हाईकोर्ट का आदेश : 15 दिनों में पत्रकारों का अंतरिम दिलवाएं अपर लेबर कमिश्‍नर

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: योगेश गुप्‍ता पप्‍पू और अजय मुखर्जी दादा ने किया था मुकदमा : बनारस के बड़े अखबारों में कर्मचारियों को मूल वेतन का 30 प्रतिशत अंतरिम भुगतान करने को लेकर चल रहे मामले हाईकोर्ट ने अपर श्रमायुक्‍त को नोटिस देने के 15 दिनों के अंदर पूरी रकम जमा करवाने का आदेश दिया है. साथ ही ऐसा न होने पर अखबार संस्‍थानों को रिकवरी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपर श्रमायुक्‍त के अपने आर्डर में किया गया करेक्‍शन  स्‍वत: निरस्‍त हो गया है.

24 अक्‍टूबर 2008 को मजीठिया वेज बोर्ड के आदेश के आधार पर काशी पत्रकार संघ के अध्‍यक्ष योगेश गुप्‍ता पप्‍पू तथा समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अंजय मुखर्जी दादा ने श्रम आयुक्‍त के यहां आवेदन देकर आज, जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्‍तान, गांडीव के कर्मचारियों को मूल वेतन का तीस प्रतिशत अंतरिम लागू करवाने की मांग की थी. जिसके बाद अपर श्रमायुक्‍त ने 18 दिसम्‍बर 2009 को आदेश जारी कर इस पूरे मामले की जानकारी अखबार प्रबंधन से मांगी थी, तथा ऐसा न करने पर रिकवरी करने की चेतावनी दी थी.

बाद में इस मामले में अखबार के प्रबंधन ने कोई नोटिस नहीं लिया. जब अपर श्रमायुक्‍त ने दोबारा नोटिस जारी किया तो ये लोग अपने अपने तरीके से श्रमायुक्‍त के यहां प्रत्‍यावेदन दिया. इसके बावजूद अपर लेबर कमिशनर संतुष्‍ट नहीं हुए. इस बीच जागरण ने अपने सभी कर्मचारियों से काशी पत्रकार संघ से इस्‍तीफा दिलवा दिया. अमर उजाला ने अपने कुछ कर्मचारियों को अंतरिम भुगतान किया परन्‍तु अन्‍य अखबारों ने ऐसा करने में दिलचस्‍पी नहीं दिखाई.

इसके बाद जागरण प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों से एफिडेविट दिलावाया कि वे लोग संतुष्‍ट हैं तथा वे न तो खुद ना ही किसी अन्‍य को इसके लिए नियुक्‍त किया है. इसके बाद अपर श्रमायुक्‍त ने योगेश गुप्‍ता पप्‍पू तथा अजय मुखर्जी दादा से कहा कि जागरण के कर्मचारियों का कहना है कि उन्‍होंने आपको नियुक्‍त नहीं किया है, लिहाजा हम किस तरह से कार्रवाई करें. इन लोगों से एक बार फिर सभी अखबारों के कर्मचारियों की सूची मांगी गई जिसे इनलोगों ने लेबर कमिश्‍नर को उपलब्‍ध करा दिया.

इसके बाद लेबर कमिश्‍नर ने अपने 18 दिसम्‍बर 2009 के आदेश में ही करेक्‍शन कर दिया तथा उसमें से 17 (1 ) के तहत होने वाली रिकवरी वाले आदेश को हटा दिया. इसके बाद सभी अखबारों को अलग-अलग डेट जारी किया गया. उनसे सुनवाई करने के बाद श्रमायुक्‍त ने कहा कि वे संतुष्‍ट हैं. किसी भी कर्मचारी ने अपने अंतरिम को लेकर शिकायत नहीं की है. इसी मामले को लेकर योगेश गुप्‍ता पप्‍पू और अजय दादा मुखर्जी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमा कायम किया था.

इस मामले पर सुनवाई करते हुए माननीय जज राजेश दयाल खरे ने अपर श्रमायुक्‍त को निर्देश दिया है कि वो अपने 18 दिसम्‍बर 2009 वाले आदेश पर कार्रवाई करते हुए सभी की धनराशि 15 दिनों में जमा करवाना सुनिश्चित करें. और जो भी इस आदेश को मानने से इनकार करता है या असफल होता है उसके खिलाफ रिकवरी की कार्रवाई सुनिचित करें. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अपर श्रमायुक्‍त के पास उसके पहले आर्डर को बदलने का पॉवर नहीं है. लिहाजा सभी को चार सप्‍ताह के अंदर नोटिस देकर कार्रवाई सुनिश्चित करवाई जाए.


WRIT - C No. - 25689 of 2011 at Allahabad : Samachar Patra Karamchari Union Of Others Vs. State Of U.P. And Others

Date of Decision - 3/5/2011

Court Number - 1

Judgment Type - Interlocutory Non AFR

Coram - Hon'ble Rajesh Dayal Khare,J.

Petitioner's Counsels - S.D. Ojha

Respondent's Counsel - C.S.C

Court No. - 1

Case :- WRIT - C No. - 25689 of 2011

Petitioner :- Samachar Patra Karamchari Union Of Others

Respondent :- State Of U.P. And Others

Petitioner Counsel :- S.D. Ojha

Respondent Counsel :- C.S.C.

Hon'ble Rajesh Dayal Khare,J.

Heard learned counsel for the petitioners, learned Standing Counsel who has put in appearance on behalf of Respondents No. 1 to 3 and perused the material on record. Learned counsel for the petitioners has contended that the respondent no. 2 passed an order dated 18.12.2009 directing the employers to deposit the amount due within 15 days from the date of order failing which the recovery proceedings would be initiated. It is contended that the said order has become final and it has not been challenged by the employers or any other authority.

It is further argued on behalf of the petitioners that the impugned order, which has been passed, amounts to review of the earlier order dated 18.12.2009 without there being any basis for the same and the respondent no. 2 does not have any power to review his earlier order. Therefore the order impugned cannot sustained in the eye of law. Issue notice to the respondents no. 4 to 8 returnable within four weeks. Steps be taken within a week. Learned Standing Counsel prays for and is granted four weeks time to file counter affidavit. Rejoinder affidavit, if any, be filed within two weeks thereafter. List thereafter for orders. Till the next date of listing operation of the impugned orders dated11.2.2011, 8.2.2011,4.2.2011 and 25.1.2011, collectively filed as annexure no. 8 to the writ petition, shall be kept in abeyance.

Order Date :- 3.5.2011


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Comments (4)Add Comment
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written by arvind singh, May 05, 2011
sir dada aur pappu bhai sahab ka yah prayaas vastav me sarahaniya hai,jisake liye unhe sadhuwad deta hu. sir hamare yaha mumbai me ham sabhi patrakaar bhai kaafi pareshaaniyo ke beecha kisi tarah se jeevan jine ko majboor hai. sir ham yaha par dainik akhabaar me kaam karate hai. parmanet hai lekin sir salary itani milati hai ki batane me bhi sharam aati hai.to kya ham logo ka bhi kabhi bhala ho paayega.
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written by sudhir sharma, May 05, 2011
ab to highcourt ka hi sahara h malik logo ko to apni jebe bharne se matlab h
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written by deepu, May 05, 2011
yogesh gupta aur dada ka mobile no dete to theek rahta
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written by Nitin Pushkarna, May 05, 2011
Jio Pappu Bhai and dada you r great.

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