धन्यवाद और अलविदा : 168 साल बाद हम अपने 75 लाख वफादार पाठकों से एक उदास लेकिन गौरवशाली विदाई ले रहे हैं

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: आखिरी अंक निकालने के बाद 'न्यूज ऑफ द व‌र्ल्ड' के पत्रकार रो पड़े : मीडिया साम्राज्य बचाने ब्रिटेन पहुंचे मर्डोक : एक पत्रकार बोला- एक महिला की नौकरी बचाने को पूरे अखबार की बलि दी गई : सह संपादक ने कहा- "मैं व्यथित हूं. इस शाम कई पत्रकारों की नौकरी गई, किस चीज के लिए ?" :

लंदन से खबर है कि न्यूज ऑफ द वर्ल्ड को आखिरी बार प्रकाशित करने के बाद जब कर्मचारी और पत्रकार आफिस से बाहर निकल रहे थे तो उनकी आंखों में आंसू थे. अखबार के 200 कर्मचारियों-पत्रकारों के चेहरे व दफ्तर में मातम का माहौल था. कइयों की आंखों में आंसू भर आए. ब्रिटेन के सबसे ज्यादा बिकने वाले टेब्लॉयड न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के दफ्तर से शनिवार शाम आखिरी बार निकलते वक्त कर्मचारियों ने जयकारा भी लगाया पर इस जयकारे में दुख और गुस्सा था. संवाददाता, संपादक और दूसरे कर्मचारी पूर्वी लंदन में मौजूद दफ्तर से एक साथ भीड़ की शक्ल में बाहर निकले. फिर कतार में खड़े हो गए. वहां मीडिया की दुनिया में इतिहास बनते देखने के लिए मौजूद कैमरों ने इस लम्हे को दर्ज किया.

अंतिम अंक की हेडलाइन बेहद सरल और सादी है. लिखा है, ''धन्यवाद और अलविदा''. इसके नीचे छोटे अक्षरों में लिखा है- ''168 साल बाद हम अपने 75 लाख वफादार पाठकों से एक उदास लेकिन गौरवशाली विदाई ले रहे हैं''. इन शब्दों को अखबार के पहले पन्ने की तस्वीर के ऊपर छापा गया. न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के मालिकों ने गुरूवार को यह फैसला लिया कि खबरें जुटाने की कुछ विवादास्पद तरीकों के कारण आलोचना का शिकार होने के बाद वे इस अखबार को पूरी तरह से बंद कर देंगे.

शनिवार शाम दफ्तर से बाहर निकल रहे कर्मचारियों में एक की टीशर्ट पर लिखा था, ''अलविदा क्रूर न्यूज ऑफ द वर्ल्ड'', अखबार के संपादक कॉलिन माइलर ने दफ्तर के बाहर खड़े मीडिया को संबोधित किया. कॉलिन ने कहा, "168 गौरवपूर्ण सालों में ये हमारा आठ हजार छह सौ चौहत्तरवां अंक है. मैं लोगों की इस शानदार टीम को सम्मान देना चाहता हूं जिन्होंने एक कठिन समय के बाद भी शानदार अखबार तैयार किया है. यह वह जगह नहीं है जहां हम होना चाहते थे न ही हम इसके लायक हैं लेकिन अपने 75 लाख पाठकों को, अपने साथियों को मैं आखिरी बार शुक्रिया कहना चाहता हूं."

दफ्तर से निकलने के बाद ज्यादातर कर्मचारी पास ही मौजूद केप पब में गए जहां कई लोग तो रोने लगे. रिपोर्टर जॉन रो ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "मैं और मेरी बीवी, दोनों यहां काम करते थे, इसलिए आने वाला कल हमें बेहद भारी पड़ने वाला है." बहुत कर्मचारी इस बात से दुखी हैं कि रेबेका ब्रुक्स, जो अगवा लड़की मिली डाउलर की फोन हैकिंग की घटना के समय अखबार की संपादक थीं, उन्हें पद से नहीं हटाया गया है. रेबेका ने ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार किया किया है.

