राष्‍ट्रपति की जगह डीएलए दे रहा पद़मश्री अंलकरण

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अफसोस की बात है कि जिन अखबारों की खबरों के आधार पर बच्‍चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इसके अध्‍ययन से वह अपना सामान्‍य ज्ञान बढ़ाते हैं लेकिन अगर अखबार ही पूर्णत असत्‍य तथा अज्ञानता का परिचय दें तो भगवान ही मालिक है। जिन पद़्म पुरस्‍कारों के लिए लोगों को अपनी फाइल तैयार करनी पड़ती है। अपने लेखन और समाजसेवा का प्रमाण लेना पड़ता है।

पहले जिलाधिकारी इसके बाद हर प्रदेश की सरकार पद़्म पुरुस्‍कारों के लिए कुछ नाम गृह मंत्रालय भेजती है। कैबिनेट की संस्‍तुति और इसके बाद महामहिम राष्‍ट्रपति महोदय की स्‍वीकृति के बाद किसी को पद़्मश्री, पद़्म विभूषण अथवा पद़्मभूषण और भारत रत्‍न से अलंकृत किया जाता है। लेकिन अब साहित्‍यकारों विशेषकर कवियों को किसी पचडे़ में फंसने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार की जगह यह काम आगरा से दोपहर को प्रकाशित हिंदी दैनिक डीएलए अखबार कर रहा है। वह ऐसे लोगों को भी पद़्मश्री घोषित कर रहा है जो इस दौड़ में भी नहीं हैं।

दिनांक 5 अगस्‍त के आगरा अंक में डीएलए ने पेज 5 पर सुप्रसिद्ध कवि सोम ठाकुर को पद़्मश्री सोम ठाकुर छापा है। आश्‍चर्य इस बात का है कि इस अखबार के मालिक मूल रूप से आगरा के ही रहने वाले हैं और आगरा की हर छोटी बड़ी घटनाओं व आयोजनों से परिचित हैं। अगर सोम ठाकुर को पद़्मश्री मिला होता तो क्‍या आगरा के लोग इस पर हर्ष नहीं व्‍यक्‍त करते। ऐसी खबरों से साफ हो जाता है कि अखबारों में योग्‍य पत्रकारों के स्‍थान पर चापलूसों और आज्ञाकारी ले‍किन अयोग्‍य लोगों का ही बोलबाला है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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