डीएम बोला- बहनजी कहें तो मीडिया को ठीक कर दूं

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यशवंत जी, आज तड़के जैसे ही उठा, मेरी नजर आज के हिंदुस्तान अखबार के प्रथम पेज पर गई. एक खबर देखकर मेरा माथा ठनक उठा. इस खबर को पढ़कर ऐसे लगा जैसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बिजली सी गिरा दी गयी हो. अनायास ही दिल से आवाज निकली कि क्या अब बहन जी के राज मे खबर छापने के लिये पत्रकारों को डीएम महोदयों से परमीशन भी लेनी पड़ेगी? खबर आप भी पढ़ लें. और उचित लगे तो भड़ास के पाठकों को भी पढ़ा दें. -घनश्याम, जनपद औरैया, उत्तर प्रदेश

प्रेस वार्ता बुलाकर बांदा डी.एम. ने पत्रकारों को धमकाया

बहनजी कहें तो मीडिया को कर दूं ठीक

बांदा । कार्यालय संवाददाता

“बहुत लोग आ गये। एक चैनल में खबर चल रही थी कि आर्थिक तंगी से किसान ने खुदकुशी कर ली। मौके पर जाकर देखा गया तो जिस स्थान पर शव पडा था, उसके आस पास 50 मीटर तक पेड़ ही नहीं था। क्या किसान ने घास के पेड़ पर खुदकुशी की थी। झूठी खबर छापने से जनता का विश्वास उठता। समीक्षा मीटिंग में बहन जी (मुख्यमंत्री) से कहा कि आप कहें तो पत्रकारों को एक घंटे में ठीक कर दूं। बहन जी ने कहा कि नहीं पत्रकारों को समझा कर काम करो”। यह बातें जिलाधिकारी कैप्टन एके. द्विवेदी ने प्रेस वार्ता बुलाकर धमकाने के अंदाज में पत्रकारों से कहीं।

द्विवेदी ने साथ में यह भी जोडा कि यह बातें (धमकी) वह ऑफ द रिकार्ड कह रहे है। एक पत्रकार ने डीएम. से कहा कि कहिये तो छाप दे आपके राज में राम राज्य चल रहा है। डीएम. झुंझला गये और उस पत्रकार से कहा कि मेरी बातें आपके समझ में नहीं आती तो बाहर निकल जाइये। इसी बीच एसपी आरके श्री वास्तव आ गए। एक पत्रकार ने कहा जब आप पत्रकारों से बात नहीं करते तो प्रशाषन का पक्ष कैसे छापा जाय। डीएम ने कहा कि सब झूठ छापते है। जिसे मेरी बात बुरी लगे वह चला जाय और जो करना है कर ले। पत्रकार चले गए, दरअसल प्रशासन परेशान है। कि कर्ज पीडित किसानों कि आत्महत्या की घटनाए रुक नहीं रहीं है। और सरकार को 15 जुलाई तक हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करना है। बांदा प्रशासन चाहता है कि किसानों की आत्महत्या की खबर न छपें।


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