अमर उजाला, वाराणसी के क्राइम रिपोर्टर अरविंद की घेरेबंदी

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: धोखाधड़ी के मुकदमें को साजिश करार दिया : बनारस में मीडिया वालों के बीच हलचल मची हुई है. अमर उजाला के क्राइम रिपोर्टर अरविंद उपाध्याय के खिलाफ एफआईआर लिखा जाना चर्चा का विषय बन गया है. बनारस के थाना कैंट में अरविंद सहित आधा दर्जन के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 469 व 471 आईपीसी के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है.

अरविंद उपाध्याय का इस मसले पर कहना है कि उन्हें माफियाओं और भ्रष्ट पुलिसवालों के खिलाफ लिखने के कारण फंसाया जा रहा है. पूरे प्रकरण को अरविंद ने सुनियोजित साजिश करार दिया. अरविंद का कहना है कि जब उनके पिताजी रिटायर हुए तो उन्होंने सस्ते में जमीन खरीदने की सलाह दी. तब गांव के एक मित्र मिथिलेश सिंह के साथ मिलकर मैंने बिचौलियों की मदद से समदेई निवासी सरधना मिर्जा मुराद से जमीन ली. पर यहीं हम लोग फंस गए क्योंकि यह समदेई नकली निकला. इस जमीन की असली मालकिन सहदेई उर्फ समदेई निवासी अमरा खैरा गांव है. बाद में जब जमीन के असली मालिक ने दावा किया तो हम लोगों को ठगे होने का एहसास हुआ. तब पिछले साल 26 अगस्त को मैंने समदेई और उसके दामाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया. दामाद पैसे लेकर भाग चुका है. कुछ दलाल पकड़े गए. लेकिन हम लोगों के पैसे नहीं मिले. अब उसी मामले को मेरे विरोधी लोग, खासकर वो लोग जो पुलिस प्रशासन में दलाली करते हैं और माफियाओं के मुखबिर हैं, तूल दे रहे हैं. इन्हीं लोगों के उकसावे पर समदेई ने मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है क्योंकि उसको जो पैसा जमीन खरीद के एवज में दिया गया था, वह लेकर उसका दामाद भाग चुका है. अरविंद का कहना है कि उन लोगों को धोखे से जो किसी और की जमीन बेची गई, उसे हम लोगों ने सरेंडर कर दिया है. इस प्रकार यह प्रकरण खत्म हो चुका है लेकिन जिस महिला ने हम लोगों के साथ फर्जीवाड़ा किया है, अब उसी को माफियाओं व प्रशासन के दलाल भड़का रहे हैं और हम लोगों के खिलाफ जबरन झूठा मामला दर्ज करा दिया गया है.

