क्या शोभना भरतिया अपने इन तीन संपादकों से इस्तीफा लेंगी?

E-mail Print PDF

शोभना भरतिया से नैतिकता से संबंधित कोई उम्मीद करना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है. बिजनेस और सिर्फ बिजनेस बढ़ाने के लिए लगी हुई इस महिला को इस बात से कोई कनसर्न नहीं रहता कि उसके अखबार में कौन लोग कहां कहां पर किस किस तरह से पत्रकारिता, सरोकार, नैतिकता का गला बेध रहे हैं. और ऐसा करके वे लोग बदले में हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स को पाठकों व जनता की बददुवाएं दे रहे हैं.

कोलगेट, पापड़, साबुन, पावडर... बनाने वाली कारपोरेट कंपनियों की तर्ज पर चलने वाली मीडिया कंपनियों में कहने को तो कंटेंट इज किंग होता है पर असल में वहां सबसे पावरफुल सीईओ महोदय होते हैं जो सिर्फ और सिर्फ बिजनेस की भाषा में बात करते हैं. और अखबार का बिजनेस आता है प्रसार से. जितना ज्यादा प्रसार, उतना ज्यादा विज्ञापन. प्रसार की लड़ाई में धंसे हुए अंग्रेजी व हिंदी अखबारों में अब फर्जी टाइप के संपादकों की बाढ़ आ गई है. फर्जी इस नाते कि भले कोई घटना न हुई हो लेकिन वे उसे ऐसा तानकर और सनसनीखेज बनाकर छापेंगे कि लगेगा जैसे कोई भूकंप आ गया हो.

हिंदी अखबारों में चूतियापे का यह प्रयोग बड़े पैमाने पर शशिशेखर ने पहले आज अखबार में फिर अमर उजाला में किया. और इस सनसनीखेज व फर्जी पत्रकारिता से तात्कालिक तौर पर भले अखबारों की पाठक संख्या बढ़ जाए लेकिन इसका असर दूरगामी पड़ता है और कई बार तो अखबारों को पाठकों की नजर में इतना अविश्वास झेलना पड़ता है कि उसे बंद कर देना पड़ता है. लंदन में चल रहे प्रकरण को देख लीजिए. कैसे मर्डोक का एक अखबार जो सनसनीखेज और फर्जी पत्रकारिता के जरिए प्रसार संख्या बढ़ाने के खेल में लगा था, को आखिरकार बंद कर देना पड़ा और बंद करने देने के बावजूद उसके मालिकों व संपादकों की फंसी गर्दन बाहर नहीं निकल रही है. मर्डोक पर तो बाकायदे हमले तक शुरू हो गए हैं.

ऐसा ही काम अब भारत में हिंदुस्तान टाइम्स अखबार ने कर दिखाया है. इंदौर में नवजात लड़कियों का लिंग बदलकर लड़का बनाने की एक फर्जी खबर हिंदुस्तान टाइम्स में फ्रंट पेज पर आल एडिशन छपी. इस खबर के बारे में पूरी पड़ताल द हिंदू के रिपोर्टर ने की और द हिंदू में खबर छापकर दुनिया को बता दिया है कि कैसे हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक फर्जी खबरों के जरिए सनसनीखेज पत्रकारिता कर रहे हैं और इस प्रकार अपने पाठकों के साथ छल कर रहे हैं और पत्रकारिता की नैतिकता को मटियामेट कर रहे हैं. द हिंदू वालों ने हिंदुस्तान टाइम्स के एडिटर संजोय नारायण से बात की तो उनकी जुबान पर ताला लग गया और उन्होंने मामला भोपाल एडिशन के रेजीडेंट एडिटर अभिजीत मजूमदार का बताकर उनकी तरफ भेज दिया.

