सिधार चुके संपादकों की पोल खोलकर फंसे विनोद मेहता

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: एक के परिजनों से बिना शर्त माफी मांगी : कुछ समय पहले विनोद मेहता ने आउटलुक में एक जोरदार आर्टिकल लिखा था. इसमें उन्होंने दो नामचीन संपादकों, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, की पोल खोली थी. आरके करंजिया उर्फ रुसी और अयूब सईद. करंजिया ब्लिट्ज के संपादक हुआ करते थे. अयूब 'करेंट' के एडिटर हुआ करते थे. विनोद मेहता ने लिखा था कि ये लोग हर साल लीबिया जाते और कर्नल गद्दाफी की तरफ से भेंट किए गए रुपये पैसे माल सामान आदि को अटैचियों में भर भर कर लाते.

कुछ इसी तरह का लिखा था विनोद मेहता ने. तब विनोद मेहता के उस लिखे के बारे में भड़ास4मीडिया पर भी खबर प्रकाशित की गई थी. उसे अब भी पढ़ सकते हैं, इस शीर्षक पर क्लिक करके- दो खाली सूटकेस लेकर विदेश जाने वाले ये संपादक. अब विनोद मेहता ने पलटी मार ली है. बिना शर्त माफी मांगी है. लेकिन सिर्फ एक संपादक के परिवार से. आरके करंजिया उर्फ रुसी के परिवार से. विनोद मेहता ने दूसरे संपादक अयूब सईद के परिवार वालों से माफी नहीं मांगी है.

अरे भाई, माफी मांग ही रहे थे तो दोनों के परिवार वालों से मांग लेते. ये क्या कि रुसी के परिजनों से मांग ली, और दूसरे के परिजनों को एक बड़े लांछन के साथ जीने के लिए छोड़ दिया. आउटलुक के ताजा अंक में पत्र कालम में विनोद मेहता का माफीनामा इस तरह प्रकाशित हुआ है- Clarification : In my Delhi Diary (Mar 21), I made some references to the late R.K. Karanjia, former editor of Blitz and one of India’s most respected journalists, and Col Gaddafi. I withdraw those remarks unreservedly and apologise to Russy’s family for any unintended hurt caused. -Vinod Mehta


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