धनबाद में तेवर नहीं दिखा पाया भास्‍कर, हॉकरों ने प्रतियां फूंकी

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लगभग दो माह की तैयारी तामझाम और तोड़फोड़ के बाद बाजार में उतरे भास्‍कर को देख पाठकों ने पहली नजर में ही सिरे से नकार दिया। जिस तरह बैनर व पोस्‍टर में दावे किए गए थे वैसा कुछ भी नहीं दिखा। सिर्फ गिनाने के लिए उसके संस्‍करणों में एक और संस्‍करण जरूर जुड़ गया। लांचिंग के एक दिन पहले पाठकों के बीच बांटे गए चार पेज के पोस्‍टर में भास्‍कर ने यह दावा किया था कि पहले दिन 32 पेज का अखबार होगा, लेकिन पाठकों को सिर्फ 24 पेज ही मिले।

इस कारण पाठकों में भारी आक्रोश है। हालांकि भास्‍कर को मात मिलेगी इसका संकेत पहले से ही मिलने लगा था, जब दूसरे अखबारों से उसने तोड़-फोड़ की प्रक्रिया शुरू कर दी। जागरण से तो कोई गया नहीं। हिंदुस्‍तान से जो तीन गए उनमें से एक पूनम तिवारी लांचिंग के एक दिन पहले ही लौट आईं। उसने भास्‍कर की व्‍यवस्‍था का रोना रोते हुए भविष्‍य में ऐसी गलती करने का माफीनामा लिखा। हिंदुस्‍तान के संपादक ओमप्रकाश अश्‍क के लंबे समय का गहरा अनुभव और उनके सानिध्‍य में काम कर चुके दैनिक जागरण के संपादक बसंत भारतीय की रणनीति ने भास्‍कर को पहले ही दिन पटकनी दे दी। दोनों ने अपने अपने अखबारों के बेहतरीन कंटेंट जुझारू तेवर का अखबार में नजारा पेश कर भास्‍कर को हर मोर्चे पर चित कर दिया।

इसे देखकर ऐसा लगता है कि बिहार में भी भास्‍कर की राह आसान नहीं होगी। रांची में भले ही भास्‍कर ने थोड़ा बहुत बढ़त लिया हो, लेकिन धनबाद में उसे पांव जमाने में काफी मशक्‍कत करनी होगी। रांची में उसने अन्‍य अखबारों के बेहतरीन पत्रकारों को ऊंची कीमत पर खरीद लिया। शायद यही वजह रही कि उसने काफी हद तक अन्‍य अखबारों को नुकसान पहुंचाया। लेकिन धनबाद में प्रबंधन ने ऐसी व्‍यवस्‍था नहीं कि जिसका खामियाजा उसे लांचिंग के दिन ही भुगतना पड़ा। वैसे अन्‍य अखबारों के कर्मी भी भास्‍कर से ऊंचे वेतन की उम्‍मीद लगाए बैठे थे। जागरण में बसंत भारतीय के प्रबंधन कौशल, हिंदुस्‍तान में ओमप्रकाश अश्‍क पर टीम का अटूट भरोसा काम आया।

पहले ही दिन भास्‍कर का सर्कुलेशन सेंटर खाली-खाली दिखा। भास्‍कर की वादाखिलाफी के चलते हॉकर और आमलोग नाराज भी दिखे। भास्‍कर ने 32 पेज का छापने का वादा करके 24 पेज दिया था. जबकि हॉकरों को भास्‍कर से साइकिल या ऐसे ही किसी गिफ्ट की उम्‍मीद थी, परन्‍तु भास्‍कर प्रबंधन ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया, जिसके चलते कुछ नाराज हॉकरों ने पहले ही दिन भास्‍कर की प्रतियां जला दीं।

भास्‍कर

भास्‍कर

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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