पीपुल्‍स समाचार ने बंद किए गुना और अशोकनगर संस्‍करण

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: दोनों जिलों के ब्‍यूरो कार्यालय पर भी तालाबंदी : पीपुल्‍स समाचार ने ग्‍वालियर यूनिट से जुड़े गुना और अशोकनगर संस्‍करण बंद कर दिया है. अब इन दोनों जिलों में अखबार नहीं भेजे जा रहे हैं. दोनों ब्‍यूरो कार्यालय भी बंद कर दिए गए हैं. पिछले पन्‍द्रह दिनों से दोनों जिलों से समाचार ग्‍वालियर यूनिट को नहीं भेजा रहा है. पीपुल्‍स प्रबंधन के इस निर्णय के बाद लगभग दस लोग बेरोजगारों की श्रेणी में आ गए हैं.

मध्‍य प्रदेश के अशोक नगर और गुना जिले का संस्‍करण यानी पुल आउट अब तक ग्‍वालियर यूनिट से आ रहा था. परन्‍तु प्रबंधन ने पिछले लगभग दो सप्‍ताह से इसे बंद कर दिया है.  दोनों जिलों में पीपुल्‍स ने ब्‍यूरो कार्यालय खोल रखे थे. जिसमें गुना में छह तथा अशोक नगर में चार लोग काम कर रहे थे. दोनों कार्यालय मोडम से जुड़े हुए थे. अब इन जिलों में पीपुल्‍स समाचार पत्र की प्रतियां भी नहीं भेजी जा रही हैं.

प्रबंधन ने अखबार के देर से पहुंचने तथा अपनी परेशानी का रोना रोते हुए दोनों जिलों के संस्‍करणों पर रोक लगा दी. दोनों संस्‍करण एक साल पहले ही ग्‍वालियर यूनिट की स्‍थापना होने के बाद से उससे जुड़े थे. सूत्रों का कहना है कि दूसरे ज्‍यादातर अखबारों के पुल आउट भोपाल से आते हैं, जबकि पीपुल्‍स का ग्‍वालियर से आ रहा था. ग्‍वालियर से इन दोनों जिलों की दूरी ज्‍यादा होने से समाचार पत्र पहुंचने में देरी होती थी. जिससे सर्कुलेशन भी प्रभावित होता था.

प्रबंधन ने इसके बाद ही दोनों संस्‍करणों से जुड़े पत्रकारों को अपना फरमान सुना दिया कि यहां से उन्‍हें फायदा नहीं है, लिहाजा दोनों जिलों के ब्‍यूरो कार्यालय फिलहाल बंद किए जा रहे हैं. इन्‍हें बाद में भोपाल एडिशन से जोड़ने की बात कही गई है परन्‍तु अभी तक प्रबंधन की तरफ से कोई निर्णय या स्‍पष्‍ट आदेश अपने कर्मचारियों को नहीं दिए गए हैं. ना ही यह बताया गया है कि कब तक इन दोनों एडिशनों को फिर से शुरू किया जाएगा.

इसे लेकर यहां पीपुल्‍स समाचार को अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारी परेशान हैं. बताया जा रहा है कि उनका पिछले माह की सेलरी भी अभी तक नहीं दी गई है. ना ही उन्‍हें समाचार भेजने को कहा गया है. इन दोनों जिलों से समाचार नहीं लिया जा रहा है. हालांकि प्रबंधन ने ब्‍यूरो कार्यालय में पड़े सामानों को मंगवाया नहीं है. दोनों कार्यालयों में दो-दो कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम पड़े हुए हैं, जिससे ब्‍यूरो से जुड़े कर्मचारी अभी भी उम्‍मीद लगाए बैठे हैं.


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