तीन साल का हुआ 'शुक्रवार', वर्षगांठ पर जुटे दिग्‍गज

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पर्ल्स न्यूज नेटवर्क की हिंदी की लोकप्रिय समाचार साप्ताहिक पत्रिका 'शुक्रवार' ने तीन वर्ष का और 'बिंदिया' ने दो वर्ष का सफर पूरा कर लिया है। इतने कम समय में ही 'शुक्रवार' ने न केवल हिंदी पट्टी में अपनी धाक जमाई है, बल्कि देश के दूसरे इलाकों में भी अपनी लोकप्रियता के परचम गाड़े हैं। 'शुक्रवार' का 7 मई 2008 को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के कर कमलों से लोकार्पण हुआ था। पत्रिका ने अपने शुरुआती दिनों में ही हिंदी पाठकों के दिलों में जगह बना ली थी।

पत्रिका की तीसरी वर्षगांठ पर आयोजित भव्य समारोह में दूरदर्शन तथा आकाशवाणी के महानिदेशक लीलाधर मंडलोई ने कहा कि 'शुक्रवार' के ताजा अंकों ने पूर्व हिंदी साप्ताहिक 'दिनमान' की याद पाठकों के दिलों में ताजा करवा दी है। उन्होंने पत्रिका की खबरों के विश्लेषण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समाचार-पत्रों से इतर 'शुक्रवार' में खबरों का जो सारगर्भित विश्लेषण होता है और विषयों की जो विविधता होती है, उससे पाठकों को खबरों के पीछे की सच्चाई पता चलती है। श्री मंडलोई ने 'शुक्रवार' के नए लेआउट और रंगरूप की प्रशंसा करते हुए कहा कि विज्ञान से लेकर स्वास्थ्य और जनसरोकारों से लेकर किसान और मजदूरों के मुद्दों को 'शुक्रवार' द्वारा बेबाकी से उठाया जाता रहा है। राज्य सभा चैनल के कार्यकारी संपादक तथा वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने भी कहा कि इस समय 'शुक्रवार' जैसा कोई दूसरा समाचार साप्ताहिक हिंदी में नहीं है। नए संपादक के आने के बाद इसने कुछ समय में नई प्रतिष्ठा और लोकप्रियता अर्जित की है। निश्चित रूप से यह हिंदी की सर्वाधिक लोकप्रिय पत्रिका का रूप लेता जा रहा है।

इस मौके पर एक कविगोष्ठी का भी आयोजन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना ने की तथा संचालन राजेश जोशी ने किया। कवि गोष्ठी की शुरुआत हास्य कवि प्रदीप चौबे की हास्य-व्यंग्य कविताओं से हुई, जिन्हें श्रोताओं ने खूब पसंद किया। व्यंग्यकार ज्ञान चतुर्वेदी के व्यंग्यों में नौकरशाही, सांप्रदायिकता तथा समाज से जुड़े अन्य विषयों पर चुभती टिप्पणियां थीं, जिन्हें श्रेताओं ने सराहा। राजेश जोशी ने 'इत्यादि' समेत अपनी कई प्रसिद्ध कविताओं का पाठ किया, जिनमें सामाजिक प्रतिबद्धता, विडंबना तथा रचना की बारीक बुनावट थी। जुबैर रिजवी उर्दू शायरों का संजीदा और बड़ा नाम है। उन्होंने हमारे मुश्किल वक्त को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। अंत में अध्यक्ष नरेश सक्सेना ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। उनकी रचनाओं को इतना पसंद किया गया कि श्रोताओं के आग्रह पर भी उन्होंने कई रचनाएं सुनाईं।

