अमर उजाला और डीई शॉ के झगड़े की चर्चा दुनिया भर में

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अमर उजाला और डीई शॉ के बीच का विवाद अब ग्लोबल होता जा रहा है. विदेशों में भी इसकी खबरें छपने लगी हैं. वाल स्ट्रीट जर्नल में नुपूर आचार्य की एक खबर छपी है जिसमें उन्होंने ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म डीई शॉ एंड कंपनी का पक्ष प्रमुखता से रखा है. डीई शॉ ने वर्ष 2007 में करीब 18 फीसदी स्टेक प्रिंट मीडिया कंपनी अमर उजाला में खरीदा था. इसके बदले डीई शॉ ने अमर उजाला को करीब 1.17 बिलियन रुपये (38.2 मिलियन डालर) अदा किए.

बाद में अमर उजाला के मालिकों और डीई शॉ के बीच कांट्रैक्ट की शर्तों को लेकर विवाद शुरू हो गया और मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है. गुरुवार को रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने केंद्र सरकार को सलाह दी कि इस पूरे मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय से कराया जाए. नुपूर की वाल स्ट्रीट जर्नल में मुंबई डेटलाइन से छपी खबर इस प्रकार है--

DE Shaw: Investment in Amar Ujala Publications Compliant With All Laws

By NUPUR ACHARYA OF DOW JONES NEWSWIRES

MUMBAI -- Global private equity firm DE Shaw & Co. Thursday denied allegations of any "misconduct" in its India unit's investment into Amar Ujala Publications in 2007 and said the deal is compliant with all laws, including the country's foreign direct investment policies.

"Approvals from both the Ministry of Information and Broadcasting and the Foreign Investment Promotion Board were obtained prior to the investment," the company said in an e-mailed statement. DE Shaw in 2007 reportedly bought an 18% stake in print media company Amar Ujala for 1.17 billion rupees ($38.2 million). There is now a dispute with the Amar Ujala promoters over contractual obligations and arbitration is under way at the Delhi High Court.

The Press Trust of India news agency Wednesday reported that India's central bank had asked the government to consider an investigation into the deal by the Enforcement Directorate. An e-mailed query to the Reserve Bank of India on the matter remained unanswered.


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