लखनऊ से लां‍च हो गया लोकमत

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: सम्‍पादक ने कहा - अखबार का कलेवर नहीं तेवर देखिएगा : जिस अखबार ने स्वतंत्रता संग्राम में लोगों के बीच आन्दोलन की अलख जगाई और लोगों में आजादी के नारे को बेखौफ बुलंद आवाज में अपने पत्रों में प्रकाशित किया उस लोकमत अखबार के लखनऊ संस्करण का लोकार्पण करने के लिए मुझे आमंत्रित किया गया यह मेरे लिए गर्व की बात है।

आज हर अखबार व्यवसायिक होड़ में लगा है मगर लोकमत अखबार इससे हटकर अपने खबरों की बारीकियों और लोगों के मत को लोकमत समाचार पत्र में प्रकाशित करके अपने नाम को सार्थक करेगा। इसके साथ ही लोकमत अखबार सांस्कृतिक प्रदूषण से दूर रहकर पर्यावरण, शिक्षा और नौजवानों के लिए प्रेरणादायक लेख लिखे तो इसे बुद्घिजीवी वर्ग जरूर आगे ले जाएगा। इस अखबार से हम सभी बुद्घीजीवियों को बहुत सारी उम्मीदें हैं। यह बातें शहर के महापौर डा. दिनेश शर्मा ने कही। वे शुक्रवार को हिंदी संस्थान में दैनिक लोकमत अखबार के लखनऊ से प्रकाशित होने जा रहे संस्करण के लोकार्पण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अखबार के लोकार्पण के अवसर पर उन्होंने कहा कि एक समय था जब सो कर उठते ही पहले वे अपने माता पिता का चेहरा देखते थे और उनके यहां आने वाले एक हिंदी अखबार के मुख्य पृष्ठ पर जिसमें देवी का चित्र हुआ करता था उसे वह आंख बंद करके अपने माथे से लगाते थे। मगर आज समय बदल गया है। अब वहां पर देवी के स्थान पर फिल्म अभिनेत्री की फोटो लगी रहती है। अखबार में आए ऐसे बदलाव के कारण आज अखबार अपने मापदण्डों पर खरा नहीं उतर रहा है। अब समाचार पत्रों में और अखबारों में संवेदनशीलता की कमी आ चुकी है। इलेक्ट्रॉनिक चैनल आत्मदाह करने वाले को शूट करके लाइव दिखाना की जुगत में लग जाता है जिससे उसके चैनल की टीआरपी बढ़े।

उन्होंने कहा कि लोकमत अखबार 71 वर्ष पुराना है और परिपक्व भी हो चुका है। इस अखबार ने जिस तरह से अपना सफर दढ़ता पूर्वक तय किया है आगे भी तय करेगा। जो अखबार पत्रकारों के कलम को बांध कर रखता है उस अखबार का भविष्य बेहतर नही होता क्योंकि वहां पर पत्रकार फिर दूसरे विकल्प तलाशने को मजबूर हो जाता है। लोकमत अखबार लखनऊ संस्करण के प्रबंध निदेशक आनन्द वर्धन सिंह ने कहा कि उनकी पृष्ठभूमि मीडिया से नहीं है मगर फिर भी वह इस अखबार से जुड़े। अखबार से जुडऩे का उनका मकसद है कि अखबार में आ गई बुराईयों से बचते हुए पाठकों तक ऐसे अखबार को पहुंचाया जाए जो लोगों के प्रति संवेदनशील हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अखबार से संवेदनशीलता धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। अखबार पूरी तरह से कमर्शियल हो चुका है। हमने कुछ निश्चय किया है जो हमारा अखबार उस कसौटी में खरा उतरेगा।

लोकमत

वरिष्ठ पत्रकार फरजंद अहमद ने कहा कि लोकमत अखबार अपनी पहचान बनाएगा क्योंकि इसका उद्देश्य अन्य कमर्शियल हो चुके अखबारों से हटकर है। आज एडिटोरियल और एडवरटोरियल में कोई फर्क नही रह गया है। लोकमत भीड़ में एक अलग चेहरा बनकर उभरेगा। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लोकमत उस लखनऊ शहर से निकाला जा रहा है जहां पर अखबार को बोलने की आजादी नहीं। मगर इस दौर में भी अगर लोकमत कलम के जरिए जनता की बात सामने रखेगा तो इससे बढक़र कुछ नहीं है।

लोकमत लखनऊ संस्करण के मौके पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित प्रसिद्ध साहित्यकार मुद्रा राक्षस ने कहा कि लोकमत अखबार से यही आशा है कि वह अपनी बातों और लोगों की बातों को बारीकियों के साथ सबके सामने रखेगा। लोकमत अखबार के जरिए आम लोगों की बातें सामने आएगी। उन्होंने लोकमत अखबार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोकमत अखबार लोगों का विचार और पहचान बन जाए।

उत्तर प्रदेश राज्य भण्डारण निगम के अध्यक्ष गोपाल नारायण मिश्र ने कहा कि लोकमत निर्भीक समाचार पत्र है। यह अखबार हर तरह से प्रेरणादायी है। जिस निर्भीकतापूर्वक इस अखबार ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया उसी तरह से लोकमत लखनऊ संस्करण भी निर्भीकता पूर्ण कार्य करते हुए लोगों में रच बस जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में शहर से कई अखबार प्रकाशित होने लगे हैं। यहां अखबारों की भीड़ जुट गई है। मगर इस चुनौतियों के बीच भी लोकमत अखबार अपनी पहचान बनाने में सफल होगा। उन्होंने कहा कि अखबार अगर निर्भिकता, निष्पक्षता और स्पष्टता से चलेगा तो उसे आगे बढऩे से कोई नहीं रोक सकता है। उन्होंने आशा जताई कि लोकमत जिस तरह से बीकाने और जयपुर से सफलता पूर्वक प्रकाशित हो रहा है उसी तरह से लखनऊ में भी अपने परचम का झण्डा फहराएगा।

लोकमत अखबार लखनऊ संस्करण के सम्पादक उत्कर्ष सिन्हा अखबार के लोकार्पण के अवसर पर कहा कि वे 20 वर्ष पहले अखबार से जुड़े थे। मगर इसके बाद वे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने लगे। मेरा फिर से अखबार की तरफ रूख करने का मकसद यह है कि एक ऐसा अखबार सामने आए जो भीड़ में हटकर हो। उन्होंने कहा कि अभी अखबार एक प्रोडक्ट बन गया है। मेरा लोगों से निवेदन है कि लोग जब लोकमत अखबार पढ़े तो इसके कलेवर पर न जाए बल्कि इस अखबार के तेवर की तरफ ध्यान दें। जिस तरह से लोकमत अखबार 1936 में प्रकाशित हो रहा था अपने कड़े तेवर के साथ उसी तरह से वर्ष 2011 में भी अपने तेवर दिखाने में यह पीछे नही है। मुझे उम्मीद है कि जब आप इस अखबार को पढ़ेंगे तो आप इस अखबार की अनदेखी नही कर पाऐंगे। हमको तौलने में थोड़ा वक्त दीजिएगा। प्रेस रिलीज


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