अभिजीत मजूमदार अपनी बातों से अपनी झूठ खबर का बचाव नहीं कर पाए. तो ऐसे में सवाल उठता है कि जमाने भर से नैतिकता की अपेक्षा रखने वाले ये संपादक द्वय संजोय नारायण और अभिजीत मजूमदार को एचटी ग्रुप से बर्खास्त किया जाएगा या नहीं. और, इसी अंग्रेजी अखबार के खबर को हिंदी में ट्रांसलेट कर हिंदुस्तान अखबार में छपवाने वाले शशि शेखर की भी बर्खास्तगी क्यों न की जाए क्योकिं जब उनके पास हिंदुस्तान अखबार का इतना बड़ा देशव्यापी नेटवर्क है तो उन्होंने अपने समूह के अंग्रेजी अखबार में छपी खबर को हूबहू हिंदी में करवाकर बिना छानबीन कराए क्यों प्रकाशित करा दिया. सिर्फ इसलिए छपवा दिया कि इस खबर में मसाला पर्याप्त है और सनसनीखेज तत्व खूब हैं? एचटी में खबर छपाकर जितनी बड़ी गलती संजोय नारायण और अभिजीत मजूमदार ने की है, उससे ज्यादा बड़ी गलती शशि शेखर ने इस खबर का हिंदी अनुवाद कराकर हिंदुस्तान में प्रकाशित करके की है.

आखिर इन संपादकों के दिमाग में यह बात क्यों नहीं आई की इतनी बड़ी सनसनीखेज खबर के तथ्यों की पुष्टि छापने से पहले बार-बार क्यों न कर लें? सिर्फ किसी एक रिपोर्टर की बेहूदा मंशा के चलते इतने बड़े अखबार में फ्रंट पेज पर आल एडिशन खबर छप जाए तो फिर इन संपादकों का आखिर काम क्या है, कहां गया इन संपादकों का विवेक, दिमाग, सरोकार और सोच-समझ. अगर शोभना भरतिया इस ब्लंडर के लिए अपने इन संपादकों संजोय नारायण, अभिजीत मजूमदार और शशि शेखर से इस्तीफा ले लेती हैं तो इस देश में वाकई पत्रकारिता में शुचिता और स्वच्छता की परंपरा कायम रहेगी, अन्यथा, जब पूरे कुएं में भांग पड़ी हो तो किसी एक शोभना भरतिया से होश में रहने की उम्मीद कैसे की जा सकती है.

नीचे प्रमाण के तौर पर कुछ और खबरें दी जा रही हैं, जिसे दूसरे अखबारों ने अपने यहां प्रकाशित कर एचटी ग्रुप और शोभना भरतिया को आइना दिखाया है कि उनके संपादक कितनी घटिया किस्म की पत्रकारिता कर रहे हैं. द हिंदू अखबार ने बेहद इनवेस्टीगेटिव तरीके से एचटी के झूठ का पर्दाफाश किया है पर कुछ अन्य अखबारों ने, जिनकी खबरों को नीचे दिया जा रहा है, न्यूज वैल्यू के हिसाब से रोजाना के डेवलपमेंट को प्रकाशित कर बता दिया कि हिंदुस्तान टाइम्स झूठ के सहारे इन दिनों अपने पाठकों को बेवकूफ बना रहा है. नीचे की खबरें पढ़ें.. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

‘लड़की से लड़का नहीं बनाते’

भास्कर संवाददाता

इंदौर. बच्चों में लिंग परिवर्तन कर लड़कियों को लड़का बनाए जाने का मामला उछलने के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है। उधर,पीएम कार्यालय ने भी मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। मंगलवार को स्वास्थ्य आयुक्त डॉ.जे.एन.कंसोटिया ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट भेज दी है। इसमें बताया गया है कि शहर के किसी अस्पताल में लिंग परिवर्तन कर लड़की को लड़का बनाने का ऑपरेशन नहीं किया गया है।

