बसपा का मुखपत्र बना टाइम्‍स आफ इंडिया, जमकर माया का गुणगान

E-mail Print PDF

टीआईओ : लम्‍बी डील को लेकर चर्चाओं ने पकड़ा जोर : माया के चार साल के भाषणों को आधे पेज में दोहराया : ऐलान किया कि यूपी से बढि़या नहीं है कोई राज्‍य :  कहा-  दूसरी सरकारों में ज्‍यादा होते थे बलात्‍कार : अन्‍य राज्‍यों से बेहतर है लॉ एंड आर्डर यूपी में -  ट्वाय : माया सरकार को दूध का धुला बताया अखबार ने :

टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने आखिरकार बसपा सुप्रीमो और यूपी की मुख्‍यमंत्री मायावती की जुबान बोलनी शुरू कर ही दी। मंगलवार के अंक में आधे पेज से ज्‍यादा की जगह पर खबरों का एक कोलाज पुलिंदा छाप कर इस अखबार ने ऐलान कर दिया कि बसपा की पूर्ववर्ती सरकारों में अपराध की दर बहुत ज्‍यादा थी, जबकि मायावती की सरकार ने विरासत में मिली बदहाली को सुधारने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया था। मायावती की शान में इस अखबार ने अपने पन्‍नों को पुष्प-रंगों से रंग दिया और इस तरह कुछ यूं दिखाने की कोशिश की है कि हाल ही हुई बलात्‍कार और अन्‍य आपराधिक घटनाओं से बसपा सरकार के दौर में लॉ ऐंण्‍ड ऑर्डर की हालत को नहीं आंका जा सकता है।

अंदाज ठीक वैसा ही रहा जैसा कि प्रदेश के मुख्‍य सचिव अनूप मिश्र ने हाल ही दिल्‍ली में बयान दिया था और जिसको लेकर इस कदर हंगामा खड़ा हो गया था कि खुद मायावती ने ही उनसे उनके इस बयान पर जवाब तलब कर लिया था। लब्बोलुआब यह कि अंग्रेजी के इस अखबार ने इस पूरे पुलिंदे में ठीक उन्‍हीं बातों का संकलन मात्र ही किया है जिन्‍हें पिछले चार बरसों से मायावती अपने बयानों में कहती रही हैं। इस अखबार ने तो यहां तक निष्‍कर्ष निकाल लिया कि मौजूदा दौर की हालत के लिए राजनीतिक आंदोलन छेड़ने से ज्‍यादा जरूरी, पुलिस को संवेदनशील बनाया जाना है।

टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने आज आखिरकार हद कर ही दी। आज के अंक में चौथे पन्‍ने पर इस अखबार ने एकसाथ कई खबरों का कोलाज बनाया- डिजाइनदार। अपनी बात को सही ठहराने के लिए आंकड़ों का सहारा भी लिया। माया और मुलायम की सरकारों के दौरान आंकड़ों को कुछ  इतने सुंदर तरीके से डिस्‍प्‍ले किया ताकि मामला आकर्षक और रीडेबुल और इस तरह प्रभावशाली बनाया जा सके। लेआउट में कहीं गोली, खून-खराबा, तो कहीं सीआईडी सीरियल जैसा सनसनीखेज माहौल कागज पर उतारने के लिए बाकायदा मैग्‍नीफाइंग ग्‍लास तक का प्रयोग कर दिया। आप देखेंगे कि इस खबर की मुख्‍य हेडिंग दी गयी---माया रिजीम डूइंग बेटर ऑन लॉ ऐंड ऑर्डर देन मुलायम।

टीआईओ

ऐसे दौर में जब पूरा का पूरा यूपी अपराधों और खासकर मासूम बच्चियों के साथ सामूहिक दुराचार, उन्‍हें बेरहमी से कत्‍ल कर देने जैसे जघन्‍य अपराधों से रोज-ब-रोज गूंज रहा है, पुलिस अत्‍याचार और अमानवीयता के साथ ही साथ बसपा के एमपी-एमएलए और मंत्री का ओहदा पाये कई लोग ऐसे अपराधों में लिप्‍त हैं, जनपक्षर होने का दावा करने वाले अंग्रेजी के अखबार किस अंदाज और भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, इसे देख कर लखनऊ में चल रहे पत्रकारिता के पेशे पर लोग थूक तक सकते हैं।

कहने की जरूरत नहीं कि बात को साबित करने के लिए आंकड़ों के ग्राफ और आलेख के तथ्‍यों में भी जमीन-आसमान का फर्क है, बावजूद इसके, यह अंग्रेजियत का अखबार यह साबित करने में जुटा ही रहा कि मायावती की सरकार बाकायद दूध की धुली हुई है। कुछ भी हो, टाइम्‍स ऑफ इंडिया की इस खबर को लेकर चर्चाओ का बाजार तो गरम हो ही चुका है। बातें तो किसी बड़ी डील हो जाने की भी हो रही हैं। आइये, एक नजर आप भी निहार लीजिए, मौजूदा दौर की अंग्रेजी पत्रकारिता को।

टीओआई


AddThis