संपादक के चलते असमय बंद हो गया पूर्वांचलदीप अखबार

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बनारस से प्रकाशित होना वाला साप्‍ताहिक अखबार पूर्वांचलदीप 44 सप्‍ताह की अल्‍पायु में ही काल के गाल में समा गया.  29 मई से 4 जून के अंक के बीच इस अखबार ने आखिरी सांस ली. अपने अंत के साथ यह अखबार तीन लोगों को बेरोजगार कर गया. इस अखबार के बंद होने का कारण बने इसके अपने ही संपादक आशीष बागची. आइए बताते हैं असमय इस अखबार के बंद हो जाने का कारण.

दैनिक जागरण, अमर उजाला समेत कई अखबारों में वरिष्‍ठ पदों पर काम कर चुके आशीष बागची, अमर उजाला, हल्‍द्वानी से हटाए जाने के बाद, बेराजगार हो चुके थे. इस बीच कहीं मौका नहीं मिलने के बाद उन्‍होंने खुद का अखबार निकालने की योजना बनाई. इसके लिए उन्‍होंने अपनी पत्‍नी नंदिता बागची के नाम से पूर्वांचलदीप नाम के एक साप्‍ताहिक अखबार का रजिस्‍ट्रेशन करवाया. अखबार का रजिस्‍ट्रेशन होने के बाद फाइनेंस की दिक्‍कत आई. इसके लिए इन्‍होंने चारा डालना शुरू किया. इनके चारे में फंस गए कांग्रेसी नेता राम प्रकाश ओझा.

इस अखबार को प्रकाशित करने से पहले आशीष बागची और राम प्रकाश ओझा के बीच यह समझौता हुआ कि राम प्रकाश एक साल तक इस अखबार के प्रकाशन, कार्यालय तथा स्‍टाफ का खर्चा उठाएंगे. इस दौरान आशीष बागची को वेतन या मानदेय नहीं दिया जाएगा क्‍योंकि वो इस अखबार में पार्टनर हैं. जब आमदनी होने लगेगी तो दोनों लोग आधा-आधा बांट लेंगे.  शुरुआत में सब कुछ ठीक ठाक चलता रहा. राम प्रकाश ओझा ने कार्यालय, प्रकाशन और तीन लोगों के स्‍टाफ का खर्चा उठाते रहे. अखबार समय से प्रकाशित होता रहा. इधर राम प्रकाश के नाम पर रजिस्‍टर्ड डोमेन से पूर्वांचलदीप डॉट काम नाम की वेबसाइट भी बना ली गई.

काफी दिनों तक अखबार और वेबसाइट का काम ठीक ठाक चलता रहा, अखबार का प्रकाशन समय से होता रहा. परन्‍तु राजस्‍व आने का कोई जरिया नहीं दिखा. जिसके बाद आशीष बागची ने राम प्रकाश से काम करने के एवज में बीस हजार रुपये महीना देने की मांग की. जिसके बाद राम प्रकाश ने उनको अपना वादा याद दिलाया. इसके बाद से ही आशीष बागची ने कार्यालय जाना बंद कर दिया. पिछले दो महीनों से वह कार्यालय नहीं जा रहे थे. उनकी गैरमौजूदगी में उनके सहयोगी अजय कृष्‍ण शुक्‍ल ने अखबार निकाला. उन्‍होंने तीन चार हफ्तों तक अखबार का संचालन किया. इसके बाद आशीष बागची ने राम प्रकाश से अखबार का रजिस्‍ट्रेशन उनके नाम होने का हवाला देते हुए प्रकाशन बंद करने को कह दिया.

इसके बाद से ही यह अखबार बंद चल रहा है. पूर्वांचलदीप डॉट कॉम भी बंद हो चुका है. एक साल से पहले ही पूर्वांचलदीप अखबार बंद हो गया. यहां काम करने वाले दो ऑपरेटर और अजय कृष्‍ण त्रिपाठी को अब दूसरी जगह पर नौकरी की तलाश करनी पड़ रही है. अजय कृष्‍ण कहते हैं कि आशीष जी के लालच ने एक अच्‍छे खासे अखबार को असमय मरने को मजबूर कर दिया. अगर उन्‍होंने पत्रकारिता के प्रति जरा सी भी सहृदयता दिखाई होती तो यह अखबार अब भी प्रकाशित हो रहा होता, परन्‍तु उनकी पैसे की भूख ने हमलोगों के बारे में भी नहीं सोचने दिया.


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