पद्मश्री आलोक मेहता जी धन्य हैं आप!

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डा. महरनई दुनिया अखबार समूह के प्रधान संपादक पद्मश्री आलोक मेहता भी आखिर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के भक्त हो ही गए। मगर यह सब जान कर मेरे जैसे लोगों को बहुत दुख हुआ है, क्योंकि अब तक उन्हें एक सेकुलर पत्रकार माना जाता था। सेकुलरिज्म के प्रति समर्पित होने के कारण मेरे मन में उनके  प्रति काफी आदर था। उनके नवभारत टाइम्स से जाने से पहले लगभग एक साल तक उनके साथ काम करने का अवसर मिला था।

उस दौरान उन की सेकुलरिज्म के प्रति आस्था ने काफी प्रभावित किया था। इस दौरान उनके प्रति आदर भाव और बढा ही था। आलोक जी कांग्रेस के समर्थक थे सो इस से मुझे कोई कष्ट नही था। कांग्रेस की भक्ति के चलते उन्हें पदमश्री मिला तो भी अच्छा ही लगा। हालांकि पत्रकारिता या लेखन में उनका ऐसा कोई योगदान नही था। इस बारे में कई अन्य वरिष्ठ पत्रकारों का भी यही मानना था कि उन्हें पदमश्री के रूप में कांग्रेस की सेवा की मेवा मिली है। पदम पुरस्कारों में तो यह सब चलता ही है। मगर अब आलोक जी ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की शान में कसीदे पढे हैं,  उन्हें देख कर अपने परम मित्र रब्बी जी की यह बात याद आ गई कि इन कांग्रेसियों का कुछ भरोसा नही ये कभी भी पाला बदल देते है।

रविवार में नई दुनिया संडे नई दुनिया के नाम से एक पत्रिका भी प्रकाशित होती है, इस पत्रिका में आलोक जी एक पन्ने का एक आलेख प्रति सप्ताह लिखते हैं। 5जून 2011 के संडे अंक में आलोक जी ने मोदी की प्रशंसा में इस बार मोदी जी के एक तीन कालमी चित्र के साथ दो पन्ने लिखे हैं। सब से पहले आलोक जी ने अन्ना हजारे को इस बात के लिए कोसा है कि उन्होंने गुजरात जा कर मोदी जी पर कई आरोप लगाए थे। आलोक जी लिखते हैं- हजारे जी ने गुजरात में लोकपाल की नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया था, लेकिन लगता है इस मामले में बाबा हजारे जी को अधूरा पाठ पढ़ाया गया। आलोक जी गुजरात में भ्रष्टाचार के बारे में लिखते हैं- इस लिए यह कैसे मान सकता हूं कि गुजरात में भारी भ्रष्टाचार है। अहमदाबाद के चार सितारा होटल से ले कर टूटी फूटी सड़कों वाली साधारण बस्ती में भी लोग लखनउ या दिल्ली की तरह भ्रष्टाचार की शिकायत करते नही मिले।

आलोक जी के अनुसार गुजरात में मोदी जी से किसी को भी शिकायत नही है। लिखते हैं- बहरहाल, अहमदाबाद में उद्योगपति या व्यापारी, छोटे दुकानदार अथवा स्कूल-कालेज में पढ़ाने वाले शिक्षक या डाक्टर अथवा टैक्सी चलाते हुए ड्राइवर मुझे नरेंद्र मोदी के राज काज की तारीफ करते ही मिले। मोदी जी की इतनी तारीफ से आलोक जी का मन नही भरा तो वह और आगे लिखते हैं- इस लिए मैंने लोगों से शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी बिजली, परिवहन, मकान, पुलिस जैसी सुविधाओं के बारे में जानने की कोशिश की। पता चला कि अहमदाबाद ही नही, गुजरात के हर कस्बे और सुदूर गांवों तक नयूनतम सुविधाएं मिलने से लोग खुश हैं। मुसलमानों के बारे में आलोक जी लिखते हैं- यहां मुस्लिम बस्तियों में लोग आपकी दिल्ली से ज्यादा सुखी और संतुष्ट हैं। अंत में आलोक जी का कहना है- नरेंद्र मोदी दिल्ली के सिंहासन तक पहुंचें या न पहुंचें, गुजरात राज्य को एक आदर्श माडल तो बनाया ही जा सकता है।

आलोक जी, कांग्रेस की भक्ति से आप पदमश्री हो ही गए नरेंद्र भक्ति से आपने पदमभूषण का रास्ता तो साफ कर ही दिया है। इस से इतना अवश्य हुआ है कि मेरे जैसे लोगों के मन में आप के प्रति जो आदर भाव था वह अब तिरोहित हो गया है। आखिर मोदी जी की इतनी तारीफ के कुछ तो मायने होते ही हैं आलोक जी!  अब केवल इतना ही कहा जा सकता है कि दुम उठाई जिस की वह मादा नजर आया हमें।

लेखक डा. महर उद्दीन खान वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. नवभारत टाइम्‍स समेत कई पत्र पत्रिकाओं नौकरी एवं लेखन कर चुके हैं. टीवी से भी समान रूप से जुड़ाव है. इनकी कई उपन्‍यास एवं व्‍यग्‍यं संग्रह प्रकाशित हो चुकी हैं. शाह टाइम्‍स के कार्यकारी संपादक भी रह चुके हैं. अध्‍यापन का कार्य भी किया है. फिलहाल स्‍वतंत्र लेखन में सक्रिय. इनसे This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए सम्‍पर्क किया जा सकता है.