गुरुवार को अखबार के एक पत्रकार ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "वे एक पूरे अखबार को सिर्फ एक महिला की नौकरी बचाने के लिए बंद कर रहे हैं. उस महिला के खिलाफ सभी में खौलते गुस्से और नफरत की भावना है. लोग भौंचक्के हैं." अन्य पत्रकारों ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पूर्व अधिकारियों के कामों की सजा भुगतनी पड़ रही है. इनमें से कई कर्मचारी ऐसे हैं जो फोन हैकिंग के दौरान अखबार में काम ही नहीं करते थे. हैकिंग कांड के बाद अखबार से जुड़ने वाले इन पत्रकारों की भी नौकरी खत्म होने का संकट है. अखबार के सह संपादक ने कहा, "मैं पूरी तरह व्यथित हूं. इस शाम कई पत्रकारों की नौकरी चली गई, किस चीज के लिए ?"

रविवार को निकलने वाले 168 साल पुराने साप्ताहिक अखबार न्यूज ऑफ द वर्ल्ड की हर हफ्ते 26 लाख प्रतियां बिकती हैं. हफ्ते के बाकी दिनों में न्यूज इंटरनेशनल का दूसरा अखबार द सन सबसे ज्यादा बिकता है. यह सवाल अभी बना हुआ है कि क्या न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के 200 कर्मचारियों को न्यूज इंटरनेशनल के दूसरे अखबार द सन में रखा जाएगा. इस पर न्यूज इंटरनेशनल की प्रवक्ता कहती हैं, "हमने नौकरी के आवेदन भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है."

अखबार के ज्यादातर कर्मचारियों ने फोन हैकिंग कांड के लिए रुपर्ट मर्डोक के मीडिया संस्थान से जुड़ी एक वरिष्ठ अधिकारी रिबेका ब्रुक्स को जिम्मेदार ठहराया है. एक झटके में नौकरी से हाथ धोने वाले पत्रकारों के मुताबिक ब्रुक्स के कार्यकाल में हुई फोन हैकिंग के चलते ही न्यूज ऑफ द वर्ल्ड को यह दिन देखना पड़ा है. ब्रुक्स न्यूज ऑफ द वर्ल्ड की संपादक रह चुकी हैं. इस बीच, मीडिया मुगल रुपर्ट मर्डोक अपने साप्ताहिक अखबार 'न्यूज ऑफ द व‌र्ल्ड' से जुड़े फोन हैकिंग विवाद को खत्म करने के लिए शनिवार को लंदन पहुंचे. 80 वर्षीय मर्डोक लंदन उस समय पहुंचे जब उनकी कंपनी न्यूज कार्पोरेशन में कार्यरत पत्रकार ब्रिटेन में सबसे अधिक बिकने वाले साप्ताहिक के आखिरी अंक (रविवार) के प्रकाशन की तैयारी में व्यस्त थे.

फोन हैकिंग मामला सामने आने के बाद ब्रिटेन की मीडिया नियामक संस्था पसोपेश है कि क्या मर्डोक को देश की सैटेलाइट प्रसारणकर्ता कंपनी बीस्काईबी के बकाया 61 प्रतिशत शेयर खरीदने का अधिकार दे? न्यूज कार्पोरेशन इस पर पूरा अधिकार करने के लंबे समय से प्रयास कर रही थी, मान जा रहा था कि जल्दी ही उसके हक में फैसला हो जाएगा, लेकिन अब यह आसान नहीं लगता. द टेलीग्राफ ने लिखा है कि मर्डोक कंपनी पर छाए संकट को खत्म करने के लिए लंदन आए हैं क्योंकि वह सैटेलाइट प्रसारणकर्ता बीस्काईबी पर पूरा नियंत्रण हासिल करना चाहते हैं.

