दैनिक लोकदशा में कर्मचारियों की दशा खराब, समय से नहीं मिल रही सेलरी

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राजस्‍थान में जनवरी से चालू हुए दैनिक लोकदशा अखबार में एक बार फिर कर्मचारी तनाव में हैं. कर्मचारियों को तनख्‍वाह समय से नहीं मिल रही है. और जो लोग छोड़ कर गए हैं उनकी तनख्‍वाह रोक ली गई है. अखबार के मालिक एक पॉलिटिकल पर्सन हैं और वो अखबार में भी पॉलिटिक्‍स कर रहे हैं.

जो लोग छोड़कर गए हैं उन्‍हें कहा जा रहा है कि अपने अधिकारियों से बात करें और अधिकारियों से कह दिया गया है कि उन्‍हें कुछ बोलने की जरूरत नहीं है, वो कह दें कि मालिक से बात करें. ऐसे वो दोनों तरफ से गेम खेल रहे हैं. वहां के लोगों को इतना डराया गया है कि लोग अपने मालिक का मोबाइल नम्‍बर भी किसी को नहीं दे सकते हैं.

मालिक के द्वारा कर्मचारियों को ना तो समय से पैसा दिया जा रहा है और जो लोग छोड़कर जाना चाहते हैं या जा रहे हैं उन्‍हें तनख्‍वाह रोकने की धमकी दी जा रही है. कर्मचारियों को अभी आईकार्ड भी नहीं दिए गए हैं. मालिक के द्वारा कहा जाता है कि अगर कर्मचारियों को कार्ड दे दिए गए तो उन्‍हें हमें परमानेंट करना पड़ जाएगा. और लोगों को हम हटा नहीं पाएंगे, इसलिए अभी इन्‍हें आईकार्ड उपलब्‍ध न कराया जाए.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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Comments (8)Add Comment
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written by rajendre tiwari, August 23, 2013
hindaun me danik bahskar ke repoter danik baskar ko dalal baskar bana diya hai khabaro per dalali mangte hai
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written by Gyanendra Mishra, August 08, 2011
mere sabhi bhai logo
easa kuch bhi nahi hai....
ki mere koi pese pending hai......
....aur nahi mughe kisi ne hataya hai....
..... me apni marji se gaya the aur aya the....
isliye faltu bato ke bajye kyon na sirf apne kam per dhyan diya jaai.
lokdasha acha akhbar hai......
100 me se 100 koi nahi hota, hum bhi nahi hai....
gyan
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written by अमित बैजनाथ गर्ग, दैनिक लोकदशा, जयपुर, August 08, 2011
ajay bhai... gyan bhai aur ram bhai, kisi ke bhi paise nahi roke gaye hain... unko poori selery di ja chuki hai... aap unse baat karke sach ka pata laga sakte hain... aur agar kisi ke phone no. nahi ho to humse le lijiyega...
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written by ajay, August 06, 2011
amit bhai ye to tum bhi jante ho ki jo bat tumne kahi ha usme kitne sacchi ha........ yaha hum or paper me kya ho raha ha us bare me bat nai kar rahe ho balki sirf lokdasha ki bat kar rahe ha................... kya hua gyan ke sath kya hua ram ke sath or bhi kai nam ha jo aacha kam karte the par polticily issue or parisne ki vajah se gai nai to unko chodne ka koi matlab nai tha kya nuki salary de di............. kya wo log kam nai jante the
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written by Raj, August 05, 2011
One more same catagery news paper get prepration to launch in this catagry that is " Dainik Amber " Please be aware with this. Do not waste your immage , reputation & telent with the joining these type of news paper. as soon as election time will come these type of papers wil come to encash election. Plz. b aware all Media friends
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written by Raj, August 05, 2011
I can't understanding that people why joined these type stupid news papers. Owner of this news paper is the political person & nearest oc c.m. Raj. Only purpose to eun this news paper is for buttering to c.m., get revenue from govt., take tenders etc.... then ? carrier for a jurnilest. ? they joined. Non of reputed manager or editor associate with these type of news paper's. For office copy ? they will pay salary. This is thret to other employe to leve these type of news papre as soon possible.
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written by अमित बैजनाथ गर्ग, दैनिक लोकदशा, जयपुर., August 05, 2011
१२ जनवरी को हर महीने की १२ तारीख पढ़ा जाए. त्रुटि के लिए खेद और विनम्रतापूर्वक क्षमा.
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written by अमित बैजनाथ गर्ग, दैनिक लोकदशा, जयपुर., August 05, 2011
यशवंत भाई, इस खबर में कितनी सच्चाई है इसका अंदाजा आपको इसी बात से लग जाएगा कि यहाँ पर हर कर्मचारी को १२ जनवरी को हर हाल में सेलरी मिल जाती है. हम खुद यहाँ कर्मचारी हैं इसलिए ये बात कह रहे हैं. एक बात और जिन काबिल लोगों को प्रदेश के बड़े अखबारों ने नाकारा साबित करने की पूरी कोशिश की, उन्हें लोकदशा ने उचित पद और पैसे देकर उनकी काबिलियत का मान रखा वरना प्रदेश के पत्रकार जानते हैं बड़े अखबारों में चाटुकारिता कितनी चरम पर है. लोकदशा में मालिक कर्मचारियों से बात तो कर रहे हैं वरना बड़े अखबारों के कर्मचारियों ने अपने मालिकों की शक्ल तक नहीं देखी होगी! एक बात और, जो लोग यहाँ से छोड़कर गए थे उनमे से कुछ वापिस आना चाहते हैं, जिसके लिए संस्थान भी पूरी कोशिश कर रहा है. कुछ खामियां हर जगह होती हैं,
राजस्थान में कोई एक ऐसा अखबार बताइए जहाँ सब कुछ सही चल रहा हो? भाई अच्छे पद और पैसे की बात तो रहने दीजिये, बड़े अखबारों में ईमानदार लोगों की नौकरियां तक नहीं बच रही हैं और जो लगे हैं अफसरों की सहलाने में, उनसे ज्यादा आगे कोई बढ़ नहीं रहा है...

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