भास्‍कर का यह संपादक चाटुकारों और चापलूसों का पोषक है

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सुधीर अग्रवाल के बारे में एक बात विख्यात है और वह यह कि वे कोई भी निर्णय जल्दबाजी में नहीं लेते है लेकिन अवनीश जैन के मामले में उन्होंने बहुत देर कर दी और इसका खामियाजा अखबार को इंदौर में अपनी प्रतिष्ठा खोने के साथ ही एक अच्छी टीम से वंचित होने के रूप में भी चुकाना पड़ा। इसके पीछे कई कारण है पर सुधीरजी के प्रति आज भी वैसा ही सम्मान होने के कारण मैं उन तक नहीं जाना चाहूंगा।

साल भर पहले जब मैंने भास्‍कर छोड़ने का फैसला लिया था तब सुधीरजी के साथ ही भास्‍कर ग्रुप एडीटर, नेशनल एडीटर, स्टेट हेड तथा सभी संपादकों को एक पत्र लिखकर यह खुलासा किया था कि मैं आखिर क्यों भास्‍कर छोड़ रहा हूं। मेरा यह पत्र ताबूत में पहली कील ठोंकने जैसा था। जो बातें मैंने इस पत्र में उल्लेखित की थी वे एक एक करके सही साबित हो रही है और अब प्रबंधन ने भले ही देर से सही पर अवनीश को इंदौर से रूखसत करने का निर्णय तो ले ही लिया। यहां रहते हुए इस आदमी ने अखबार का भट्टा बैठाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी।

12 साल भास्‍कर में सेवाएं देने के बाद आज भी मेरा खुला आरोप है कि यह शख्स संपादक नहीं चापलूसों व चाटुकारों का पोषक है। इसकी रूचि अखबार में कम इससे इतर कामों में ज्यादा रहती है। यह अपने आसपास हमेशा कमजोर लोगों की टीम रखना चाहता है ताकि वे इसकी हां में हां मिलाते रहे, फटकार सुनते रहे, इसे महान बताते रहे और ये अपना उल्लू सीधा करता रहे। इंदौर भास्‍कर में इसने सबसे पहले उन लोगों को कमजोर करना शुरू किया जो कलम से मजबूत थे, जिनका मजबूत नेटवर्क था, जो इससे सामने तर्कपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का माद्दा रखते थे। इसके बाद इसने चापलूसों व धंधेबाजों का एक नेटवर्क तैयार किया और चंद ही दिनों में इन लोगों की भास्‍कर इंदौर में तूती बोलने लगी। इनमें से कई ऐसे है जो एक पैरा की खबर भी ठीक से नहीं लिख सकते, किसी खबर की सही हेडिंग नहीं दे सकते, किसी कार्यक्रम को कवर करने भेजो तो कॉपी डेडलाईन समाप्त होते होते ही लिख पाते, सुबह की मीटिंग से रात को घर रवाना होने तक रिपोर्टर को हरास ही करते रहते और ऐसे ऐसे आइडिया बताते ही खबर कभी तैयार ही न हो पाए।

इसके दो साल के कार्यकाल में भास्‍कर छोडऩे वाले करीब 25 लोगों की फेहरिश्त पर यदि आप गौर करें उन साथियों से इसका कारण पूछे तो 90 प्रतिशत लोग इसका कारण सिर्फ और सिर्फ अवनीश जैन को ही बतायेंगे। क्यों विनोद पुरोहित ने पहले जयपुर तबादला लिया और फिर भास्‍कर छोड़ा? क्यों विनोद शर्मा, शैलेश दीक्षित,  के.पी.सिंह, सूचेंद्र मिश्रा, शैलेंद्र जोशी और कपिल भटनागर ने पत्रिका ज्वाईन किया? क्यों विजय पाठक व मनसुख परमार ने भास्‍कर के बजाय दबंग दुनिया जैसा नये अखबार में काम करना पसंद किया? क्यों सुधीर चीखलीकर दो महीने में ही भास्‍कर छोड़ गए? ये तमाम ऐसे प्रश्न है जिनका उत्तर प्रबंधन को जरूर खोजना चाहिए। अनेक दिग्गजों के अखबार छोडऩे के बाद भी भास्‍कर की जिस टीम ने जागरण तथा राज एक्सप्रेस की लांचिग के दौर में अखबार को मजबूत बनाये रखा उसे इस शख्स ने तार तार कर दिया।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा करीब दो साल स्थानीय संपादक रहते हुए इसने तीन या चार मौकों पर अपनी कलम चलायी। इसकी रूचि अखबार में रात नौ बजे के बाद जाग्रत होती है। खबरों की इसके पास कोई प्लानिंग नहीं। इसका वैल्यू एडीशन खबर की हत्या जैसा होता है और जिस खबर की यह एडिटिंग कर दे उसका सत्यानाश होना तय है। ये जिस खबर में रिपोर्टर को बदलाव बताये उस में आप दो चार शब्द आगे पीछे कर वापस इसे दिखायें तो खबर हाथों हाथ अनुमोदित हो जाती है?

मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि इस शख्स ने इंदौर भास्‍कर में यतींद्र भटनागर, श्रवण गर्ग और कल्पेश याज्ञनिक जैसे धुरंधर संपादकों की परंपरा को कलंकित किया है। इसके रहते संपादक कक्ष षडयंत्रों का अड्डा बन गया। रोज संपादक को चार-पांच घंटे यह जानने में बीतने लगे की कौन किससे मिल रहा, किसने किससे बात की,  फलां लड़की फलां रिपोर्टर से क्यों बात करती है, फलां का फलां से क्या चक्कर है? फंला के खिलाफ कोई मुद्दा तो ढूंढो? फंला को कैसे निपटाया जाए। इसे उम्दा किस्म का अखबार निकालने से ज्यादा आनंद चैयरमेन की कार का दरवाजा खोलने, उन्हें कार्यक्रमों में अतिथि बनवाने तथा उनके चहेते लोगों को उपकृत करने में आता है। अवनीश जा रहे है पर अपने पीछे धंधेबाज विज्ञप्तिबाजों की एक लंबी फौज भास्‍कर को देकर। इसकी पुष्टि विजय पाठक से की जा सकती है।

इस सबसे आगे इस शख्स का जो सबसे खराब पहलू है वह यह कि यह किसी रिपोर्टर से मतभिन्नता होने पर उसका कैरियर चौपट करने में जुट जाता है। यह खबरों के साथ खिलवाड़ करने लगता है और इस हद तक जाता है कि वह व्यक्ति भास्‍कर छोडऩे के बारे में सोचने को मजबूर हो जाए। यह स्टेट हेड से सांठगांठ कर अखबार से जुड़ी बातें सुधीरजी, श्रवणजी तथा कल्पेशजी तक पहुंचने ही नहीं देता है। इंदौर में जब अखबारों में भूमाफिया के खिलाफ अभियान चल रहा था तब इसने क्या क्या गुल नहीं खिलाये? एक बड़े भूमाफिया को इसने पहले उपकृत कर बाद में क्यों निपटाया? एबी रोड़ स्थित एक बड़ी टाउनशिप के घपले की खबर सारे सबूत होने के बाद इसने क्यों रोकी?

कहने को बहुत कुछ है.. पर अभी इतना ही। बधाई भास्‍कर इंदौर के साथियों को एक काले अध्याय की समाप्ति के लिए। अब वे अखबार के दफ्तर में खुली हवा में सांस ले सकेंगे.. उम्मीद है की रघुरमनजी के नेतृत्व में उन्हें एक साफ सुथरे वातावरण में काम करने का मौका मिलेगा। जो काबिल है उसकी योग्यता की क्रद होगी और जो कमजोर होते हुए भी पनपा दिये गए उनकी तूती अब नहीं बोल पाएगी।

