पत्रकार पर हमला : पायनियर ने छापी विरोधाभासी खबरें, मीडियाकर्मी नाराज

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बलिया के बिल्‍थरा रोड में एक पत्रकार विजय कुमार गुप्‍त पर एजाजुद्दीन समेत कई बाइक सवार लोगों ने हमला कर दिया. जिसमें पत्रकार को काफी चोटें आईं. बताया जा रहा है कि एजाजुद्दीन थाने का हिस्‍ट्रीशीटर भी है. इस घटना के बाद जिले के पत्रकार काफी नाराज हैं. परन्‍तु पायनियर में छपी खबर ने और लोगों को भी काफी नाराज कर दिया है.

मामला यह है कि पायनियर अखबार पहले दिन हमला वाली खबर सीधी व सपाट छापी. जनपद के अन्य अखबारों ने भी इस हमले की खबर प्रमुखता से छापी थी,  किंतु अगले ही दिन के पायनियर अखबार में इस खबर की पूरी बदली हुई कहानी प्रकाशित कर दी गई. जिसमें हमलावर एजाजुद्दीन ने स्वयं पर संगीन धाराओं में जेल जाने व अपराधी होने की स्वीकारोक्ति तो की है, साथ ही स्वयं को पाक साफ भी बताया है. और तो और उस ने सभी पत्रकारों पर ही गोलबंद हो कर हमला करने संबंधित आरोप लगाया है.

इस खबर के बाद पाठक परेशान हैं कि पहले वाली खबर सच है या दूसरी वाली. वैसे भी सवाल उठने लगा है कि अखबार वालों के लिये पत्रकार का मान बड़ा है या फिर किसी अपराधी का गुणगान.  लोग पायनियर वालों से सवाल भी करने लगे हैं कि उसके अखबार के पत्रकार के साथ भी अगर ऐसी घटना होती तो क्या वह भी हमलावरों का ही गुणगान करता? पायनियर अखबार के 27 जुलाई के अंक में छपे खबर के बाद से जनपद के सभी पत्रका एकजुटता के साथ आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं. पायनियर ने अपने दूसरे खबर में पीटे गये पत्रकार को कथित पत्रकार भी बताया है,  जबकि इसी अखबार ने 26 जुलाई को उक्त पत्रकार पर हुये हमले की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था.  ऐसे में यह खबर पत्रकारिता जगत को तो शर्मसार करने वाली तो है ही, साथ ही 26 व 27 जुलाई की विरोधाभाषी खबरों ने पाठकों को भी दिग्भ्रमित किया है.

गौरतलब है कि इस खबर को लिखने वाले पायनियर के पत्रकार कभी नम्‍बर वन कहे जाने वाले अखबार के पत्रकार थे. पैसे लेकर गलत एवं अनर्गल समाचार प्रकाशन के कारण गुस्‍साए लोगों ने बकायदा इनका शव यात्रा निकाला था तथा नगर भ्रमण करने के बाद इनका शव जलाया गया था. इस पूरे घटनाक्रम की सीडी बनारस में बैठे अखबार के संपादक को भेजी गई थी, जिसके बाद इन्‍हें तत्‍काल बाहर कर दिया गया. पायनीयर में आने के बाद फिर से इन्‍होंने अनाप-शनाप खबरों का प्रकाशन शुरू कर दिया है. इसके चलते लोग इस पत्रकार से काफी नाराज हैं.


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Comments (3)Add Comment
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written by brajesh ku.goutam, July 31, 2011
ager patrakaar hi patrakaar ka dusmen ho jayega tho fhir wo din door nahi jab bharat ka chotha stambh gayab ho jayega.
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written by Mulayam maurya, July 31, 2011
patrakar par HAMALA ke mamale me v Apradhi ka sath dene wale (pioneer) akhabar, samaj ka Vala kabhi nahi kar sakte. Local patrakar & Editor Same-same. Chhor do yaar patrakarita.
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written by Ranjeet mishra, July 30, 2011
Pioneer ke editor ko ab to aise patrakar ko bahar kar hi dena chahiye aur nahi kar sake to khud hi bahar ho jana chahie.

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