शांति और प्रशांत भूषण के खिलाफ स्टांप चोरी का वाद दायर, जवाब तलब

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: 1.33 करोड़ के स्टाम्प शुल्क कमी से लटकी रजिस्ट्री : 20 करोड़ की भूमि एक लाख में ली : इलाहाबाद के पॉश इलाके सिविल लाइंस में लगभग बीस करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति (भवन सहित 7818 वर्गमीटर भूमि) की पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण एवं उनके वरिष्ठï वकील पुत्र प्रशान्त भूषण, द्वितीय पुत्र जयन्त भूषण एवं पुत्री शेफाली भूषण द्वारा करायी जा रही रजिस्ट्री एक करोड़ तैंतीस लाख सात हजार नौ सौ रुपये मूल्य के स्टाम्प की कमी के कारण विवाद में फंस गयी है।

विभाग ने रजिस्ट्री विलेख जब्त करके शांति भूषण एवं उनके परिजनों के विरुद्ध यथोचित स्टाम्प की कमी का वाद (संख्या 1629/10-11) कायम करके उनसे जवाब-तलब कर लिया है। यह वाद स्टाम्प एक्ट की 47ए/33 के तहत कायम किया गया है। ज्ञातव्य है कि 12 अक्टूबर 2010 को देश के पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, उनके वरिष्ठ पुत्र प्रशान्त भूषण, उनके द्वितीय पुत्र जयंत भूषण एवं उनकी पुत्री शेफाली भूषण के नाम बंगला नम्बर 19 (पुराना) 77/29 (नया) तथा 19-ए (पुराना) 79/31 (नया) एल्गिन रोड, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग की भूमि सहित बने हुए बंगले को 'एग्रीमेंट टू सेल' रजिस्ट्री मात्र एक लाख रुपये में की गयी है। यह 'एग्रीमेंट टूल सेल' हरिमोहन दास टंडन, सुधीर टंडन एवं सतीश टंडन ने 12 अक्टूबर 2010 को दो हजार रुपये के स्टाम्प पेपर पर मात्र पांच हजार रुपये का भुगतान लेकर किया था।

एग्रीमेंट टू सेल के समझौते के तहत 31 दिसम्बर 2010 तक उक्त भूमि की रजिस्ट्री की जानी थी। गत 29 नवम्बर 2010 को उक्त भूमि की रजिस्ट्री के विलेख जब उपनिबंधक कार्यालय में प्रस्तुत किये गये तो उसमें कुल स्टाम्प शुल्क 47,700 रुपये मूल्य का लगाया गया था। रजिस्ट्री विलेख के अनुसार इस भवन-भूमि का नगर निगम का वार्षिक मूल्यांकन 33,660 रुपये है, जिसका बीस गुना 6,67,000 रुपये होता है। इस 6,67,000 रुपये पर 46,700 रुपये मूल्य की स्टाम्प ड्यूटी होती है। एग्रीमेंट टू सेल के समय 2000 रुपये मूल्य की स्टाम्प ड्यूटी लगायी गयी थी इसलिए रजिस्ट्री विलेख के साथ 44,880 रुपये की स्टाम्प ड्यूटी लगायी गयी।

रजिस्ट्री विलेख जब उपनिबंधक कार्यालय को मिली तो स्टाम्प शुल्क कम होने के कारण उपनिबंधक ने रजिस्ट्री नहीं की और उ.प्र. स्टाम्प एक्ट के धारा 47 ए केतहत रजिस्ट्री विलेख अपने कब्जे में ले लिया और उचित कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को संदर्भित कर दिया।

प्रलेख में जो तथ्य लिखे गये हैं, उसके अनुसार हस्तान्तरित संपत्ति का दर्शाया गया बाजारी मूल्य उ.प्र. स्टाम्प (संपत्ति का मूल्यांकन) नियमावली की 1997 केनियम-4 के अधीन कलेक्टर द्वारा निर्धारित की गयी मूल्यसूची के आधार पर निकाले गये न्यूनतम मूल्य से भी कम है। कलेक्टर द्वारा दिनांक 26 अगस्त 2006 को निर्गत की गयी मूल्यसूची के द्वारा इस क्षेत्र की जो दरें निर्धारित हैं, उससे अन्तरित संपत्ति का न्यूनतम मूल्य आंकलित करने के लिए भवन के भूमि का मूल्यांकन 24,000 रुपये प्रतिवर्गमीटर की दर से किया जाना चाहिए था। प्रश्नगत विलेख में 49 सिविल स्टेशन, जिसका नगर निगम नं. 19 (पुराना) 77/29 (नया) 19-ए (ओल्ड) 79/31 (नया) न्यू लाल बहादुर शास्त्री मार्ग (एल्गिन रोड), इलाहाबाद का अंश भाग का हस्तान्तरण किया गया है में से अन्य क्रेताओं को विभिन्न तिथियों में अंकित अंश भाग का निष्पादित प्रलेख दिनांक 7 अक्टूबर 2010, 8 अक्टूबर 2010, 12 अक्टूबर 2010 एवं 14 अक्टूबर 2010 में भूमि 24,000 रुपये की दर से आगणन कर स्टाम्प शुल्क अदा किया गया है।