साथ ही घेरे में आए डॉक्टरों से लिए गए लिखित जवाब की प्रति भी भेजी गई है। मामले में शिशु रोग विशेषज्ञ (सर्जन) डॉ. ब्रजेश लाहोटी, डॉ.मिलिंद जोशी, डॉ.संग्राम सिंह, डॉ.मनीष पटेल, डॉ.बी.आर.पारेख, डॉ.मयूर माहेश्वरी, डॉ.अशोक लड्ढा, डॉ.रजनीश कुटुम्बले और डॉ. शशिशंकर शर्मा पर सवाल खड़े किए गए थे। इधर, मामला तूल पकड़ने के बाद इंदौर पीडियाट्रिक र्सजस एसोसिएशन के बैनर तले एमवाय अस्पताल के पूर्व शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. बी.आर. पारेख, एसो. के सचिव डॉ. संग्रामसिंह सहित अन्य डॉक्टर्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पक्ष रखा।

उन्होंने कहा किसी भी शिशु रोग विशेषज्ञ ने बच्चों में (एक-पांच साल के) सामान्य या डिफॉर्मिटी के केस में लड़की को लड़का नहीं बनाया है। उन्होंने कहा कुछ बच्चे जिनका जन्मजात विकार के कारण लिंग निर्धारण नहीं हो पाता है, उनका परीक्षण कर लड़की ही बनाया गया है। सालभर में ऐसे तीन-चार केस हैं।

यह है जेनीटोप्लास्टी

सामान्य भाषा में जेनीटोप्लास्टी यानी गुप्त अंगों का पुननिर्माण। किसी व्यक्ति के जन्म के बाद यदि गुप्तांग के आधार पर लिंग का पता नहीं चले तो उसका चिकित्सकीय व मानसिक परीक्षण होता है। यदि महिला के गुण मिलते हैं तो कृत्रिम तरीके से उसे महिला बनाया जाता है। यदि पुरुष के गुण है तो पुरुष बनाया जाता है।

ऑपरेशन के नियम

किसी व्यक्ति में यदि हार्मोनल या शारीरिक विकृति सामने आती है तब भी 18 साल के पहले ये संभव नहीं है। >अगर किसी सामान्य व्यक्ति का लिंग परिवर्तन ऑपरेशन करना है तो कोर्ट से अनुमति लेना होती है। वहां डॉक्टरों के पैनल से राय ली जाती है।

मरीज की मानसिक अवस्था की जांच की जाती है। कई बार ऐसे केस सामने आते हैं जब बाहरी रूप से महिला और पुरुष दोनों तरह के गुप्तांग हों। ऐसे में शरीर में मौजूद क्रोमोजम व आंतरिक अंग द्वारा तय किया जाता है कि कौन-सा लिंग रहने दिया जाए। (डॉक्टरों के अनुसार)

ऐसे पता करते हैं कि लड़का है या लड़की

यदि किसी बच्चे या व्यक्ति में लिंग निर्धारण नहीं हो पाता है तो निम्न जांचों से उसके गुणों का पता लगाते हैं। उसके बाद तय होता है कि उसे ऑपरेशन कर लड़का बनाना है या लड़की। पुरुष में एक्स-वाय और महिला में एक्स-एक्स क्रोमोजोम पाए जाते हैं। बच्चे का लिंग पता नहीं लगता है तो क्रोमोजोम की जांच करते हैं। मुंह से बकल म्यूकोसा यानी लार की जांच करते हैं। इससे पता लगाते हैं कि महिला के गुण ज्यादा हैं या पुरुष के। इसके अलावा खून की जांच करवाते हैं।

पुरुष में टेस्टोस्टेरॉन और महिला में इस्ट्रोजन हार्मोन पाया जाता है। उसकी मात्रा की जांच होती है। इसे सीरम टेस्टोस्टेरॉन जांच कहते हैं । किसी भी व्यक्ति के बाहरी अंग की जांच करते हैं। यदि किसी का योनी मार्ग है तो उसमें बच्चेदानी और अंडाशय की जांच होती है। अंडाशय की स्थिति के लिए सोनोग्राफी की जाती है।

हमने सरकार को जवाब दे दिया है

केंद्र सरकार को प्रारंभिक रिपोर्ट भेज दी है। डॉक्टरों ने लिखित में रिपोर्ट दी है कि लिंग परिवर्तन के ऑपरेशन कर लड़की को लड़का नहीं बनाया है।- डॉ.जे.एन.कंसोटिया,आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं