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Comments (18)Add Comment
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written by maaz khan, June 12, 2011
khan sahab ne bahut sahi likha hi aur unhone wahi kya hai jo ek sachche patrkar ko karna chahiye jab koi apna kartaby bhool jaye aur use koi uska kartaby yad dilata hai to sachchi patrkarita yahi hi,shabaash khan sahab
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written by sanjivni, June 11, 2011
पूर्वाग्रही....कुंठाग्रस्त....असफल और शायद हताश मेहरुद्दीन साहब....मेरी आपत्ति कई बातों को लेकर थीं लेकिन मोदी के बारे में मेरी आपत्ति पर ऊपर कुछ लोगों ने विस्तार से चर्चा कर दी, मैं उन आपत्ति पर नहीं जाउंगा.लानत भेजने वाले खुद देखें कि वे कहाँ हैं और आलोक जी कहा हैं....ज़मीन और आसमान जितना फर्क होता है तो लोग ऐसे ही खीझते हैं जैसे आप खीझ रहे हैं. ऐसे गाली देकर आप को कम से कम कुछ लोग भी जानने लगे वरना आपके पास पहचान का संकट तो था ही....[ ये अभी भी है] दूसरा आप "जिसकी पूँछ उठाओ तो मादा निकला" कैसे लिख सकते हो...आप मादा को कमतर समझ रहे हैं, यही आपका ज्ञान दर्शाता है...नाग से ज्यादा ज़हर नागिन में होता है, शेर मक्कारी करता है, शेरनी उसके लिए शिकार करती है....मादा को कमतर समझने वाले ज़ाहिलों से ही ऐसी टिप्पणी की दरकार होती है..आपके लेख को पढ़कर लगा कि आप अनवरत एक घंटे तक किसी अपरिचित को भी कोस सकते हैं...
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written by संजय मिश्र, June 11, 2011
आलोक मेहता चाटुकारितापूर्ण लेखन करते हैं, इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन डा. महर उद्दीन खान का ये लेख भी पूरी तरह पूर्वाग्रह से ग्रस्त है, साफ समझ में आता है। अगर कोई नरेन्द्र मोदी के काम की तारीफ करे- तो वो फौरन सांप्रदायिक माना लिया जाए। अरे खान साहब इतने पढ़े लिखे लगते हो, इस कौमी चश्मे से बाहर निकलो। मुख्यमंत्री के तौर पर काम के मामले में नरेन्द्र मोदी का कोई जोड़ नहीं है और अब तो गुजरात के मुसलमान भी उनका समर्थन करने लगे हैं। इसलिए इसे लेख को लेकर आलोक जी की ऐसी तैसी करने के चक्कर में आपने अपनी ही कलई खोल दी।
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written by pramod kumar, June 11, 2011
mahruddin sahab alok mehata ji ke bare purvagrh se grasit hain.unko nahi malum hai ki alok ji jab nbt patna me sampadak the tab lalu sanskriti akhabar se bahar thee.
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written by Anurodh paswan, June 11, 2011
I am not surprised to read Alok Mehta's article in Nai Dunia. He is known for his dependence on politicians and hypocricy. Don't you know he has been a darbari of Motilal Vora,former CM of MP, now he salutes I &B minister of the Congress government, He also prases Advani's daughter and salutes her , he made the Nai Dunia mouthpiece of the Rashtrapati Bhawan, He does dandawat to 10Janpath. He praised Modi to save his job since nai dunia's owners close to Big Ambani and the latter is close to Modi. RSS started bycotting his paper, there are several letters to the owner aginst Mehta by RSSmen complaining his biased attitude. he keeps many monkeys around him, Nai dunia failed to make any impact. who reads it? Mehta will be known in the history for degrading hindi journalism. most of the people started deserting him , somebody due to his association with Congress, someone due to his association with Modi, He will be a man without friend.
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written by Sageer khaksar, June 11, 2011
Jo jab jaisa dikhe uske baren mein tipaddi ho ni chahiye.narendra modi ne hindustan ke daman ko jab dagdar kia to unhen bura bhala kaha gya.ab agar achha kam karhen hain to unki tareef karne mein burai kya hai.sageer.a.khaksar.siddharthnagar.u.p.9838922122.
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written by Piush Jain, June 11, 2011
Jo Kaam Karega Uski Praise to Hogi He. Nariender Modi Ne Gujrat Ko Ek Model State Banaya Hai. Isliye Unki Praise Karne Main Koi Burai Nahi Hai
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written by धीरेन्द्र, June 10, 2011
hayat sahab ki tippani sab kuchh bata rahi hai..
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written by Hariom garg, June 10, 2011
