मारियो ने ऐसे संवारा हिंदुस्तान

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हिन्दुस्तान को सँवारने से पहले मारियो ने हिन्दी लिपि और विशाल हिन्दी पाठकों की प्रकृति को समझने के लिए गहन रिसर्च की। उन्होंने पाया कि हिन्दी के अक्षर एक खास प्वाइंट साइज से छोटे होने पर आँखों को परेशानी पैदा करते हैं। इसलिए उन्होंने खासतौर पर हिन्दुस्तान के लिए नए अक्षर डिजाइन किए। उनका प्वाइंट साइज बढ़ाया। यही नहीं दो लाइनों के बीच की जगह भी पहले से ज्यादा की। हालाँकि मारियो जब ये कर रहे थे तो हिन्दी पाठकों की ज्यादा खबरों की जरूरत भी उनके ध्यान में थी।

इसीलिए दो लाइनों, खबरों और फोटो के बीच खाली जगह का बेहतर इस्तेमाल करने के बावजूद उन्होंने ज्यादा खबरों की जगह बनाई। इसीलिए एक पन्ने पर छपने वाले शब्दों की औसत संख्या पहले से दस फीसदी तक बढ़ गयी है। मारियो के मुताबिक ज्यादा रंगों का इस्तेमाल भी पढ़ने में बाधा बनता है। इसलिए रंगों की भीड़ को कम कर दिया। यही नहीं मारियो ने पहले पन्ने पर छपने वाला अखबार का नाम (मास्टहेड) खास तौर पर डिजाइन किया। इसके लिए उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय लिपि विशेषज्ञों की भी मदद ली। साभार : हिंदुस्तान

 


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