भूमि का क्षेत्रफल 7818 गुना 24000 (187632000) है। निर्मित क्षेत्रफल 970 गुना 5500 (2947830) है। इस तरह कुल मालियत 190779830 की है। विलेख पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क 1,33,54,600 रुपया होता है। विलेख पर प्रदत्त स्टाम्प शुल्क 46,700 रुपया है। विलेख पर कमी स्टाम्प शुल्क 1,33,07,900 रुपये की है। इस प्रकार उक्त गणना से स्पष्ट है कि विलेख में 1,33,07,900 रुपये का स्टाम्प शुल्क कम है। शेष स्टाम्प शुल्क जमा करने का अवसर पक्षकार को दिया गया, जिससे उसने असहमति व्यक्त की। उपनिबंधक ने मूल विलेख को रजिस्ट्री करने से पूर्व धारा 47ए (1) अन्तर्गत बाजारी मूल्य के निर्धारण तथा उस पर देय स्टाम्प शुल्क के निर्धारण हेतु संदर्भित कर दिया।

'एग्रीमेंट टू सेल' में भी उ.प्र. स्टाम्प एक्ट 2008 के अनुसार स्टाम्प शुल्क या भुगतान नहीं किया गया था। एक्ट की अनुसूची (उ.प्र. स्टाम्प अधिनियम के अधीन लिखतों पर स्टाम्प शुल्क) की धारा 24 स्पष्टीकरण एक में कहा गया है कि इस अनुच्छेद में प्रयोजनों के लिए किसी स्थावर संपत्ति के विक्रय के करार के  मामलों में जहां निष्पादन के पूर्व या निष्पादन के समय कब्जा दे दिया जाय या हस्तांतरण पत्र का निष्पादन किये बिना कब्जा दे दिये जाने का करार किया गया हो वहां करार को हस्तांतरण पत्र समझा जायेगा और उस पर तदनुसार स्टाम्प शुल्क देय होगा। चूंकि दोनों पक्षों में किरायेदारी विवाद चल रहा था और उक्त संपत्ति बहैसियत किरायेदार शांति भूषण के कब्जे में है इसलिए 'एग्रीमेंट टू सेल' के समय कुल मूल्य का 7 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क दिया जाना चाहिए था जो कि नहीं दिया गया।

साभार : हिंदी दैनिक 'डेली न्यूज एक्टिविस्ट'


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Comments (4)Add Comment
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written by ishu, April 16, 2011
Madan ji,
Sahi pahchana aapne. Jo aap kah ya samajh rahe hain wahi satya hai. Bechare makan malik ki jindagi haram kar di hogi inlogon ne. Court ke chakar kaat kaat ke padal ho gaya hoga aur tang aake jameen likhne ko badhya hua hoga.
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written by yogendra Gupta, April 14, 2011
It ws accptd. Anna thnk again. With th people like Bhushan he is playing with the immotion of innocent Indians like politicians. If Anna rely want to do somehing for a Comman indian man than he has to make distance with Bhushan , Agnivesh & Kiran & select dynemic, dedicated, honest & briliant comman man not celebrity activist other wise ice again our immotion wii b cheated as earlier many time

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written by d.jphn, April 14, 2011
han ji kuch aisa hi mamla hai.
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written by मदन कुमार तिवारी, April 14, 2011
यह है सिविल सोसायटी के सिविलाईज्ड जन जो जन लोकपाल बनाते हैं। आपके लेख से लगता है की भुषण परिवार टंडन के यहां किरायेदार था। वह मकान उनके कब्जे मे था । किरायेदारी का विवाद चल रहा था , कोई उपाय निकलता न दिखने पर टंडन परिवार को अपनी संपति बेचनी पडी । अगर यह सही है तो यह सिर्फ़ स्टाम्प बचाने का मामला नही है बल्कि एक मकान मालिक को मुकदमे में उलझाकर संपति लिखवाने का भी मामला है , यह अपराध की श्रेणी में आता है । आप कर्‍पया स्पष्ट करे की क्या जैसा मैने लिखा है वैसा हीं मामला है ।

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