अरविंद तिवारी

पूर्व रिपोर्टर

दैनिक भास्‍कर, इंदौर


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Comments (25)Add Comment
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written by sonu purohit, August 03, 2011
aisee khabaron kee aisee-taisee kisne likhee yah khabar?
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written by ankit, July 26, 2011
अरविन्द जी जरा आप अपने गरेंबा में झांक लेते और फिर अर्टिकल लिखते तो बेहतर होता... कोई बहस सार्थक हो और कोई नतीजा निकले तो मजा भी आता है, लेकिन अफ़सोस की आपको अपना काम छोड़ कर ये लम्बा आर्टिकल लिखने का टाइम मिल गया... वो भी तब जबकि हमाम में सब नंगे हैं... हाँ जी हम भी आप भी.. और कथित पत्रकारों से अनुरोध है की वो बहस में श्रवण जी, कल्पेश जी, रघुरमन जी का नाम शामिल न करे.... बस मस्त होकर ईमानदारी से अपना काम करे, संघर्ष करे...
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written by dhreej, July 20, 2011
ab praveen khariwal jaise khau patrkaar bhi bolne chale aaye. are ye to avnish se bhi bada chor hai
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written by Ajeet k Singh , July 08, 2011
Arvind je
Ap Abe Tek is ragav ko nehe pehechan pye. Arre ye chakleti chehera hai amit Mandloi. Bhole surat masum chehere wala ye insane dil se bhot kala hai. Apne jendge me Kai moko per iske meded ke per ye ahesan feramosh or do navo per chelne wala insan hai. Isne 2 sal me Jo paisa kemaya vo kese se chupa hai kya. Jera iska gher to jaker dekho. Kya nehe hai iske pass . Her institute se iska paisa bendha hua hai.ye Avnish je ko pehele gale deta tha bad me je hujuri kerne lega isko ek college se leptop gift mela.Bede programes ke ye sode kerta hai. Iske Kai temnaaye apke Karan pure nehe ho pye isleye bhokta reheta hai. Kel Tek Avnish je peche ghumta tha ab unko bhe bura beta reha hai.
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written by Pareshan Patrakar, July 08, 2011
Bhaskar Se Man Se, Ek Baat... main poori tarah sehmat hoon. Har 2 saal mein ek naya editor... Ab toh Managing Group Editor aakar dhamki deta hai ki uske mutabik chalo, varna barbaad kar dega. Phir apna rutba banakar, apne chamchon ko Kritarthh karke chala ya bhaga diya jata hai. Sudhir ji ko ek baar hum jaise pareshan patrakaron se bhi milna chahiye. Lekin unke paas samay kahan hai? Group bada hua, Hum purane log kamjor ho gaye. Bas, din kaat rahe hain.
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written by राघव, July 08, 2011
सूप बोले तो बोले, चलनी का बोले जिसमें बहत्तर छेद

जिन अरविंद तिवारी ने ये लेख लिखा है, उनका भी पता करवा लीजिए यशवंतजी. इन अरविंद तिवारी को सुधीर अग्रवाल कतई पसंद नहीं करते। वो तो कल्पेश की कृपा थी कि ये बने रहे। धंधेबाज नंबर एक, नेताओं से गठजोड़, अफसरों का फायदा उठाना कोई अरविंद तिवारी से सीखे। पिता कलेक्टर थे और इस नाम पर ये शख्स अपनी सारी काली कमाई को पारिवारिक समृद्धि का हिस्सा बताकर बचता रहता है। नहीं तो 18-20 हजार पाने वाला कोई पत्रकार जीप, कार और ड्राइवर कैसे रख सकता है? आप पता करवाइए कि अरविंद तिवारी की चाल क्या है और चरित्र क्या है? पता करवाइए और छापिए कि इसने कब-कब क्या फायदे उठाए? इंदौर में किस-किस कोने में अरविंद तिवारी के संबंध हैं?
जब राजेंद्र तिवारी संपादक थे, तब यह शख्स वहां न्यूज एडीटर बनाया गया था, चूंकि यह अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सका, लिहाजा रुमनी को कमान मिल गई। अवनीश को लेकर यह आदमी पहले से पूर्वाग्रह पाले हुए था, जब अवनीश जी संपादक बने, इसके हाथों से तोते उड़ गए। क्योंकि अवऩीश कल्पेश खेमे के नहीं थे। राजेंद्र तिवारी का तरीका अलग था, वह सबको अपनी टीम मानकर काम करने वालों में थे और स्टाफ द्वारा की जा रही ऊलजुलूल बातों को कभी कान नहीं देते थे, इसलिए उनके समय इसे कोई दिक्कत नहीं हुई। और कल्पेश और राजेंद्र तिवारी समूह के भीतर अच्छे मित्र माने जाते थे। लेकिन अवनीश के आते ही इसे लगा कि अब तो अपनी दाल गलेगी नहीं, लिहाजा भास्कर अखबार से निकलने में ही अपनी भलाई समझी। ये भास्कर छोड़कर गया डर के मारे न कि अवनीश के व्यवहार की वजह से।

