नहीं मिली सुब्रत राय को हाईकोर्ट से राहत

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: हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं सूचीबद्ध करने का दिया आदेश : अब जुलाई में इन पर सुनवाई करेगा हाईकोर्ट : ओपी श्रीवास्‍तव समेत 11 लोगों ने दायर की थीं याचिकाएं : गोमती नगर में दर्ज एफआईआर पर पुलिस की कार्रवाई शुरू : लखनऊ : सहारा प्रमुख सुब्रत राय के गले में फंसा हाईकोर्ट का फंदा फिलहाल निकलता नहीं दिख रहा है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर और बाद में बचाव में पड़ीं करीब दर्जन भर याचिकाओं को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई अब जुलाई में होगी।

उधर हाईकोर्ट के आदेश के बाद यहां की गोमती नगर थाना पुलिस ने 11 जून का दर्ज एफआईआर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। विनीत मित्‍तल प्रकरण में सहारा समूह के मुखिया समेत सभी ग्‍यारह लोगों को हाईकोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। पिछले दिनों सहारा में खासे दमदार माने जाने वाले कार्यकारी निदेशक और सुब्रत राय के बेहद करीबी रहे विनीत मित्‍तल को निकाल बाहर करने के तौर-तरीकों को लेकर सहारा प्रमुख के खिलाफ हाईकोर्ट ने कार्रवाई करने का आदेश दिया था। दरअसल यह याचिका विनीत मित्‍तल की ओर से दायर की गयी थी कि सहारा प्रमुख सुब्रत राय के कहने पर उनके दो मकानों का बैनाम जबरिया करा लिया गया तथा उनके साथ ही उनकी पत्‍नी को भी अवैध रूप से बंधक बनाया गया था। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को फौरन आपराधिक मुकदमा दायर करने का आदेश दिया था।

इस फैसले के खिलाफ सुब्रत राय के साथ ही ओपी श्रीवास्‍तव, सर्वेश गुप्‍ता, आरएस दुबे, मोहम्‍मद खालिद, भूपेंद्र मणि त्रिपाठी, इंद्रजीत शर्मा, अवधेश कुमार श्रीवास्‍तव, कर्नल बीएस तुलसी, संजय अरोड़ा, अनिल विक्रम सिंह समेत कुल 11 लोगों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में  हाईकोर्ट में विनीत मित्‍तल की याचिका को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट के आदेशानुसार यहां की गोमतीनगर थाने में दर्ज करायी गयी प्रथम सूचना रिपोर्ट( एफआईआर ) की वैधता पर सवाल उठाये गये। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जस्टिस शबीहुल हसनैन और जस्टिस वेदपाल की खंडपीठ ने इन याचिकाओं पर केवल इतना ही फैसला किया कि इन सभी को सूचीबद्ध कर जुलाई मास में सुनवाई के लिए लगा दिया जाए। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद से ही सहारा समूह के मीडिया मैनेजर अब इस बारे में छपने या प्रदर्शित होने वाली खबरों को मैनेज करने का अभियान छेड़ दिया है।


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