दिल्‍ली तक आवाज पहुंचाने के बाद भी हल नहीं हुई हाकरों की समस्‍या

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जबलपुर में टाइम्‍स ऑफ़ इंडिया, दिल्ली के एजेंट के द्वारा लगातार हाकरों का शोषण किया जा रहा है. पिछले 20 वर्षों से हाकर इसकी शिकायत कर रहें हैं लेकिन भोपाल में बैठे भट्ट की जबलपुर के एजेंट पर मेहरबानी के कारण भेजी गयी शिकायतें रद्दी की टोकरी में चली जाती रही. जबलपुर का एजेंट हाकरों को 15 प्रतिशत कमीशन देता है तथा लोकल पेपर लेने की शर्त पर ही उनको टाइम्‍स ऑफ इंडिया देता है.

यही कारण है कि 10 साल में उसकी लोकल सेल 10 गुनी हो गई तथा टाइम्‍स ऑफ़ इंडिया की सेल घाट कर 4000 कॉपी रह गई,  जबकि इस बीच हिंदुस्तान टाइम्‍स की 2500 कॉपी की सेल जबलपुर में ख़तम हो गई है. परन्‍तु इसका फायदा टाइम्‍स ऑफ इंडिया को नहीं मिला. टाइम्‍स का एजेंट बगैर एसेंट के हाकरों को पेपर देता है.  हाकरों ने हड़ताल भी की थी लेकिन इसकी खबर दिल्ली तक नहीं पहुंची,  इसलिए जबलपुर के 60 हाकर 30 मार्च को दिल्ली जाकर योगेश मिश्र एवं राजीव लोचन मिश्रा से मिले. उन्होंने एक हफ्ते में समस्या हल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक समस्या जस की तस है.

मीटिंग

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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