देहरादून में असफल कांपैक्ट को बंद करने का ऐलान

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अभी कुछ दिनों पहले ही अमर उजाला अपने सभी संस्करणों में विज्ञापन निकालकर अपने शिशु अवतार कांपैक्ट की सफलताओं की चर्चा करते नहीं अघा रहा था. दैनिक जागरण के शिशु अवतार आई-नेक्स्ट को पछाड़ देने और नंबर वन हो जाने का ऐलान कर रहा था. पर अचानक जाने क्या हुआ कि अमर उजाला प्रबंधन ने देहरादून से निकलने वाले अपने शिशु अखबार कांपैक्ट को बंद करने की घोषणा कर दी.

कांपैक्ट के स्टाफ की एक बैठक कर कह दिया गया कि अब यह शिशु अखबार असमय काल के गाल में समा रहा है, इसलिए अब आप लोग इसके लिए नहीं बल्कि अमर उजाला के लिए काम करें. बताया जाता है कि देहरादून शहर में कांपैक्ट अखबार मार्केट नहीं पकड़ रहा था. गरीबों के लिए एक रुपये में गुटका पाउच की तरह एक रुपये में अखबार पाउच था कांपैक्ट. पर देहरादून शहर में गरीब कहां हैं. वहां तो भरे पेट वाले लोग ज्यादा हैं और कई कई अखबार खरीदकर पढ़ने वाले लोग खूब हैं. इसलिए देहरादून के खास मिजाज को देखते हुए और कांपैक्ट के न बढ़ पाने के ट्रेंड को समझते हुए प्रबंधन ने सिर्फ इस सेंटर कांपैक्ट अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया है.

बंदी का यह ऐलान तब हुआ जब अमर उजाला, देहरादून में सत्ता परिवर्तन हो चुका है. निशीथ जोशी की जगह विजय त्रिपाठी संपादक का पदभार ग्रहण कर चुके हैं और निशीथ जोशी अमर उजाला के नोएडा स्थित मुख्यालय में बढ़े पैसे व पद के साथ हाजिरी दे चुके हैं. कांपैक्ट के देहरादून में बंद होने के बाद इन आशंकाओं को भी बल मिल रहा है कि कांपैक्ट और जगहों पर भले ही सफल हो लेकिन यह अखबार बिजनेस नहीं क्रिएट कर पा रहा है इसलिए इसका भविष्य उज्जवल नहीं है, सो, देर सबेर प्रबंधन इसे अन्य जगहों से भी बंद करने का ऐलान न कर दे. पर जानकारों का कहना है कि दूसरे शहरों में कांपैक्ट का जिस कदर सरकुलेशन है उसे देखते हुए अमर उजाला प्रबंधन इसे बंद नहीं करेगा बल्कि बिजनेस लाने के नए माडल्स पर काम करेगा.

कांपैक्ट की बंदी और इससे संबंधित कयासों के बारे में अगर आपको कुछ जानकारी हो तो नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए अपनी बात कह सकते हैं या फिर हमें This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए मेल कर सकते हैं.


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