बिहार में प्रभात खबर से खतरा महसूस कर रहा है हिंदुस्तान

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: सुपारी स्कीम - प्रभात खबर से आदमी लाइए, 10 से 25 हजार पाइए : हिंदुस्तान प्रभात खबर से आशंकित है। उसे अब लगने लगा है कि भास्कर जब आएगा, तब आएगा लेकिन प्रभात खबर जिस आक्रामक और गठी हुई रणनीति से मजबूत होता जा रहा है, उसे नहीं रोका गया तो भास्कर आने से पहले ही बिहार में हिंदुस्तान की एकछत्र लीडरशिप ढह जाएगी। पिछले दिनों दिल्ली में एचटी मीडिया और हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स के शीर्ष लोगों की बैठक हुई। बैठक में प्रभात खबर को लेकर चिंता जाहिर की गई।

 

इस बैठक में हिंदुस्तान के सीईओ अमित चोपड़ा, एचटी मीडिया के डाइरेक्टर मार्केटिंग बिनोय रायचौधरी और हिंदुस्तान के प्रधान संपादक को कहा गया कि वे तुरंत प्रभात खबर की गति अवरुद्ध करने का काम शुरू कर दें। इसके बाद, ये लोग पटना आए। अमित चोपड़ा और बिनोय रायचौधरी ने पटना में वरिष्ठों की बैठक की और बिहार व झारखंड के परिदृश्य का रिव्यू किया। इस रिव्यू में इन लोगों ने कहा कि हमें प्रभात खबर को कम करके आंकने की गलती नहीं करनी चाहिए। प्रभात खबर ने न सिर्फ हमारी प्रसार संख्या में बहुत सधे लेकिन चुपचाप तरीके से सेंध लगा रहा है बल्कि हमारा विज्ञापन रेवेन्यू भी खाने लगा है। इसलिए जरूरी है कि प्रभात खबर को तोड़ा जाए।

इन लोगों स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रभात खबर से खतरा है और इसलिए रणनीति प्रभात खबर को रोकने की होनी चाहिए। नए लोगों को लेने में प्रभात खबर के अच्छे लोगों को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए एचआर की रेफरल स्कीम भी लागू करने की घोषणा की गई। इस स्कीम के तहत, प्रभात खबर का आदमी लाने पर, लाए गए आदमी के ग्रेड के हिसाब से प्रभात खबर से आदमी लाने वाले हिंदुस्तान के स्टाफ को 10 से 25 हजार रुपए का रेफरल दिया जाएगा। अमित चोपड़ा व बिनोय रायचैधरी ने भागलपुर को लेकर खास चिंता जाहिर की।

हिंदुस्तान प्रबंधन ने इसके लिए सबसे पहले प्रभात खबर की मैनपावर तोड़कर उसे कमजोर करने की रणनीति बनाई है। सर्कुलेशन व मार्केटिंग के लोगों के साथ एडीटोरियल के लोगों से भी हिंदुस्तान संपर्क कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि अभी प्रभात खबर के लोगों को किसी भी कीमत पर तोड़ना है, बाद में उन सबको जरूरत के हिसाब से यूपी या झारखंड ट्रांसफर कर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, रांची में भी हिंदुस्तान ने यही रणनीति अपनाई थी कि भास्कर के लोगों को ज्यादा पैसा देकर तोड़ा और फिर उन्हें इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया।

पिछले हफ्ते पटना आए प्रधान संपादक शशि शेखर ने भी इस रेफरल स्कीम को दोहराया। यानी प्रभात खबर के लोगों के लिए हिंदुस्तान अपने स्टाफ को सुपारी दे रहा है। उन्होंने भी एडीटोरियल मीटिंग में प्रभात खबर की चर्चा की और कंटेंट सुधारने और दिल्ली से तैयार कंटेंट स्ट्रेटजी का 100 फीसदी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सीनियर्स की मीटिंग में उन्होंने एडीटोरियल मैनपावर पर बात की और रेफरल स्कीम को दोहराया। कहा यह जा रहा है कि यह रेफरल स्कीम सिर्फ प्रभात खबर का स्टाफ लाने के लिए ही है।