खबर में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलियाईमीडिया मुगल द्वारा अपने अखबार को बंद करना लाभकारी बीस्काईबी को हासिल करने का ही एक प्रयास है. फिल्म स्टार, शाही परिवार के सदस्य, जंग के मैदान में मारे गए सैनिकों और अगवा की गई लड़की की वॉयस मेल को गैरकानूनी तरीके से हैक करने के दावे ने न्यूज ऑफ द वर्ल्ड की मातृ कंपनी न्यूजकॉर्प इंटरनेशनल को भी विवादों में लपेट लिया है. न्यूजकॉर्प के मुखिया रूपर्ट मर्डोक को डर है कि यह विवाद ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर बीस्काईबी को खरीदने की उनकी कोशिश पर भी असर डाल सकता है. न्यूज ऑफ द वर्ल्ड में काम करने वाले कर्मचारियों का मानना है कि बीस्काईबी सौदे को हासिल करने के लिए उनकी कुर्बानी दी जा रही है. मर्डोक की कंपनी ब्रिटेन में सन, टाइम्स, और संडे टाइम्स भी निकालती है. विवादों में घिरने के बाद विज्ञापन देने वाली कंपनियों का पीछे हटना भी अखबार को बंद करने के पीछे की एक वजह है.

इस बीच, फोन हैकिंग मामले में पुलिस ने शुक्रवार की रात सरे से तीसरे व्यक्ति को गिरफ्तार किया. 63 वर्षीय इस व्यक्ति पर इस मामले में पुलिस अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप है. बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया. इससे पहले 'न्यूज ऑफ व‌र्ल्ड' के पूर्व संपादक एंडी कालसन से पुलिस ने नौ घंटे तक पूछताछ की. जमानत मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया, जबकि पूर्व संपादक क्लाइव गुडमैन से भी एक अन्य पुलिस स्टेशन में पूछताछ की गई.

उधर, न्यूज इंटरनेशनल ग्रुप के चेयरमैन जेम्स मरडोक ने एक बयान में कहा- ‘जिस व्यवहार से कंपनी को कलंक लगा है, वह बहुत ही बुरा है और कंपनी में ऐसे अमानवीय कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं है. न्यूज ऑफ द वर्ल्ड हमेशा दूसरों को कठघरे में खड़ा करता रहा. लेकिन जब बारी खुद की आई तो विफल रहा. हमने आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट किए. संसद में बयान दिए. लेकिन वह सब झूठ था. मैं कंपनी में क्या चल रहा है, यह समझ ही नहीं पाया.’

न्यूज ऑफ द वर्ल्ड पर फोन हैकिंग के आरोप 2006 में लगने शुरू हुए. धीरे धीरे पता चला कि अखबार ने निजी जासूसों की मदद से कई लोगों के मोबाइल फोन हैक करवाए. अखबार की पूर्व संपादक और मीडिया टायकून रुपर्ट मर्डोक की करीबी पर शक. ब्रिटेन में सबसे कम उम्र में संपादक बनने वाली रिबेका ब्रुक्स को फोन हैकिंग कांड का जिम्मेदार बताया जा रहा है. 20 साल की उम्र में रिबेका ने सचिव के तौर पर न्यूज ऑफ द वर्ल्ड ज्वाइन किया. 2000 में उन्हें उन्हें न्यूज ऑफ द वर्ल्ड का संपादक बना दिया गया. इस दौरान अखबार पर लोगों की निजी जिंदगी से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे.

मामला ब्रिटेन की संसदीय समिति तक पहुंचा. ब्रुक्स ने संसदीय समिति से कहा कि अखबार ने जानकारी जुटाने के लिए पुलिस को पैसा दिया. हालांकि कंपनी ने ब्रुक्स के दावे का खंडन किया और कहा कि वे ऐसे तरीके नहीं अपनाते हैं. विवादों के बीच 2003 में ब्रुक्स मर्डोक मीडिया समूह के दूसरे अखबार द सन की पहली पहली महिला संपादक बनीं. छह साल तक इस पद पर रहने के बाद उन्हें न्यूज ऑफ द वर्ल्ड और द सन को चलाने वाली कंपनी न्यूज इंटरनेशनल का मुख्य कार्यकारी नियुक्त किया गया.

