पत्रकार बनने के लिए पत्रकारिता की डिग्री जरूरी नहीं!

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: अमर उजाला और दैनिक जागरण ने होनहार युवाओं के लिए शुरू की स्कीम : पिछले दिनों अमर उजाला और दैनिक जागरण, दोनों अखबारों में युवाओं को अखबार से जोड़ने और पत्रकार बनाने के बाबत विज्ञापन निकला. अमर उजाला के विज्ञापन का शीर्षक है- पत्रकारिता में शानदार मौका, अमर उजाला के साथ. इसमें कहा गया है कि आप एमबीए हों या बीकाम या किया हो किसी अन्य विषय से स्नातक. पत्रकारिता में डिग्री नहीं, पत्रकारिता के प्रति लगन जरूरी.

इस स्कीम के मुताबिक चयनित युवाओं को एक साल तक प्रशिक्षित किया जाएगा. एक साल तक फ्री में काम करना होगा. उसके बाद पूर्णकालिक पत्रकार बना दिया जाएगा. विज्ञापन में आवेदन के लिए कई योग्यताओं को गिनाया गया है. उधर, दैनिक जागरण में जो विज्ञापन है उसका शीर्षक है- ''युवा संपादक... कलम की ताकत को पहचानो. आगे लिखा है- जुड़िए दैनिक जागरण के युवा संपादक वर्कशाप से और बढाइए अपनी संपादकीय योग्यता. एक ऐसा वर्कशाप जिसमें विद्यार्थियों को मिलेगा मौका अखबार की प्रक्रियाओं को विस्तार से जानने और अपनी लेखन योग्यता को पहचानने का.''

दैनिक जागरण ने इनाम वगैरह देने का भी घोषणा की है. ध्यान दीजिए, कलम की ताकत पहचानने का आह्वान है साथ में इनाम जीतने का भी प्रलोभन है. इस विज्ञापन पर कुछ लोगों ने टिप्पणी की कि जागरण प्रबंधन ने अपने स्वभाव के अनुरूप ही विज्ञापन निकाला है. खुद को तो कलम की ताकत का एहसास नहीं है और कलम बेचने में जी जान से जुटे हुए हैं, युवाओं को चले हैं कलम की ताकत बताने. दूसरे, जिन लोगों को कलम की ताकत समझाया जा रहा है तो उन्हें इनाम किस बात के लिए दिया जाएगा? कहीं न कहीं प्रलोभन देकर युवाओं को संपादकीय सिखाने की तैयारी है और प्रलोभन के जरिए पत्रकार बने लोगों का क्या हश्र होगा, यह सब जानते हैं.

उधर, अमर उजाला के विज्ञापन पर एक मीडिया विश्लेषक का कहना है कि इसके दो मायने हैं. पहला तो ये कि बहुत सारे ऐसे टैलेंटेड युवा जिन्होंने पत्रकारिता की डिग्री नहीं ली है, वे पत्रकारिता में आने को प्रोत्साहित होंगे. दूसरे, इसका फायदा अमर उजाला को ये है कि उसे टैलेंटेड लोग मिलेंगे जो साल भर तक फ्री में काम करेंगे. वहीं, अगर पत्रकारिता की डिग्री लेकर कोई लड़का आता है तो उसे कम या ज्यादा, तुरंत पैसे देने पड़ते हैं. लेकिन नुकसान ये है कि जो टैलेंटेड लोग इस फील्ड में आएंगे वे भला साल भर फ्री में काम क्यों करेंगे. आखिर उन्हें जीने खाने के लिए पैसे की तो जरूरत पड़ेगी. इस घनघोर बाजारू दौर में फ्री में काम कराना कहीं न कहीं टैलेंटेड युवाओं का शोषण करना है.

उधर, जानकारी मिली है कि अमर उजाला में जिन युवाओं से साल भर प्रशिक्षित करने के नाम पर फ्री में काम लिया जाएगा, उनमें सबको नौकरी नहीं दी जाएगी. उनमें से भी 15 सबसे बेहतर अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा. यानि टैलेंटेड लड़के साल भर फ्री में खटेंगे और उनमें से ज्यादातर रुआंसे होकर वापस अपनी पुरानी जिंदगी में लौट जाएंगे. जाहिर है, ये युवा साल भर तक कोई और काम किए होते तो उन्हें उसका नतीजा मिल रहा होता.

इस मुद्दे पर आप क्या सोचते हैं, जरूर बताइएगा, नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए अपनी बात रखकर. लेकिन पहले दोनों अखबारों अमर उजाला और दैनिक जागरण में प्रकाशित विज्ञापनों को ध्यान से पढ़-देख लें. इसके लिए क्लिक करें...


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