तरह जानता था, गुना में काम करने के दोरान मेरी उस से दोस्ती हुई थी
इमानदारी बहुत है उसके अन्दर, लेकिन बेचारे के भाग्य फूटे थे जो पीपुल्स में आ गया
बस यही कहूँगा की पीपुल्स ने एक अच्छी टीम और अच्छे इंसानों को खो दिया
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written by sudarshan, April 09, 2011
me pori tarah se bajaj sahab ke nirdeshan me kam karta hoon. he is very good men. ab khabi-khabi GALA GEELA karna to koi kharab bat nahi hai. but he is very dedicated 2 samachar. yas manoj verma ko office me GALA GEELA kar ke nahi aana chhiye. issee office ka decoram bigadata hai. Yadi kam na krne walo ko-aafwah fallanee walo ko shant kiya ja raha to baki logno ke pet me dard kyo ho raha hai.
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written by Ek saathi peoples samachr, April 07, 2011
written by Ek saathi, April 07, 2011 peoples samachar gwalior me to tala lagega,yah lachchhan to usi din dikh gaye the jab sampadak manoj verma shivapuri tour par gaya tha.sava botal gatkane ke bad bhi jab pet nahi bhara to rat 11.30 buero valo se ek botal ki aur vyavastha karane ko kaha,burro valo nr haath khade kiye to hotel me huddang kiya. do din bad buero band karne ke liye bulai gai be thak me buero valo ne sampadak ko gariyaya tha to sampadak ki sitti pitti gum ho gai thi.awadhesh bajaj ke ye chaparghantu akhbar me ye kar rahr hr.
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written by Shyam Hardaha Lokmat samachar Nagpur, April 06, 2011
Yah desh ka bada durbhagya hai ki aj 21we sadi me bhi des ka nagrik akhbae nahi lottery kharidta hai.
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written by lokenara, April 06, 2011
pepoles managment logo ke value nahi janta. jise DHARMENRA jee ke sath kiya visa kal kise ke sath bhi ho sakta hai. DHARMENRA jee senior patrakar hai- bajaj badmash hai. he dont like deserving candidate. BAJAJ ko to DARRU PILNE WALE AUR Haa-Mee, Haa milane wale chaiya.
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written by lajpat agrawal, April 06, 2011
peoples me jab se bajaj aaya hai tab se iska bantadhar ho raha hai. mi he janta hu ki peoples me log kitne tanab me kam kar rahe hai. kam karne walo ko GADHA bana diya gaya hai. bajaj ke chhammach maje kar rahe hai. gwalior peoples se jude GUNA_ASHOKNAGAR_SHEOPUR beuro band kar diye ghye hai. ukta beuro me kam karne walo se kaha ja raha hai ki bhopal jakar join kar lo. ab 5 se 7 hazar sailry pane wala bhopal ja kar kya khayega aur kya ghar bhazega. ham logao ko samaz me nahi aa raha ki kis ghadi me ham loga ne join kia aur kis ghadi me BAJAJ ke FOOT peoples me pade ab gwalior me TV sale karne wale dheeraj verma ko bhej dia hai.Dheeraj ko print line ke ABCD nahi aati. par kya kare maaliko ke naak ka ball hai, isliye maje kar raha hai. cost cuting kar raha hai. manoj verma daaru pekar office aata hai par uski sikayat kissse kare? bajaj ka CHARAN SEWAK hai manoj verma. informer bhe hai bajaj ka. sailry ke laa-le hai peoples mai. gwalior me peoples baise hi kam circulate hata tha aur ab isa lag raha ki bajaj iske waat laga kar he manega.
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written by Ek saathi, April 06, 2011
पीपुल्‍स जबलपुर में भी यही हालात है यहां के सारे प्रान्‍तीय सेंटर बंद कर दिये गये है कहा जा रहा है कि हम नये व्‍यूरो बनने वाले है पर किसी को इस बात पर इसलिये भरोसा नही हो रहा है क्‍योंकि किसी भी सेन्‍टर वालों को पीपुल्‍स ने एक धेला भी खर्च के नाम पर नही दिया वे बेचारे अपना खर्च खुद ही चलाते थे उस पर उन पर विज्ञापन लाने क दबाब भी बना रहता था समझ्‍ा में नही आता कि पीपुल्‍स के मालिकों को अखबार निकालने की सलाह किस भलेमानुस दी थी अभी तक डैन्‍टल और मेडीकल कालेज में लाखों रुपये लेकर एडमीशन देने वाले इन मालिकों के पास पैसा आता ही था पर अखबार में पैसा केवल जा ही रहा है उस पर पीपुल्‍स की मालकिन जो पीपुल्‍स के मालिक की बेटी है को पिक्‍चर बनाने की सूझ्‍ा गई और उन्‍होंने एक पिक्‍चर भी बना डाली वो पिक्‍चर कहां रिलीज हुई उनके अलावा और किसी को नहीं मालूम पीपूल्‍स जबलपुर में भी प्रान्‍तीय डेस्‍क पर काम कर रहे कर्मचारियों में भी डर समाया हुआ है कि उन्‍हे कब मेनेजमेन्‍ट बाहर का रास्‍ता दिखा दे कह नही सकतें रहा सवाल नये ब्‍यूरों को तो लगता नही। है कि कोई भी पीपुल्‍स के साथ काम करने के लिये तैयार हो सकेगा बेहतर तो यही होगा कि पीपुल अपने एडीशन ही बंद कर दे क्‍योंकि जबलपुर में हो या ग्‍वालियर तीन चार हजार कापी से ज्‍यादा बिकती नही है पर खर्च हर महीने लाखों का हो रहा है क्‍योंकि भोपाल में कुछ ऐसे हाथी इन लोगों ने पाल कर रखे है जो दूसरों को भी भोजन हजम कर रहे है
एक साथी
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written by sanjay karir, April 06, 2011
peoples smachar bhopal main ek banglow par kuch logo ki pitai bhi hue thi.
sab dare hai.

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