ऐसा नहीं है कि अवनीश दूध के धुले हैं। लेकिन वे भ्रष्ट नहीं लगते हैं। सेटिंग में वे माहिर हैं और भास्कर में उनकी इंट्री ही इसी काबिलियत की वजह से हुई थी। अवनीश एरोगेंट भी हैं और इंदौर का संपादक बनने के बाद एरोगेंसी बढ़ गई। यही एरोगेंसी वह वजह रही जिससे वह भास्कर इंदौर में अब तक के सबसे खराब संपादक माने गए। स्टाफ खुश नहीं रहा। आज हालत यह है कि अभी ढाई-तीन साल पहले राजेंद्र तिवारी के तबादले के समय प्रेस क्लब ने विदाई रखी थी, भास्कर मैनेजमेंट ने सरोवर पोर्टिको में भव्य विदाई समारोह आयोजित किया था, आईआईएम के लोगों ने उनको विदाई पार्टी दी आदि-आदि। वहीं अवनीश के लिए न तो भास्कर और न ही शहर कोई विदाई पार्टी रख रहा है। कुल मिलाकर अनसंग एक्जिट इंदौर से।
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written by bhaskari, July 07, 2011
Keval Avnish Jain hi nahi poore Bhaskar group me aise kai sampaadak bhare hue hain, bas naam badal jata hai. Arvind Tiwari himmatvala shakhsa hai isliye sach ko thok kar kah diya lekin doosari jagahon par kai Tiwari aur hain jo shoshan ke bavjood majboori me chup hai. Indore Valon ki kismat achchhi hai ki unhe Jain se mukti mil gayi, Abhi kai aur jagahon ke logo ko aisi hi khabar sunane ka intejaar hai.
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written by Premod SHARMA , July 07, 2011
Arvind Bhai,mp or Rajasthan se aage bedker iske Dlh ke karname bhe to samne laao. Ye wha BHASKAR ke off me ek reporter se chepelo se pita. Indore k ek neta ne jeb is per revolver tane to ye Akshya jain ke gher me maker chupa tha.isle kepde rajasthan ka ek neta benwata tha.her jegehe dhandebaje ke hai isne to indore me kese rukta.thanks for exposing him.
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written by bhaskar ka hamdard, July 07, 2011
Avnish ke editor rehte ye huaa;-
1.kai yogya saathi bhaskar chhod gaye. Chaplusi karne wale asamrth, lijlije, dogle aur non-talented patrakar mukhya bhumika me aaye.
2. do kodee ke bjp netaa cabinn me chay peene ke liye ghanto baithne aane lage. shrvan gargji aur kalpesh yagnik ke samay reception se aage badhne kee himmat nahhe thee jinkee.
3. Jameen, Prashasan, FOREST jaisi beet ke reportaro ko bhrashtachar ki khuli chhot mili. reportar ne JOIN KARNE KE 1 MAHINE me mahangi bike kharidi. ISI REPORTER KI SHADI ME INDORE KE SARE BHUMAFIA PAHUNCHE AUR MAHNGE UPHAR V MOTE LIFAFE DIYE. EK REPORTER NE DO SAAL SE LAGATAR DIVALI PAR 1.5 -2 LAKH KI KHARIDI KI. SALARY 15 HAJAR MAHINA.
4. SHAHAR BJP ADHYKSH jaise KAI NETA bajar me kAhne lage - bhaskar ko main jeb me rakhta hun. jo chahe chhpwa loonga.
5. PRO ka kaam karne wale forest vibhag ke farar bhrasht karmi ke sath milkar avnish ne bade hath mare. SATINGBAJI KEE.
6. Champu Jain jaise log uske dost bane.
7. Ravindra natya grah ke nirman me po-12
8. IDA se achal sampatti
9. DB KE SAATH BATNE WALE SHAHAR KI HIGH SOCIETY KE AKHBAR ke prabhari sahit avnish ke kai najdikiyon ke pas alp samay me car (1 ya ek se adhik), lcd tv, comp, manhnga farniture, mahange kapde, mobile, aur property me investment ke liye pesa kaha se aya SUDHIR JI KRUPYA JAANCH KARE.
10. JAIN SAMAJ KI RAJNITI KA ANG BANA BHASKAR.
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written by Bharat kumar, July 07, 2011
Bhaskar me local edition level par bhi group kam kar rahe hai Sudhir ji kabhi Raipur ke facimile edition Durg-Bhilai ko importence dete they lekin ab Corporate media personalty hone ka natija spooning karne wale utha rahe hai. Patrika Raipur me start hone ke baad Rajiv singh ne purane bhaskar team ko importence dena band kar diya hai. ( BHARAT KUMAR SR. JOURNALIST Chhattishgarh)