डा .खां साहब ने आलोक मेहता के लेख पर जो अपने विचार बताये हैं उनको पढ़कर लगता है क़ि खां साहब नरेन्द्र मोदी के बारे में किन्हीं पूर्वाग्रहों से ग्रस्त हैं .अन्यथा आज गुजरात से दूर रहने वाले लोगों तक उनके रिश्तेदारों के हवाले से जो ख़बरें मिल रही हैं उससे तो यही लगता है क़ि मोदी के नेतृत्व में गुजरात आज इस देश का सबसे खुशहाल प्रदेश है.और तो और इस बात को तो पिछले ही दिनों महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक ने भी माना है .खां साहब अकलियत के दायरे से बाहर निकल कर एक पत्रकार के नज़रिए से देखो आप भी मानने लगेंगे क़ि वास्तव में मोदी का गुजरात एक नया सुनहरा गुजरात बनचुका है.
हरिओम गर्ग
सम्पादक -दैनिक "जांबाज़ "
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written by shyam, June 10, 2011
akok mehtaji keval naidunia maliko ke liye chchgiri ke alawa kuch nahi karte h aise logo ko bahr kar dena chiye
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written by SIKANDER HAYAT, June 10, 2011
sir muslim rehnumao netao or amir logo patarkaro lekhako ne kon se mahan aadersh pesh kiye ha kitne garib musalmano ki seva ki ha galtiya kamiya humme bi kuch kam nahi ha har vakat secularisam ka syapa karne ki jagah hame aatamnirikshan bi karna chahiye
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written by पंकज झा., June 10, 2011
व्यक्तिगत रूप से मैं भाजपा का सदस्य हूँ. ज़ाहिर है मोदी जी का भी समर्थक हूँ. लेकिन इस तरह अगर कोई भी पत्रकार शिर्शाषण कर लेता है तो एक पत्रकार होने के नाते तकलीफ भी होना लाजिमी है. इस रविवार को आलोक मेहता का यह संपादकीय पढकर ऐसा ज़रूर लगा जैसे उन्होंने पत्रकारिता को शर्मिन्दा किया है. इससे पहले कनिमोझी को ज़मानत देने हेतु दबाव बनाने वाला ऐसा ही संपादकीय इंडिया टुडे में एम.जे. अकबर ने लिखा था. आइये दुत्कारें और लानत भेजें इन बड़े कहे जाने वाले पत्रकारों को. इन सबके कारण पत्रकारिता आज एक गंदा धंधा बन कर रह गया है.
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written by krishna murari, June 10, 2011
kaun secular hai kan non secular is bahas me kyo padte hai. bahas ye ho ki raj kiska achchha hai. jo congress secular hone ka dambh bharta hai uske raaj me itne sare dange kyo hue. rajiv gabdhi ne babri masjid ka tala kyo khulwaya. sikh dange kyo hue. congress raj me babri masjid kyo dhahai gayi. hame to khus hona chahiye ki sadhvi ritambhara jaise log ab kala dhan par bolne lage hai. rss rss karte karte congress ka dam nikal gaya hai. agar congress ko himmat hai to rss par ban kyo nhi lagati. jnta jag gayi hai ab mudda mahatvpurn hai na ki vyakti ya vichar. congress ko ye samajhna hoga.
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written by om prakash gaur, June 10, 2011
नरेन्द्र मोदी को बुरा कह कर कोई अपने को अच्छा समझे तो उसकी मर्जी. आज मेहताजी ने अच्छा कहा है तो कल बुरा भी बता सकते हैं. वह इसके लिए आजाद हैं. लेकिन आँख पर पट्टी बांध लेना औए कान में रूई ठूंस लेना उचित नहीं है...
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written by O.P. SRIVASTAVA, June 10, 2011
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written by O.P. SRIVASTAVA, June 10, 2011
Janab Maherudding Khan Shaheb adab arj hai,
Aap ne to ugate hue Suraj ko diya dikhane ki jo jurrat ki hai, wah na kabile bardast hai.
Shri Alok Mehta Ji patrakarita ke ashadharan bibhuti hain.
Mai khud unko pichale teen salon se lagatar padh raha hoon. Unki lekhani ki koi tulna ho hi nahi sakti hai. Sunday Naidunia ke wo ek bade hastachhar hain.
Unke bina Naidunia adhuri hai.
Modi ke Gujrat par unka lekh hakikat bayan karta hai na ki katachh.
Janab aap apani soach me tabdili lane ki kosis karen.
Kam likhna jyade samajhana.
O.P. SRIVASTAVA
DEORIA
(U.P)
MOB. 9454918198
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written by Sanju, June 10, 2011
I don't think there is anything wrong in praising Narendra modi. He is popular in Gujrat, it's a fact.
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written by dhruv rautela, June 10, 2011
narendra modi jaise visionary vikas purus ko samarthan karna paap hai kya? aap log kis maansikta ke log hai??

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