जागरण की जमीन पर प्रशासन का ताला, हंगामा

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: समूह की लखनऊ यूनिट पर तेरह-तेइस की गृह-दशा : चिनहट प्रिंटिंग प्रतिष्‍ठान की जमीन दलित की निकली : भूमाफिया से खरीदी गयी थी कौडियों के मोल जमीन : विनोद शुक्‍ल की मार्फत हुई थी जमीन की डील : करोड़ों का इनवेस्‍टमेंट खटाई में पड़ा, खूब हुआ हंगामा : दैनिक जागरण के दिग्‍गज जमीन छुड़ाने के लिए अब दूसरे माफियाओं का सहारा लेंगे :

लखनऊ: भूमाफियाओं से जमीन खरीदना जागरण समूह पर बहुत भारी पड़ रहा है। लखनऊ में नया प्रिंटिंग प्रेस स्‍थापित करने के लिए करोड़ों की जमीन कौडियों के मोल खरीदने की कोशिश में अब जागरण को बहुत महंगा पड़ रहा है। यह जमीन यहां के पुराने पुरोधा और अब स्‍वर्गवासी हो चुके विनोद शुक्‍ल की सलाह पर खरीदी गयी थी। लेकिन अब इस जमीन पर प्रशासन ने ताला लगा दिया है। वजह यह जमीन उस भूमाफिया की थी ही नहीं। उसने तो अपने नाम से फर्जी बैनामा करा दिया था। बीते शुक्रवार को यहां इसी बात को लेकर जमकर हंगामा हुआ।

हालांकि अपनी जोड़तोड़ का इस्‍तेमाल कर यूनिट का ताला खुलवा लिया गया है, लेकिन खबर है कि यह जमीन जागरण के हाथ से हार हाल में निकल जाएगी। खबर है कि यहां के संपादकीय प्रभारी इसके लिए अब दूसरे माफियाओं का सहारा लेने का ऐलान कर अपने मालिकों को तसल्‍ली दे चुके हैं। विनोद शुक्‍ल के सिधारने के बाद जागरण पर संकट के बादल बेहद काले दिखने लगे हैं। लखनऊ यूनिट की प्रिंटिंग प्रेस के लिए यहां चिनहट के पास राष्‍ट्रीय राजमार्ग के निकट औराई गांव में खरीदी गयी करीब पांच एकड़ जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विनोद शुक्‍ल के समय में मालिकों ने उनपर भरोसा कर यह जमीन जिस शख्‍स से खरीदी थी, वह दरअसल एक भूमाफिया है। यह बैनामा खुद उसने ही जागरण समूह के नाम किया था। सूत्र बताते हैं कि इस खरीद में एक मोटी रकम खुद विनोद शुक्‍ल की पाकिट में भी गयी थी।

खरीद के फौरन बाद ही विनोद शुक्‍ल के नेतृत्‍व में जागरण ने यहां अपना विशाल प्रिंटिंग प्रेस लगा दिया था। लखनऊ एडीशन की सारी छपाई यहीं से होने लगी थी। लेकिन अब मामला पलट गया है। पता चला है कि जिस जमीन को अशोक पाण्‍डेय नाम के शख्‍स से खरीदा गया था, वह उस जमीन का मालिक है ही नहीं। उसने तो फर्जी तरीके से उस जमीन को अपनी बता कर जागरण को बेचा था। दरअसल यह जमीन एक दलित चमार जाति के शख्‍स की है, जिसने इसे लेकर अदालत में मुकदमा भी दर्ज करा रखा है। इस मामले का निस्‍तारण भी उसी के पक्ष में हो चुका है।

कल यानी शुक्रवार को इसी मामले में असली भूमि स्‍वामी के पक्ष में जमीन का कब्‍जा दिलाने के लिए क्षेत्रीय एसडीएम पूरे दलबल के साथ जागरण समूह के इस प्रिंटिंग प्रेस पर पहुंचे और जमीन की नापजोख के बाद वहां फेंसिंग करवाने लगे। इसके बाद जागरण के लोगों से कह दिया गया कि वे यह जमीन तत्‍काल खाली कर दें, क्‍योंकि जिला प्रशासन अब यहां जागरण के अवैध कब्‍जे को अपने कब्‍जे में लेकर यहां ताला लगा रहा है। यह खबर मिलते ही जागरण के स्‍थानीय संपादक शशांक शेखर त्रिपाठी और महाप्रबंधक जेके द्विवेदी अपने फौज-फाटे के साथ मौके पर पहुंचे और प्रशासन से इस कार्रवाई को रोकने की मांग की।

उधर जमीन के असली मालिक और उसके सैकड़ों समर्थक भी मौके पर पहुंच चुके थे। दोनों ही पक्षों में जबर्दस्‍त विवाद शुरू हो गया। खबर है कि तैश में आये जागरण के लोगों को वहां मौजूद भीड़ ने जमकर गालियां भी दीं। प्रशासन के लोग भी अपना कब्‍जा हटाने से इनकार कर रहे थे। मामला गंभीर देखकर जागरण के जनपक्षधर पत्रकारों ने अपने राजनीतिक और प्रशासनिक सम्‍पर्कों के फोन खनखना दिये। करीब आधा घंटे की कवायद के बाद प्रशासन ने इस प्‍लांट को जल्‍दी ही खाली करने का नोटिस देकर अपना कब्‍जा हटा लिया। लेकिन साथ ही ताईद भी कर दी कि वे जल्‍दी ही इस जगह को खाली कर दें ताकि इसे उसके असली मालिक के सिपुर्द किया जा सके।

यह प्‍लांट खुल जाने के बाद प्रिटिंग का काम शुरू कर दिया गया लेकिन प्रशासन की चेतावनी ने जागरण के लखनऊ दिग्‍गजों की नींद उड़ा दी है। जागरण को जमीन बेचने वाले माफिया ने इस मामले से अपना हाथ खींच लिया है। वैसे खबर है कि यहां के एक बड़े दिग्‍गज ने अपने मालिकों को आश्‍वस्‍त किया है कि इस मामले का निपटारा कराने के लिए वे अब दूसरे माफियाओं का सहारा लेंगे।


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