हिंदुस्तान के सूत्रों ने बताया कि हिंदुस्तान के पत्रकार प्रभात खबर के साथियों के नाम वहां दे रहे हैं कि वे इनको ला सकते हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि हिंदुस्तान के स्टाफरों ने पिछले हफ्ते प्रभात खबर के 15-18 पत्रकारों की सूची भी प्रबंधन को दी है कि इनको वे लोग ला सकते हैं। ऐसी खबर है कि पटना में प्रभात खबर के कुछ लोगों से शशि शेखर मिले भी और कुछ लोगों से बात की। हम आपको यह बताते चलें कि प्रभात खबर भागलपुर जिले में पहले दिन से ही प्रसार संख्या में सबसे आगे चल रहा है और मुजफ्फरपुर में वह नंबर एक पर काबिज हिंदुस्तान से मात्र 1000-1500 कापी पीछे है। अब इन संस्करणों के जिलों में भी प्रभात खबर तेजी से अपनी पकड़ बनाने लगा है और कई जिलों में आगे भी हो गया है।

मुजफ्फरपुर व भागलपुर में हिंदुस्तान ने प्रभात खबर को बहुत हल्के से लिया था लेकिन भागलपुर में प्रभात की लांचिंग के हफ्ते भर बाद ही हिंदुस्तान को अपनी साख बचाने के लिए दाम कम करने पड़े थे। पटना में भी प्रभात खबर अपनी पकड़ लगातार मजबूत करता जा रहा है। कुल मिलाकर बिहार में अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही। झारखंड में तो पहले से ही हिंदुस्तान पिछड़ चुका है। आईआरएस के आकड़े कुछ भी कहें लेकिन एबीसी के आकड़ों में हिंदुस्तान प्रभात से बहुत पीछे छूट चुका है। वैसे भी आईआरएस में प्रसार संख्या का असर आने में एक से दो साल का समय लगता है।

पिछले दिनों हिंदुस्तान बिहार व झारखंड के कई वरिष्ठ लोगों ने प्रभात खबर ज्वाइन किया। हिदुस्तान के कई लोग आज भी प्रभात से संपर्क में हैं। अब हिंदुस्तान पैसे के बूते किसी भी कीमत पर बाजी पलटना चाहता है। देखना है कि वह उसमें कहां तक सफल होता है। लेकिन हिंदुस्तान की दिक्कत यह है कि उसके स्टाफ अपनी शीर्ष लीडरशिप को भरोसे की नजरों से नहीं देख पा रहे हैं और न शीर्ष लीडरशिप को बिहार के अपने लीडर्स पर भरोसा है। न वहां स्थानीय संपादकों की चलती है और न प्रबंधकों की, सबको एक-एक पैसे के लिए दिल्ली की मंजूरी लेनी पड़ती है। इसके चलते हिंदुस्तान में आशंका का माहौल बना हुआ है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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Comments (9)Add Comment
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written by manoj, July 13, 2011
Are bhai jisko jaha jana hoga waha to jayega hi purane logo ki kahi bhi puchh nahi ho chahe hindustan ho jagran ho ya prabhat khabar.

na ko promotion na achha increment admi kare bhi to kya mahgai dino din badhte hi ja raha hai.

naye jagah pe achha paisa bhi milta hai aur promotion bhi.

to log ja rahe hai log aa rahe hai jane do aane do sabko apna apna ghar chalane do.

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written by Rahul, July 12, 2011
Hindustan ki barbadi ki kahani ab shuru ho gai hai....Marketing revenue bhi dhire dhire girta ja raha hai. Ab hidustan mein paglo ki tarha taget bate ja rahe hain jisse puri marketing team pareshan hai .

Sanjay shukla ke paas ab marketing mein aadmi bharne ke siva koi vikalp nahi mil raha hai.
Punit khandelia, Prashant Khare, Shailja , Arun Pratap ke jane ke baad ab Media Maketing team puri tarha se barbadi ki aur hai.
Ab wo din door nahi jab hidustan history ke panno me kho jayega.
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written by sahi ram, July 11, 2011
Kya Prabhat Khabar bihar ka number 1 akhbar hai? IRS ke results sabne padha hoga. Kyo? Hindustan ne bihar me jabardast badhat darj ki hai. Pichli bar 76 percentage media market pe hindustan bihar me chaya hua tha aur is bar 84 percentage pe. Ab aur kuch kehna jaruri to nahi? so... bhai is tarah ki hasyaspad aur prayojit samgri na chapen to thik. Jara Bhagalpur me Hindustan aur Prabhat khabar ultakar dekh lijiye aapko jamin asman ka fark najar aayega. Planning ke nam pe hasyaspad samagri chap raha hai aapka Prabhat Khabar. aur Hindustan dar gaya???? Agar sab itna hi achcha hai to pichle dino Bhagalpur aur Muzaffarpur ke prabhat khabar ke editor ranchi kyo bulaye gaye the?? Batayenge?
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written by Ranjeet, July 11, 2011
The problem with Hindustan in Bihar is totally different than it is being perceived. Since correct problem is not being addressed it has become nightmare for the Delhi management to take corrective measures.