शहर के सारे पीडियाट्रिक र्सजस को बुलवाया था। डॉक्टरों ने लिखकर दिया है कि उन्होंने ऐसे ऑपरेशंस नहीं किए हैं, यही रिपोर्ट भेजी गई है। -डॉ.शरद पंडित,संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं इंदौर

असंभव है ऐसी सर्जरी करना

बच्चों में लिंग परिवर्तन कर उसे लड़की के गुण होने के बावजूद लड़का बनाना असंभव है। डॉक्टर क्रोमोजोम का परीक्षण कर माता-पिता की काउंसिलिंग के बाद किसी निर्णय पर पहुंचते हैं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ऑपरेशन किए जाते हैं। बच्चों में डिफॉर्मिटी का संभावना एक प्रतिशत होती है। -डॉ. एश्ले डिक्रूज, अध्यक्ष इंडियन पीडियाट्रिक र्सजस एसोसिएशन

4 साल में बमुश्किल 16 ऑपरेशन ही हुए

शहर के किसी भी पीडियाट्रिक सर्जन ने अभी तक किसी लड़की को लड़का बनाने का ऑपरेशन नहीं किया है। चार साल में बमुश्किल 16 ऑपरेशन ही हुए हैं। -डॉ. मनीष पटेल, अध्यक्ष, इंदौर पीडियाट्रिक र्सजस एसोसिएशन

संपत्ति के कारण अर्पणा से बनी थी अजय !

बड़े औद्योगिक घराने के योगेंद्र मफतलाल के चार बच्चों में से दूसरे नंबर की बेटी अर्पणा पर आरोप लगा था कि 14000 वर्गफीट के मकान व जायदाद में हिस्सेदारी के लिए 2005 में उन्होंने अपना लिंग परिवर्तन करवाया था। परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम अजय मफतलाल रखा। मामला कोर्ट पहुंचा और लंबे समय तक विवाद चलता रहा। उधर, काफी दिनों बाद अजय ने मीडिया को यह बयान दिया था कि उन्होंने प्रॉपर्टी के लिए लिंग परिवर्तन नहीं करवाया बल्कि छह साल की उम्र में असामान्यताएं सामने आई थी।

लड़की से लड़का बनाने की जांच के लिए आया दल

इंदौर, जागरण संवाददाता

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का आठ सदस्यीय दल आज इंदौर आया है। इंदौर के डॉक्टरों द्वारा लड़की को लड़का बनाए जाने के मामले की जाच के लिए यह दल कई अधिकारियों और डॉक्टरों से मिला। एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित लड़की को ऑपरेशन के जरिये लड़का बनाने की खबर से स्वास्थ्य मंत्रालय दिल्ली तक में हड़कंप मच गया था। पूरे मामले की जाच करने के लिए दिल्ली से राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का दल आज इंदौर पहुंचा।

दल के सदस्यों ने इंदौर में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस मामले पर चर्चा की। दल के सदस्यों ने एमवाय अस्पताल और कई निजी अस्पताल व नर्सिंग होम का दौरा किया। दल ने आने से पहले प्रदेश के मुख्य सचिव अवनि वैश्य को जानकारी दी। आयोग के साथ जिला प्रशासन ने एक बैठक बुलाई। आयोग के सदस्यों ने इंदौर के कई पीडियाट्रिक सर्जन से बात कर मामले पर जानकारी ली। इंदौर के पीडियाट्रिक सर्जन इस खबर के बाद काफी गुस्से में थे। उनका कहना था कि इंदौर के डॉक्टरों को बदनाम करने की साजिश की गई है। जबकि वैज्ञानिक तौर पर किसी लड़की को ऑपरेशन के जरिये लड़का बना देना संभव ही नहीं है। इंदौर के डॉक्टरों से मिली शिकायत, ज्ञापन को स्वास्थ्य विभाग ने आयोग के सामने रखा है। आयोग के सदस्य इंदौर में इस मामले की छानबीन करके अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। आयोग के सदस्य इंदौर में लिंग परिक्षण पर भी जाच कर रहे हैं।