इसी दौरान न्यूज इंटरनेशनल के अखबार न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के खिलाफ फोन हैकिंग के आरोप सामने आए. आरोपों के मुताबिक अखबार 2001 से फोन हैकिंग में लगा हुआ था. उस पर जिन लोगों के फोन हैक करवाने का आरोप है उनमें ब्रिटिश राजघराने के सदस्य, फुटबॉल स्टार डेविड बेकहम और हॉलीवुड स्टार ह्यू ग्रांट जैसे नाम शामिल हैं. अखबार ने अपराधों और युद्ध में अपने परिजनों को खोने वाले पर लोगों के फोन भी हैक करवाए. 2002 में लापता एक स्कूली छात्रा मिली डॉवलर के वाइस मेल हैक कराए गए. बाद में छात्रा का शव मिला. 2007 में ब्रिटिश राजघराने की खबरें करने वाले न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के पत्रकार क्लिव गुडमैन को चार महीन की जेल की सजा भी हुई. 2007 में फोन हैकिंग के आरोपों के चलते एंडी कुलसन को संपादक का पद छोड़ना पड़ा.

आरोप हैं कि फोन हैकिंग की वजह से ही अखबार ने 2002 में दावा किया कि ब्रिटेन के छोटे राजकुमार प्रिंस हैरी ड्रग्स लेते हैं, हैरी की नस्लवादी टिप्पणी छापी गई. न्यूज ऑफ द वर्ल्ड ने ही लोगों को बताया कि ब्रिटिश राजपरिवार से जुड़ी एक महिला ने कैसे राजसी संपर्कों के जरिए कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाया. आरोपों की जांच में पता चला कि अखबार ने ग्लेन मलकेयर नाम के एक निजी जासूस की मदद फोन हैक करवाए. अप्रैल 2011 में हैकिंग के पीड़ितों के वकील ने आरोप लगाया कि न्यूज ऑफ द वर्ल्ड ने 7,000 लोगों के फोन हैक करवाए.

जांच में यह भी पता चला है कि दुनिया के सबसे बड़े मीडिया टायकून रुपर्ट मर्डोक ने आरोपों की जांच न करवाने के लिए तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन युद्धों में जान गंवाने वाले कई ब्रिटिश सैनिकों के परिजनों के फोन भी हैक हुएयुद्धों में जान गंवाने वाले कई ब्रिटिश सैनिकों के परिजनों के फोन भी हैक हुएऔर लेबर पार्टी के सांसदों पर दबाव डालने की कोशिश भी की. अप्रैल में अखबार के तीन और पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया. जांच में पता चला है कि ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस विलियम समेत राजपरिवार के 600 फोन संदेश हैक किए गए.

2010 में पाकिस्तानी टीम की मैच फिक्सिंग से पहले अखबार ने वर्ल्ड मोटरस्पोर्ट के प्रमुख मैक्स मोसली के यौनकर्मियों से जुड़े होने की खबर छाप दी. लेकिन फिलहाल अखबार और उसका प्रबंधन विवादों में है. आरोप लग रहे हैं कि ब्रिटेन के 'बी स्काई बी' ग्रुप के मालिकाना हक को खरीदने की खातिर ही मर्डोक ने न्यूज ऑफ द वर्ल्ड को बंद करने का फैसला किया है. दरअसल 'बी स्काई बी' ग्रुप के सौदे को ब्रिटिश संसद की हरी झंडी चाहिए. यही वजह है कि मर्डोक समूह किसी भी तरह फोन हैकिंग विवाद से पल्ला छुड़ाना चाह रहा है.


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