''भारतीय मीडिया गुलाम मा‍नसिकता का शिकार''

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक पत्रिका, 'पाथेय कण'  में भारतीय मीडिया को अंग्रेजी गुलाम मानसिकता का शिकार बताया गया है। 16 मई 2011 के इस अंक में इंग्लैंड के राजकुमार की शादी की खबर को लेकर संपादकीय लिखा गया है जो इस तरह है-

मीडिया की गुलाम मानसिकता

अंग्रेजों ने लगभग डेढ़ सौ वर्षों तक भारत में राज किया। इस छोटी सी अवधि में उन्होंने भारत को गुलाम मानसिकता वाला देश बना दिया। इस गुलाम मानसिकता का सबसे बड़ा शिकार भारत का मीडिया है। अपना मीडिया अभी भी अंग्रेजों को अपना शासक समझता है। पिछले दिनों इंग्लैंड के एक राजकुमार की शादी पर भारतीय अखबारों ने पृष्ठ पर पृष्ठ रंग डाले। पंद्रह दिन पहले से ही इस विवाह का भूत मीडिया पर सवार हो गया और अभी भी उतरा नहीं है। कुछ वर्षों पहले राजकुमारी डायना की एक दुर्घटना में मौत हो गई। यह समाचार भारत के समाचार पत्रों में 'बैनर हेडलाइन'  के साथ प्रकाशित हुआ। कुछ दिनों तक वह भूत भी मीडिया पर सवार रहा। अंग्रेजों के जाने के पैंसठ साल बाद भी अंग्रेजियत नहीं गई है, वरन बढ़ती ही जा रही है। कैसी शर्मनाक स्थिति है।

राजेंद्र हाड़ा की रिपोर्ट.


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