म.प्र.: लड़की को लड़का बनाने के मामले ने तूल पकड़ा

28 जून 2011, वार्ता

इंदौर। राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग (एनसीपीसीआर) ने मध्य प्रदेश के इंदौर में डॉक्टरों द्वारा शिशुओं के लिंग परिवर्तन के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से इस संबंध में 15 दिन में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। एक अंग्रेजी राष्ट्रीय दैनिक में परसों प्रमुखता से इस आशय की एक खबर छपी थी, जिसका स्वत: संज्ञान में लेते हुए आयोग ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

बहरहाल राज्य के स्वास्थ्य मंत्री महेन्द्र हार्डिया ने यूनीवार्ता से कहा कि इंदौर में डाक्टरों द्वारा छोटी-छोटी लड़कियों का ऑपरेशन करके उन्हें लड़का बनाने से संबंधित कोई मामला उनकी जानकारी में नही आया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो सरकार पूरे मामले की जांच कराएगी। श्री हार्डिया ने कहा कि इस मामले में संबंधित डाक्टरो से भी पूछताछ की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने कन्याओं के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना तथा गर्भवती माताओं के वास्ते अनेक कल्याणकारी योजनाए लागू की हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके बावजूद यदि कोई डॉक्टर ऐसा कार्य कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ शरद पंडित ने कहा कि उनके पास ऐसे किसी भी प्रकरण की कोई शिकायत नही आई है और एनसीपीसीआर द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने की भी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होने कहा कि यदि किसी डॉक्टर ने ऐसा कोई ऑपरेशन किया है तो उसने काफी सोच समझकर प्रकरण की आवश्यकता के अनुसार ही ऐसा किया होगा। उन्होंने कहा कि बच्चे के शरीर की आंतरिक बनावट और उसकी बाहरी बनावट दोनो को देखते हुए विशेषज्ञों की राय लेकर पर्याप्त आधार पर ही ऐसा आपरेशन किया गया होगा। उन्होंने कहा कि उन्हे नहीं लगता कि कोई भी डॉक्टर इस तरह लड़कियों को लड़का बनाता होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन को प्रतिबंधित करने का कोई कानूनी प्रावधान भी नहीं है।

बताया जाता है कि ये आपरेशन ऐसे बच्चों के किए जाते हैं, जिनके शरीर के आंतरिक अंग पुरुष के होते है और बाहरी बनावट महिला की। चिकित्साशास्त्र की भाषा में इसे जेनोटोप्जास्टी कहा जाता है। इस स्थिति में शरीर की अंदरुनी बनावट के अनुसार ऑपरेशन करके कृत्रिम टिशू के जरिये लिंग तथा अन्य संबद्ध बाहरी अंगों का निर्माण किया जाता है और हार्मोन की सहायता से उन्हें विकसित किया जाता है।

'लिंग परिवर्तन का आरोप बेबुनियाद'

सहारा न्यूज नेटवर्क, इंदौर

इंदौर में डॉक्टरों ने मंगलवार को अबोध लड़कियों के लिंग परिवर्तन का आरोप खारिज कर दिया. शल्य चिकित्सा के जरिये अबोध लड़कियों का लिंग परिवर्तित करके उन्हें लड़कों में बदले जाने का दावा करने वाली खबरों को शिशु रोग विशेषज्ञों ने एक दल ने बेबुनियाद करार दिया. डॉक्टरों ने इस बारे में अपने खिलाफ लगे आरोपों को सरासर झूठ बताते हुए कहा कि ऐसी सर्जरी मेडिकल विज्ञान में संभव ही नहीं है.