कवि गोष्ठी से पहले 'शुक्रवार', 'बिंदिया' तथा 'मनी मंत्र'  के अब तक के सफर पर एक संक्षिप्त मगर सारगर्भित फिल्म दिखाई गई, जिसमें 'शुक्रवार' के संपादक विष्णु नागर, 'बिंदिया' की संपादक शुभ किरण तथा 'मनी मंत्र' के संपादक अवनीश मिश्र ने अपनी-अपनी पत्रिकाओं द्वारा इस विशिष्ट समय में निभाई जा रही भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में तीनों संपादकों ने पर्ल्स न्यूज नेटवर्क के निदेशकों केसर सिंह, ज्योति नरायन, एस भट्टाचार्य और गुरमीत सिंह का पुष्प-गुच्छों से स्वागत किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी, कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महासचिव देवी प्रसाद त्रिपाठी, नई दुनिया के प्रधान संपादक आलोक मेहता तथा राष्ट्रीय संपादक मधुसूदन आनंद, 'जनसत्ता' के संपादक ओम थानवी, 'जी न्यूज' के संपादक पुण्य प्रसून वाजपेयी, 'सांध्य टाइम्स' के पूर्व संपादक सतसोनी, हिंदुस्तान के वरिष्ठ पत्रकार संजय अभिज्ञान, 'समयांतर' पत्रिका के संपादक तथा सुप्रसिद्ध कथाकार पंकज बिष्ट, 'भड़ास4मीडिया डॉट कॉम'  के संपादक यशवंत सिंह, 'दैनिक भास्कर' रायपुर के पूर्व संपादक प्रदीप कुमार, पी-7 चैनल के प्रोग्रामिंग हेड शरद दत्त, पी-7 चैनल के मुख्य संपादक सतीश जैकब, नई दुनिया के एसोसिएट संपादक सुरेश बाफना तथा रोविंग एडीटर भाषा सिंह, दैनिक भास्कर समूह के विमल झा, 'आज समाज' के पूर्व संपादक मधुकर उपाध्याय, एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार-लेखक प्रियदर्शन, वरिष्ठ विज्ञान पत्रकार संदीप निगम, यूनीवार्ता के संपादक अरुण केसरी, कला समीक्षक विनोद भारद्वाज, वरिष्ठ कथाकार असगर वजाहत, वरिष्ठ कवि मंगलेश डबराल, इब्बार रब्बी, पंकज सिंह, विमल कुमार, मदन कश्यप आदि राजधानी के अनेक लेखक, पत्रकार, कलाकार उपस्थित थे। इनकी उपस्थिति पर्ल्स न्यूज नेटवर्क तथा उसकी पत्रिका 'शुक्रवार' की पाठकों के बीच वजनदार उपस्थिति का प्रमाण थी। प्रेस रिलीज


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Comments (5)Add Comment
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written by Uttank, May 10, 2011
Ye press release padh kar achhi lagi. waise apne muh apni tarif karna kisko achha nahi lagta hai. Sukrawar ki jo dhar thi, wo ab kund pad chuki hai. Ab ye political magazine to rahi nahi. Khichadi ban chuki hai. last 2-3 months se na jane Shukrawar mein kya parosa ja raha hai. Ab to bas matthadishoon ka mahima mandan ho raha hai is patrika mein. Un logo ko na jane kitni baar padh chuka hun. Naye logo ko na jane kab chance milega. Halat to ye ho gaye hain ki kisi dusari jagah chhapi hui kahani ko fir se parosa gaya. Shayad mere shabad kharab lagenge is patrika pariwar ko, magar ek reader hone ke naate to itna jaroor kahunga ki ye patrika kahin pothi na ban jaye.
fir bhi meri bahut sari shubhkamnayen
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written by anil pande, May 09, 2011
राज्य सभा चैनल के कार्यकारी संपादक तथा वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने भी कहा कि इस समय 'शुक्रवार' जैसा कोई दूसरा समाचार साप्ताहिक हिंदी में नहीं है।

BADE NE BADE KO PAHCHANA !
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written by Sageer khaksar, May 09, 2011
Shukrwar patrika wakai mein bejod patrika hai.iski nispaksita aur santulit visheleshan dinman aur dharmyug ki yaad dilati hai.shuruwati dinon mein ek do article is nachiz ke bhi publishd hue hain.shubhkana.sageer khaksar.9838922122.
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written by sandeep, May 09, 2011
yashvant bhai india news rajsthan ki press releas nahin chapenge kya , esi kya narajgi hai
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written by pradeep srivastava, May 09, 2011
bahut-bahut badhai sukrwar parivar ko .

pradeep srivastava

nizamabad A.P.
cell 0 9848997327

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