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written by mahindera choudhery, indore, July 07, 2011
indore bhaskar ka sampdak avanish jain ke kartut ke charcha kawal indore ma he nahi hai balki pura pradesh ma hai. inka blackmaling ke kissi pradesh ka logo ke juban per hai.kis dhung se khabher ko rokkar party se blacking maling ke jati aur soda baji ke jati thi iski kai exampal hai. bulder's ko chamka kar pahala reporters se khabher likhawata thai aur phir inka dalal ke madhayam se sodabaji karna amm baat thi.
bhaskar managment na avanish jain ka to transfore kar diya kintu abhi bhi unka dalal ke roop ma batha indore bhaskar ka management kya action legi tabhi ya ganga roopi bhaskar pak-saaf ho payaga. iska liya sudhirji , kalpeshji ko dhyan lagana hogo. aur in dalalo se bhaskar se chutthi karna hogi. nahi to madhypradesh se bhaskar ke suravat karana vala bhaskar yahi dusara akbharo se pichaya jaya ja.
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written by davilal, July 07, 2011
well done. arvindji
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written by aklish ojha, July 07, 2011
bhaskar managment na indore ka alava aur bhi jagha transfare kiya jisma ratlam editation ma mahindera kushawa is vyakati na pura editation ka sathyanasha kar diya hai. inka samay ma bhi ratlam se ajay tiwari, kalumidhine,mandsaur se umesh sharma samat karib ek darjan reporter ko bhaskar chodana pada, aur mandsaur me senior komalsingh tomer sarika reporter ko roj parashan karta raha jabki neemuch ma moolchand khichi jaisa black malier reporter ko upkarat karta raha is ka samay ma neemuch jaila ma 4 bar bhaskar ke pratiya jalgayi. es sampadak ka karan ratlam ma bhaskar ka karmachariyo ke office ma ghushkar mar khani padi. is sampadak na sudh roop se dukandari karna vala ko khuli chut de rakhi thi. ab naya sampadak vinod singh se acchaya bhaskar ki ummad kar raha hai.
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written by भास्‍कर से मन से, एक बात, July 06, 2011
आदरणीय सुधीर जी,
पता नहीं यह बात आप तक पहुंचे या नहीं।
आप ये क्‍यों नहीं समझते हैं कि भास्‍कर की असली ताकत क्‍या है। मध्‍यप्रदेश या राजस्‍थान में वे कौन लोग थे जिन्‍होंने भास्‍कर को आगे पहुंचाया। क्‍या आपको नहीं लगता वे लोग भास्‍कर और उससे भी ज्‍यादा आपके लिए काम करते थे। आपकी बातें सुनते थे, नोट करते थे, आप सोचते थे वे काम कर देते थे। क्‍यों, क्‍योंकि वे आपके साथ आपके सामने काम करते थे। आप प्रशंसा कर देते, वे खुशी से झूम उठते।
आपने कभी सोचा 5 , 10 या 15-20 साल काम करने वाला अचानक क्‍यों छोड कर चला जाता है।
या आप एक कीजिए, इंदौर या जयपुर या आप चंडीगढ को भी ले सकते हैं। वो कौन सी टीम थी जिसने शुरु में काम किया। वे कौन सा और क्‍या काम करते थे। कैसा और किसके लिए करते थे। आप एक भी बार सोचेंगे तो अपने आप इसलिए समझ्‍ा जाएंगे क्‍योंकि आप भी उनके साथ काम करते थे। कार्पोरेट बनना अच्‍छा है लेकिन कितना ये आज के हालात बयां कर ही रहे है। जिन्‍होंने अपने सालों साल आपको दिए उन्‍हें और उनके समर्पण को सुनिए - समझिए, हो सकता है आपको जो कारण बताए गए हों वे प्रायोजित हों। लोग परेशान होंगे तो 10 या 20 हजार कम में भी काम कर लेंगे लेकिन आपका भास्‍कर आपका तो मूल और मन का काम है। कितने संघर्ष से आपने इसे इस काबिल बनाया है ये आप समझते हैं या आपके साथ तब काम करने वाले लोग।