डॉक्टरों के दल में शामिल शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बीआर पारीख ने कहा, 'वैज्ञानिक दृष्टि से यह संभव ही नहीं है कि किसी सामान्य लड़की को सर्जरी के जरिये सामान्य लड़के में बदल दिया जाये. हमने ऐसी कोई सर्जरी नहीं की.' डॉ. पारीख ने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन सामान्य तौर पर तब किये जाते हैं, जब पैदाइशी विकृतियों के चलते किसी बच्चे के बाहरी जननांग अविकसित रहते हैं और उसके अंदरूनी जननांगों से मेल नहीं खाते. इससे उसके लिंग के बारे में भ्रम बना रहता है.

उन्होंने कहा, 'ऐसे मामले बेहद दुर्लभ होते हैं. लिहाजा यह कहना सरासर गलत और काल्पनिक है कि शहर के डॉक्टरों ने पिछले कुछ सालों में सर्जरी के जरिये सैकड़ों सामान्य लड़कियों का लिंग बदलकर उन्हें लड़का बना दिया.' शिशु रोग विशेषज्ञों के दल में डॉ. मनीष पटेल, डॉ. ब्राजेश लाहोटी, डॉ. संग्राम सिंह और डॉ. मिलिंद जोशी शामिल थे. एक अंग्रेजी दैनिक के इंदौर संस्करण में छपी खबर में दावा किया गया है कि शहर के कुछ डॉक्टरों ने पालकों के कहने पर सैकड़ों अबोध बच्चियों के ऑपरेशन किये और लिंग बदलकर उन्हें लड़का बना दिया.


AddThis
Comments (9)Add Comment
...
written by zarif malik anand, August 16, 2011
hindustan hindi sanskaran ke vistarikaran ki disha me jis tezi se idhar ek
dashak me karya hua wo to patrakarta or naye purane patrakaro ke liye
kafi accha sanket hai lekin utni hi tezi se is akhbaar ne mission ko darkinaar rakhkar patrakarta ke mapdando ki dhajjiya hi nahi udaai hain balki apne sansthano me kaam karne wale imaandaar logo ko char aane or haraamkhoro ko barah aane dekar khud ko khush kar liya itna hi nahi tamaam reporter viavsayi karan ke aaghosh me phansti h.t.media company
me apne aap ko fit na paakar bahar nikal gaye to kuch ko soshan ke chalte
annyatra jana hi pada.zinda ko murda chaapne wale is hindustan akhbaar ka aane wale samay me kya hasra hone ja raha hai iske saaf sanket dikhaai dene lage hain.............??????????????
...
written by Pramod kumar.muz.bihar, July 24, 2011
agar aaj aadarniye k.k birla ji hote to un par kya gujarti. maine aadarniye khuswant singh dwara likhit kai sansmarno ko padha hai.swargiye birla jee akha bar ke star ko lekar behad sanjida rahate the.
...
written by anujkumar saksena, July 20, 2011
aji mrinal pande ke jamne me to pra aaj samaj ka design uda liya tha.
...
written by om, July 20, 2011
शल्य चिकित्सा के जरिये अबोध लड़कियों का लिंग परिवर्तित करके उन्हें लड़कों में बदले जाने का दावा करने वाली खबरों को शिशु रोग विशेषज्ञों ने एक दल ने बेबुनियाद करार दिया. डॉक्टरों ने इस बारे में अपने खिलाफ लगे आरोपों को सरासर झूठ बताते हुए कहा कि ऐसी सर्जरी मेडिकल विज्ञान में संभव ही नहीं है.

डॉक्टरों के दल में शामिल शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बीआर पारीख ने कहा, 'वैज्ञानिक दृष्टि से यह संभव ही नहीं है कि किसी सामान्य लड़की को सर्जरी के जरिये सामान्य लड़के में बदल दिया जाये. हमने ऐसी कोई सर्जरी नहीं की.' डॉ. पारीख ने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन सामान्य तौर पर तब किये जाते हैं, जब पैदाइशी विकृतियों के चलते किसी बच्चे के बाहरी जननांग अविकसित रहते हैं और उसके अंदरूनी जननांगों से मेल नहीं खाते. इससे उसके लिंग के बारे में भ्रम बना रहता है.

