हिंदुस्तान में तो खबर बीस जुलाई को ही छप गई थी, पत्रिका में छपी बासी खबर

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सच्चाई अब सामने आई है. ''दस दिन पुरानी खबर को हिंदुस्‍तान ने लीड बना दी'' शीर्षक से भड़ास4मीडिया पर एक पत्रकार महोदय द्वारा प्रेषित खबर प्रकाशित होने के बाद कुछ साथियों ने मेल के जरिए सूचित किया है कि यह खबर हिंदुस्तान अखबार के पटना एडिशन में 20 जुलाई को ही प्रकाशित हो गई थी. पंकज पराशर की बाइलाइन इस खबर को स्कैन कर भड़ास4मीडिया के साथ भेजा गया है जिसे नीचे प्रकाशित किया जा रहा है.

तो इसका मतलब यह हुआ कि हिंदुस्तान में 20 तारीख को खबर छपने के बाद उस दिन शाम को राजस्थान पत्रिका अखबार में खबर फाइल की गई तब 21 जुलाई को पत्रिका के सभी एडिशनों में इस खबर का प्रकाशन हुआ. हां, ये जरूर है कि अपने ही रिपोर्टर की खबर को, जिसे पंकज पाराशर ने 19 जुलाई को फाइल कर दिया था और जिसे हिंदुस्तान, पटना में 20 को प्रकाशित कर दिया गया था, हिंदुस्तान के दिल्ली एडिशन में दस दिन बाद प्रकाशित किया गया. और, दिल्ली में पंकज पराशर की बाइलाइन के साथ दिल्ली डेटलाइन जोड़ा गया जबकि पटना एडिशन में इसी खबर को पटना डेटलाइन के साथ प्रकाशित किया गया. फिर भी, यह तो स्पष्ट हो चुका है कि चोरी हिंदुस्तान ने नहीं बल्कि पत्रिका ने की है. हिंदुस्तान, पटना में प्रकाशित खबर इस प्रकार है...


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