The problem of Hindustan in Bihar is "Imported Leadership". This so called leadership has not been able to understand the dynamics of Hindustan in Bihar and started treating Bihar as UP. They were not able to understand the impact of key persons of Bihar and thought that since they don't have any option they are with Hindustan.
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Initially this leadership was eager to establish their authority as in front of local Departmental Heads their experience as well as abilities were well short of the a Brand like Hindustan in Bihar and moreover this leadership had no exposure of such a big edition. Under this complex they started doing negative things to establish their authority. They started transferring people from this location to that location just to make them uncomfortable. Apart from this they also started giving weightage to those people who were bad performers in the eye of Deptt Heads and started creating separate channel to de-establish Hod's. This started creating a negative environment in the company and people who had command on their profile instead of playing this game decided to move in their own.

Unless real leaders are not back nothing good is going to happen in Hindustan in Bihar come what may as problem of sentiments can be addressed by them only which has become the biggest casualty.


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written by khushi, July 11, 2011
yes np singh kaun hai. in chanlon me kabhi dekha nahi. inka to naam bhe nahi suna. yehaan to harivansh, anuj sinha, vijay pathak, swayamprakash aur rajendra tiwari ke naam he log jaante hai.
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written by manishmishra, July 11, 2011
jab nakar ko kaman di jayegi to aisa hi hoga
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written by sunit, July 11, 2011
Hindustan ki dadagiri kitne din? Jamhedpur me 4rth number par hai, Ranchi me 3rd number par, Bhagalpur me 2nd number par, Muzaffarpur me prabhat ke saath sanyukt number one hai. Bacha Patna aur Dhanbaad city...bas inhi shahron me Number one hai Hindustan hai. Jahan tak jilon ki baat hai, Jharkhand ke Garhwa, hazaribagh, Kodarma, Ramgarh, Khunti, Latehaar, Deoghar, Jamtara, Godda, Sahibganj. Dumka, Girideeh, Chatra me number 2 hai Hindustan, Chaibansa, Saraikela, Lohardaga, Gumla, Simdega me number 3 hai aur Daltongan, Pakur aur Bokaro me number 1 hai. Isi Tarah bihar ke kai jilon me hindustan prabhat ya Jagaran se peeche hai.
Hathi Hathi hota hai, dubla ho jai to bhi hathi. Lekin Hindustan walon ko, Khaskar Amit chpra ko to samajhna he chahiye ki dubla hathi amuman dubara tandurust nahi ho pata, vo mrityugati ko he prapt hota hai. Supari dene se prabhat ke kya bigdega? Prabhat naye log le Aayega. Pata nahe Amit chopra ye kyu nahe samjhte? Ek baat aur bata du, Hindusta ke Editorial ka har aadmi naukri badlna chahta hai.
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written by अनाम, July 11, 2011
हिंदुस्तान के पास महंगे-महंगे संपादक हैं लेकिन प्रभात खबर का एक ही संपादक उनका मुकाबला करने के लिये काफी है। ये है एन पी सिंह जो पहले आज तक और एन डी टी वी जैसे चैनलों में रह चुके हैं।
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written by pawan awasthy, July 11, 2011
jo akhbar kesi ek party ka andha samerthan krega uska bahi hal hoga jo Hindustan ka hua h ..iske political head Vinod sharma ho ya Sashi shekher ho ye sv ek party ki gulami krte h ..TV shoe me Vinod sharma Manmohan sarkar k hr galat faisle k smerthan me takreere pedte najar aate h to Sashi shekher je Saniya mirja ur Shoyev ki sadi pr audotorial lik kr apni kavleyat ka bakhan krne se khud ko rok ni pate ...India k agle 20 saalo k economic affair ki Hindustan group ki baithak me Ravert Badhra-ur filmi heroeno ko bula kr ye apni gambhirtadekha chuke h ....inke ek bade sampadek Prabhu Chavala ki Amar Singh se hui baat k tape ko sun kr hm sv sharshar h ........ inko apni galteyo ka ahsas ni h

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