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written by बालकृष्ण , July 06, 2011
पत्रिका, नईदुनिया जैसे प्रतिद्वंद्वी अखबार मिलकर दैनिक भास्कर इंदौर का जितना नुक्सान नहीं कर सकते थे उस से कही ज्यादा नुक्सान अवनीश ने पहुचाया दिया है. भास्कर क़ी जड़े इंदौर में कितनी हिल गई हैं ये अब पता चलेगा. इंदौर के अधिकारियों से अवनीश ने पारिवारिक सम्बन्ध बनाए मगर भास्कर के अधिकाँश स्टाफ को दुश्मन समझा. यही वजह है कि उसे आज इंदौर से चोरों क़ी तरह जाना पड़ रहा है. कोई बिदाई नहीं, कोई फेयरवेल नहीं. दिनभर से उसका मोबाईल भी बंद है. जैसी उसके काम करने क़ी शैली है, छलपूर्ण-कपट से भरी वैसी ही उसकी बिदाई भी है. याद रहेगा एक सम्पादक का इस तरह जाना. जिनको उसने बैठाया शिखर पर, वे भी इतनी जल्द बदल गए,
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written by vinod , July 06, 2011
MAAN GAYE BOSS. ITNA SAB NAMJAD LIKHNE KE LIYE JO JIGRA CHAHIYE WO AAP HE KE PAAS HO SAKTA HE. D.B KE BURE HALAT KE BARE ME CHAI KI CHUSKI OR 1-2RE KI CHUGLI KE 7 LAMBE CHODE BHASAN DENE WALE TO BAHUT HE LEKIN AAP JAISA BEBANK LIKHNE YA BOLNE WALA KOI NAHI. smilies/wink.gif
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written by vikalp tyagi, July 06, 2011
sir great...woow u write so easliy the hard core things. well i was in bhaskar just for month in indore ...i dont know about avnish sir but jo aapne likha vahan k patrkaron k baare me vo ekdum sahi lagta hai ....log tallent ki kadr nahi karte vahan khair jo bhi ho bhaskar is leading and the talest should be there
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written by S yadvandra, July 06, 2011
Yashwant je ye to indore ke bat hai..rajasthan me pehele isko state buaro se hetaya gya pher Kota se bhegaya gya..no 1 ka dhandebaj hai ye insan.jes thale me khata hai use me Chad ker deta hai
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written by gaurav , July 06, 2011
ye patra koi aur leekhata to samajh bhee aaata... lekeen jab wo insan likhta hai, jo khud is se bhi jyada bura he, to hansi aati hai... hahaha... apki kartuto ka bhi to batao
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written by Umesh jain , July 06, 2011
Arvind Bhai thanks. Is aadme ke Karan he mera carrier chop at hua hai. Mere ek kheber per isne lamba soda kya or pher us se he mere sekayet kerwa ker mujhe pretarit kya. Vidhaypati ke sat milker isne lambe khel kye hai. Expose him sir
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written by अनिता , July 06, 2011
कलपेश जी कौनसे धुरंधर हैं। वे भी गुटबाजी को बढावा देते हैं। उनके बारे में प्रचार कर अपनी इस रिपोर्ट को खराब मत करो।
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written by rakesh garg bhopal se, July 06, 2011
Patrika Bhopal me aapke Vinod Puohitji ne Bhi chaplooso ke kahne me aakr 2-3 yuva patrakaro se region liya hai... sab moka chahte hai...
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written by Santosh jain, July 06, 2011
Thanks Arvind je.. Jera Avnish ke dusri kertuto ko bhe subke samne lye. Apne hekeket samne laker thek he kya.
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written by praveen khariwal, July 06, 2011
arvind ji badhai... aaise logo ka chal,charitr,chehra saamne lane k leeyai aap ko mubarakbad...
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written by atul, July 06, 2011
SACH, SACH, 100% SACH

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