टीओआई, पटना कार्यालय पर प्रबंधन ने ताला जड़ा

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टाइम्‍स ऑफ इंडिया, पटना ने अपने प्रिंटिंग प्रेस पर ताला लगा दिया है. प्रेस पर इसे बंद किए जाने की नोटिस भी चिपका दी गई है. कंपनी ने अपने कर्मचारियों को रिलीविंग आर्डर भी जारी कर दिया है. कंपनी ने यह कदम तब उठाया है, जब टाइम्‍स ऑफ इंडिया इम्‍प्‍लायी यूनियन की ओर से कोर्ट में दायर मुकदमा पर अक्‍टूबर में निर्णय आने वाला है.

टाइम्‍स प्रबंधन ने शनिवार की दोपहर प्रेस बंद करने के एलान के साथ ताला लगा दिया और सूचना चिपका दिया. 15 जुलाई की तारीख से कर्मचारियों को रिलीविंग आर्डर भी पकड़ाया जाने लगा है. गौरतलब है कि टीओआई के कर्मचारी यूनियन ने कोर्ट में वेतन भत्‍ता को लेकर मुकदमा भी कायम कर रखा है. पहले इस मामले में 21 फरवरी को 2011 को फैसला आना था, परन्‍तु बाद में कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 31 अक्‍टूबर कर दिया था.

प्रेस बंद करने से कर्मचारियों में नाराजगी है. उनका कहना है कि फैसला आने के पहले ही प्रेस बंद करने प्रबंधन ने कानून का उल्‍लंघन किया है. कर्मचारियों का कहना है कि किसी भी इकाई को बंद करने से पहले राज्‍य सरकार की अनुमति ली जाती है परन्‍तु टीओआई प्रबंधन ने राज्‍य सरकार से अनुमति लिए बिना ही प्रेस बंद करने का फैसला ले लिया. उन्‍होंने कहा कि टाइम्‍स प्रबंधन ने इसके पहले भी इसी तरह नवभारत टाइम्‍स, पटना बंद करने का निर्णय ले लिया था. जिसे लेबर कोर्ट ने गैर कानूनी करार दिया था.


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Comments (3)Add Comment
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written by jyoti, July 19, 2011
very shocking news, mangmnt should reconsider his decision .
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written by shanta, July 18, 2011
apko malum hai ki TOI IMPL JOURNALIST UNION ka karmchari-patrakaro ke hak ka mamla suprim coart me hai.union ne NAVBHARAT TIMES band hone ke bad hataye gaye patrakaron ke bakaye dilane ka mamle bhi apni ladaee me shamil rakhi hai .TOI samuh ne vevajah hi apna printing pess band karne ka nirnay nahi liya hai.jin karmcharion ke hak ka faisla suprim cort karne vali hai,us faisle se purv hi press band karne ka faisla nyay,kanun our manvadhikar ke hak ki ladaee par bada chot hai .bharat ka sabse sasakt akhbar union ko dhwast karne ke liye TOI ke faisle ke virudh suprim coart ko tatkal sangyan lena chahiye.
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written by vishnu kant shukla, July 18, 2011
यह खबर मर्माहत करने वाली है। टाइम्स मैनेजमेंट का फंडा समझ से परे है। इस अंग्रेजी अखबार को विज्ञापन मिल ही रहा था, साख पर भी बट्टा नहीं लगा था, प्रसार भी बेहतर था। फिर इसे क्यों बंद कर दिया गया। वो भी तब जब तीन माह बाद हाईकोर्ट का डिसीजन आने वाला था। इससे बिहार के अंग्रेजी पाठकों को जोरदार झटका लगेगा।

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