जागरण सरोकार है या झूठ का आधार!

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: ताजे आंकड़ों में डाले सन 1999 के आंकड़े : दैनिक जागरण, मेरठ में "जागरण सरोकार" वाली खबरों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और टाप मैनेजमेंट की बैठकों में इसकी खासतौर पर चर्चा के साथ इसे बेहतर बनाने के प्रयास किये जाते हैं,  लेकिन मेरठ के एक रिपोर्टर संजीव जैन ने जागरण सरोकार का बिल्ला लगाकर पूरी तरह झूठी और भ्रामक खबर प्रकाशित की है.

मेरठ के सांसद ने इसका प्रतयक्ष तो नहीं, लेकिन आईना दिखाते हुए विरोध किया है. 24 जुलाई  को प्रकाशित खबर एन सी आर में घटते वन क्षेत्र की है, जिस में ताजे आंकड़े सन 1999 के दिए हुए हैं और हवाला 6 महीने पहले स्थानांतरित किये जा चुके एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के सेक्रेटरी का है. अखबार में  "एनसीआर में सांस भी कैद'' हेडिंग से डाली गई इस खबर में नए की जगह पुराने आंकड़े डाले गए हैं. इस पर अपरोक्ष रूप से एक सांसद ने भी आपत्ति जताई है.

खबर में बताया गया है कि एनसीआर रीजन में वन क्षेत्र लगातार घट रहा है. इसमें फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा एनसीआरपीबी को भेजी गई सर्वे रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. इस रिपोर्ट पर या बताया गया है कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के सेक्रेटरी नूर मोहम्मद ने संबंधित राज्य सरकार को इस ओर तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. महायोजना-2021 में चिन्हित प्राकृतिक संरक्षण जोन के अन्तर्गत पौधरोपण अनिवार्य रूप से कराए जाने के लिए कहा गया है.

इसके तहत पिछले एक दशक में तीन हजार वर्ग मीटर से अधिक वाले ऐसे आवासीय या व्यावसायिक काम्प्लेक्स जिनके मानचित्र स्वीकृत हुए हैं, उनमें नियमानुसार पौधारोपण हुआ या नहीं, इसका सर्वे कराने को कहा गया है. लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य यह है की जिन नूर मोहम्मद के बयान से या खबर प्रकाशित की गयी है, उन्हें स्थानांतरित हुए छह महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. इसके लिए मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने खबर प्रकाशित होने के दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री से एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के सेक्रेटरी का पद भरे जाने के लिए मांग पत्र भी लिखा है. यह मेरठ के सभी अखबारों ने 27 जुलाई को प्रकाशित भी किया है. अमर उजाला में भी यह खबर प्रकाशित है.

संजीव ने पहले भी छापी हैं झूठी व भ्रामक खबरें : इससे पहले जुलाई 2010  में स्थानांतरित किये गए एनएचईआई के सचिव का बयान भी संजीव अक्टूबर 2010 तक छपते रहे थे. मुजफ्फरनगर में पत्रकारिता के दौरान इन्हों ने मुजम्मिल के टाइम्स में कई झूठी खबर प्रकाशित की,  जिन में रेलवे क्रासिंग पर कुछ लोगों की दुर्घटना की खबर भी शामिल है. इस समाचार में शहर के सम्मानित लोगों को डकैत और लुटेरा भी बता दिया गया था.  इतना ही नहीं, संजीव को दूसरे अखबारों के मालिकों के साथ भी शहर के कुछ पत्रकारों ने गोपनीय कागजात के लेनदेन में भी पकड़ा है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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