उधर, इस प्रकरण पर जो मेल भड़ास4मीडिया के पास आई है, उसमें अरविंद उपाध्याय को कठघरे में खड़ा किया गया है. इस मेल में जो कुछ कहा गया है वह इस प्रकार है... ''विधवा पेंशन के नाम पर दूसरी महिला को खड़ा कर करोड़ों की जमीन पत्रकार ने हथिया ली. जमीन रामनगर बाईपास रोड पर अमरा खैरा गांव में है. धोखाधड़ी का पता चलने पर पीड़ित महिला रामदेई ने डीएम और डीआईजी को प्रार्थनापत्र देकर पत्रकार सहित आधा दर्जन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई है. पीड़ित महिला अनुसूचित जनजाति (मुसहर) जाति की है जिसका दामाद कल्लू विधवा पेंशन दिलाने के नाम पर उसे कचहरी ले गया और समदेई उर्फ सहदेई पत्नी स्व. लालचंद के नाम पर उसे खड़ाकर जमीन खाता संख्या 1454 के आराजी नंबर 321 रकबा 0.212 हेक्टेयर मौजा अमरा खैरा चक परगना देहात अमानत तहसील व जिला वाराणसी पत्रकार के नाम करा दी. रजिस्ट्री के कागजातों में साफ दर्ज है कि भूमि की कीमत 14 लाख रुपये है. यह कीमत सरकारी दर की है वास्तविक कीमत करोड़ों की है. समूचा खेल समदेई को पता चला तो उसने डीआईजी को प्रार्थना पत्र दिया लेकिन पत्रकार की महकमे में पकड़ के चलते मामला रफादफा कर दिया गया. यही नहीं जमीन की दाखिल खारिज की कागजी कार्रवाई के बाद राजस्व दस्तावेजों में समदेई का नाम काटकर पत्रकार का नाम दर्ज करा दिया गया. डीएम और डीआईजी से मिलकर रमदेई ने समूचे प्रकरण की जानकारी दी तो वे सकते में रह गए. मामले की जांच प्रशिक्षु आईएएस (एसडीएम, सदर) विवेक को सौंप दी गयी है. घटनाक्रम कुछ यूं रहा कि सत्तर वर्षीया रमदेई के पति हरिनाथ मुसहर की मौत हो चुकी है. रमदेई ने अपनी बेटी अमरा देवी का विवाह कंदवा निवासी कल्लू मुसहर से किया है. कल्लू अमरा खैरा थाना रोहनिया में रहकर बुद्धू पटेल के यहां रहकर काम करता है. सालभर पहले कल्लू अपनी सास को विधवा पेंशन दिलवाने के नाम पर कचहरी लेकर आया. बुद्धू ने अपनी विधवा भाभी समदेई के स्थान पर रमदेई को खड़ाकर फर्जी ढंग से जमीन का बैनामा करा दिया. बैनामा प्रभावशाली और पुलिस महकमे में खासी पकड़ रखने वाले पत्रकार के नाम इसलिए कराया गया ताकि कब्जा दखल में कोई परेशानी आए तो खाकी के सहयोग से क्रियान्वित किया जा सके. रमदेई को विधवा पेंशन के नाम पर 500 रुपये तत्काल और कुछ महीनों तक बराबर इतनी रकम दी जाती रही. बाद में पेंशन न मिलने पर उसने जानकारी की तो पता चला कि विधवा पेंशन की सूची में उसका नाम ही नहीं है. दूसरे के स्थान पर जमीन बेचे जाने पर रमदेई परेशान हो गयी और आलाधिकारियों से संपर्क किया. पत्रकार की साजिश से हुए फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने पर अधिकारी सहसा विश्वास न कर सके. रमदेई ने अपना मतदाता पहचान पत्र (फोटो आई डी कार्ड), ग्राम प्रधान करधना महेंद्र प्रताप द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया. दस्तावेजी प्रमाण से यह स्पष्ट हो गया कि रमदेई को समदेई के स्थान पर खड़ा कर करोड़ों की संपत्ति हड़प ली गयी है. इस बाबत जानकारी मिली है कि डीआईजी के आदेश पर थाना कैंट, वाराणसी में पत्रकार सहित आधा दर्जन लोगों के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 469 व 471 आईपीसी के तहत दिनांक 7 जून 2011 को मुकदमा पंजीकृत किया गया है. इसके साथ ही विवेचना शुरू कर दी गयी है.''

उधर, बनारस में एक अखबार क्लाउन टाइम्स है, की तरफ से भड़ास4मीडिया के पास एक बनी बनाई खबर भेजी गई है. उसमें भी अरविंद उपाध्याय को दोषी बताया गया है. हालांकि अरविंद का कहना है कि पुलिस, प्रशासन और माफियाओं के खिलाफ जमकर लिखने के कारण इन लोगों के दलाल उनके पीछे पड़ गए हैं जो चाहते हैं कि अरविंद को किसी भी तरह फंसाकर हटवा दिया जाए. अरविंद का कहना है कि वे कुछ लोग जो पांच पांच सौ रुपये पाकर अनाप शनाप खबरें छापा करते हैं, उनसे मुझे ईमानदारी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए. क्लाउन टाइम्स की तरफ से भेजी गई खबर को यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं--- क्लाउन टाइम्स की तरफ से भेजी गई खबर


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