राजीव गांधी की याद में दिल्ली के 12 अंग्रेजी अखबारों में 41 पेजों पर कुल 69 विज्ञापन!

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: तेल लगाने का रिकार्ड बनाने वाले कांग्रेसियों शर्म करो : देश में अगर तेल लगाने और चापलूसी करने वाले नेताओं की प्रतियोगिता हो तो नंबर एक से लेकर दसवें स्थान पर आएंगे कांग्रेसी नेता. त्याग, तपस्या और मितव्ययिता का दिखावा करने वाली सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी की नजरों में नंबर पाने-बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के कांग्रेसी मंत्रियों ने राजीव गांधी की 20वीं पुण्यतिथि पर अखबारों को विज्ञापनों से पाट दिया है.

इन विज्ञापनों को देखकर भारतीय कह सकते हैं कि भारत से वाकई सबसे बड़ा और सबसे महान आदमी जा चुका है, जिसका नाम राजीव गांधी है. अंग्रेजी अखबारों की बात करें तो आज दिल्ली के कुल 12 अंग्रेजी दैनिकों में 41 पेजों पर करीब 69 विज्ञापन राजीव गांधी से संबंधित दिए गए हैं. ये सभी विज्ञापन केंद्र सरकार के मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों की तरफ से डीएवीपी (डिपार्टमेंट आफ आडियो विजुवल पब्लिसिटी) ने जारी किए हैं. जाहिर है, हिंदी अखबारों और दिल्ली के बाहर के अखबारों की बात करें तो करोड़ों-अरबों रुपये विज्ञापन पर केंद्र सरकार ने फूंक दिए हैं. क्या यह काम हर अखबार में सिर्फ एक-एक विज्ञापन देकर नहीं हो सकता था?

पर शर्म भूल चुकी भारतीय राजनीति और भारतीय राजनेताओं के पास सोचने का इतना वक्त कहां है. जिस देश में कमरतोड़ महंगाई के कारण गरीब आदमी का जीना मुश्किल हो, भूख से मौतें हो रही हों, घपले-घोटाले में हर बड़ा शख्स फंसा नजर आ रहा हो, वहां पैसे और सत्ता का ऐसा भोंडा प्रदर्शन कितना शोभा देता है. इस देश में सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे लोगों ने भी देश के लिए जान दी है, लेकिन इनके जन्मदिन पर विज्ञापनों की बाढ़ नहीं दिखाई देती. फिर राजीव गांधी के मामले में ही सरकारी खजाने का पैसा लुटाने की यह उदारता क्यों? यहां दिल्ली से प्रकाशित 11 अंग्रेजी अखबारों के नाम, उनमें राजीव गांधी से संबंधित विज्ञापनी पेजों की संख्या और कुल पेजों की संख्या दे रहे हैं, ताकि पाठक आंकलन कर सकें कि केंद्र सरकार किस तरह खुलेहाथ से पैसे लुटाने पर आमादा है....

  • Hindustan Times: 24-page issue; 9 RG ads amounting to 5¼ broadsheet pages

  • The Times of India: 32-page issue; 10 ads amounting to 6 broadsheet pages

  • Indian Express: 28-page issue; 10 ads amounting to 5 broadsheet pages

  • Mail Today (compact): 42-page issue; 8 ads amounting to 7 compact pages

  • The Hindu: 22-page issue; 6 ads amounting to 3½ broadsheet pages

  • The Pioneer: 16-page issue; 7 ads amounting to 3½ broadsheet pages

  • The Statesman: 16-page isuse; 4 ads amounting to 2½ broadsheet pages

  • The Economic Times: 16-page issue; 3 ads amounting to 1¼ broadsheet pages

  • Business Standard: 14-page issue; 4 ads amouning to 1¾ broadsheet pages

  • Financial Express: 24-page issue; 3 ads amounting to 1½ broadsheet pages

  • Mint (Berliner): 12-page issue; 1 ad amounting to one compact page

पिछले साल राजीव गांधी की 19वीं पुण्यतिथि पर इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने टेलीग्राफ, कोलकाता के संपादकीय पेज पर एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था- “A back-of-the-envelope calculation suggests that on May 21, 2010, perhaps Rs 60 or 70 crore were spent by the taxpayer — without his and her consent — on praising Rajiv Gandhi. Since the practice has been in place since 2005, the aggregate expenditure to date on this account is probably in excess of Rs 300 crore.”

पिछले साल अगस्त महीने में राजीव गांधी के जन्मदिन पर द टेलीग्राफ में प्रकाशित हुआ- “Union ministries released more ads on Rajiv Gandhi’s birthday today than on the anniversaries of the rest of India’s Prime Ministers put together in the past one year, Press Information Bureau sources said.

यह हाल सिर्फ अंग्रेजी अखबारों का ही नहीं है. हिंदी समेत कई भाषाओं के अखबारों को भी राजीव गांधी के जन्मदिन व पुण्यतिथि पर खूब विज्ञापन मिलते हैं. सोचिए जरा, इस भोंडे प्रदर्शन की देश को क्या जरूरत है. क्या यह सच नहीं है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हाथ में सत्ता की नकेल होने के कारण केंद्रीय मंत्रालय चापलूसी और तेलहाई के लिए मरे जा रहे हैं और सब करोड़ों रुपये इस काम में झोंके जा रहे हैं. इस देश को महात्मा गांधी जैसे शख्स ने आजादी दिलाई जिन्होंने सिर्फ धोती पहनकर जीवन जिया और सबको सादा जीवन जीने व उच्च विचार रखने की प्रेरणा दी. पर महात्मा गांधी को अपना आदर्श बताने वाली कांग्रेस जिस तरह सत्तासीन होकर जनता के पैसे को बिना जनता की मर्जी के दोनों हाथों से दलालों, घपलेबाजों, चोरों, उचक्कों, मीडिया हाउसों, विदेशियों आदि को लुटा रही है, वह न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण भी है.


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