उन्होंने कहा, 'ऐसे मामले बेहद दुर्लभ होते हैं. लिहाजा यह कहना सरासर गलत और काल्पनिक है कि शहर के डॉक्टरों ने पिछले कुछ सालों में सर्जरी के जरिये सैकड़ों सामान्य लड़कियों का लिंग बदलकर उन्हें लड़का बना दिया.' शिशु रोग विशेषज्ञों के दल में डॉ. मनीष पटेल, डॉ. ब्राजेश लाहोटी, डॉ. संग्राम सिंह और डॉ. मिलिंद जोशी शामिल थे. एक अंग्रेजी दैनिक के इंदौर संस्करण में छपी खबर में दावा किया गया है कि शहर के कुछ डॉक्टरों ने पालकों के कहने पर सैकड़ों अबोध बच्चियों के ऑपरेशन किये और लिंग बदलकर उन्हें लड़का बना दिया.

...
written by Sanjaya Kumar Singh , July 20, 2011
हिन्दी का हिन्दुस्तान मैं नहीं पढ़ता इसलिए उसके बारे में नहीं कह सकता हूं पर अंग्रेजी के हिन्दुस्तान टाइम्स में इस खुलासे के बाद संपादकीय पृष्ठ पर किसी जानकार विशेषज्ञ का एक लेख मैंने पढ़ा है जिसमें बहुत ही अच्छे ढंग से यह बताया गया था कि इस मामले में क्या हुआ होगा। अब सारी रिपोर्ट पढ़ने के बाद लगता है कि वह लेख सही था। हिन्दी हिन्दुस्तान ने अगर मूल रिपोर्ट छापी थी तो उसे इस लेख (का हिन्दी अनुवाद) भी छापना चाहिए था और छापा होता तो उसका पक्ष स्पष्ट रहता।
...
written by amit sharma, July 20, 2011
हिंदुस्तान में हर जगह नकलचियो की भरमार है. बरेली में भी तमाम रिपोर्टर नेट से खबरे चुराकर उन्हें अपने नाम से छाप देते है. ब्यूरो ऑफिस बदायू, शाहजहांपुर, लखीमपुर में भी यही होता है. रिपोर्टर अमर उजाला, दैनिक जागरण आदि अखबारों की पुरानी खबरे नेट से कॉपी करके उन्हें अपने नाम से छाप रहे है. बरेली और बदायू में तो यही होता है. संभल जाओ हिन्दुस्तानियों बरना किसे दिन फँस जाओगे.
...
written by rajbali, July 20, 2011
shashisheklhar yahi sab karte rahte hain. agra me jab aaj me the tab to vahan bhi khoob narak kiye the. ek bar to vahan unhone neeli barish tak karva dee thee. kyon krvayee thee ye to vahi bata sakte hain. kul mila kar patrkarita ki mc bc kar rahe hain bas.
...
written by Guru, July 20, 2011
Abhi tak to tagta tha ki sirf wo log jo management main hai wo hi Hindustan ki durgati ke liye jimmedar hain lekin ab to lagta hai ki yahan to kuwen main hi bhang padi hai.
...
written by rakesh. patna, July 20, 2011
yaswant ji

hindustan ki nakal karne ki paripati rahi hai. tin sal se ye paripati aur tej ho gai jab kai acche logo ne hindustan se istifa de diya. aap patna hindustan ko hi dekh le. jab se yeha sashi sekher ke chele aku shrivastva aai hai tab se pqtna me to english pepro ki nakal me teji aa gai hai. aakhir aisa ho bhi to kyo nahi. anubhvi logo ko chod hindustan anubavhin logo ko kam paiso par bahali kar raha hai. aise log vgar nakal nahi karenge to unki naukri kase bachi rahagi. hindustan ki lokpriyata kam hone ka ek karan ye bhi hai ki sashhi khbar par ankhe mund leta hai aur farji khbar ko tarjih deta hai. hindustan, uske sampadko aur parbandhan ka asli cehara samne lane ke liye aapko badhai.

Write comment

busy