शिक्षामंत्री से पैसा लेकर भी जागरण ने नहीं छापा विज्ञापन

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कुछ दिन पहले हिंदुस्‍तान, मीरजापुर में एक दबंग एमएलसी के विज्ञापन को लेकर बवाल था, इस बार दैनिक जागरण में विज्ञापन को लेकर मामला गरम है.  जागरण, मीरजापुर के एक रिपोर्टर ने माध्‍यमिक शिक्षा मंत्री से विज्ञापन का पैसा लिया, परन्‍तु वह विज्ञापन प्रकाशित नहीं कराया गया. इस बात का खुलासा तब हुआ जब एक खबर छपने के बाद बौखलाए मंत्री के पीआरओ ने उक्‍त पत्रकार को खरी खोटी सुनाई.

हालांकि यह स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया है कि विज्ञापन के लिए कितना पैसा मंत्री महोदय के पीआरओ मायाशंकर दुबे ने दिया था. फिर भी कहा जा रहा है कि यह 25 हजार से लेकर एक लाख रुपये के बीच की कोई रकम है. खबर है कि रिपोर्टर अरुण तिवारी ने विज्ञापन के लिए यह पैसा लिया था परन्‍तु इसका विज्ञापन नहीं छपवाया. इस बीच एक दूसरे रिपोर्टर महेंद्र दुबे ने जब शिक्षा मंत्री के खिलाफ एक खबर लिख दी तो इससे खिसियाए मंत्री महोदय के पीआरओ मायाशंकर दुबे ने जागरण के रिपोर्टरों को जमकर खरी खोटी सुनाई तथा कहा कि पैसा लेने के बाद भी विज्ञापन नहीं छापा हमने कुछ नहीं कहा पर अब आप उनके खिलाफ खबर भी छाप रहे हैं यह ठीक नहीं है.

इस संदर्भ में जब मायाशंकर दुबे से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि कुछ थोड़ा बहुत मामला है पर आपस की बात है. समझा जा सकता है कि मायाशंकर दुबे को वहीं रहकर काम करना है इसलिए वो खुल कर अपनी बात नहीं रख सकते. परन्‍तु यह सच है कि इस तरह का मामला है जरूर. इस संदर्भ में जब दैनिक जागरण, मीरजापुर के प्रभारी डा. अरविंद त्रिपाठी से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है, शिक्षा मंत्री के विज्ञापन के जो भी पैसे हैं वो संस्‍थान की जानकारी में हैं. इसका विज्ञापन छपेगा या फिर इसे वापस कर दिया जाएगा, तकनीकी कारणों से इस विज्ञापन का प्रकाशन नहीं हो सका था.


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Comments (2)Add Comment
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written by pappu pandit, August 17, 2011
राहुल नाम से जिस शख्स ने टिपण्णी की है उसने सभी पंडितो को घसीट कर अपनी घटिया मानसिकता को दर्शाया है | अमर उजाला के जिला प्रतिनिधि का भी नाम यही है पर उनकी मानसिकता इतना घटिया नही है | रही दुसरे राहुल श्रीवास्तव की बात तो वह गंजेड़ी है जिसे अपर पुलिस अधीक्षक ने कई बार टोका है | माया की बात करे तो इनकी मानसिकता ठीक उसी प्रकार है जैसे "बिन पेंदी का लोटा" कभी भाजपा का कमल पकड़ कर जय श्रीराम बोलते थे हांथी की सवारी कर रहे है यह कितना कितने का था इसका खुलासा नही है | जिससे समाचार अधुरा है , प्रश्न यह है कि विज्ञापन के नाम पर गेम किसने खेला ? विज्ञापन दिया गया की नही | यशवंत जी बढ़िया होता अगर समाचार देने वाले का नाम भी उसमे डाल देते | पप्पू पंडित
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written by Rahul shirwastav, August 07, 2011
isme kyon si nai bat hai . ye log to hmesha aisa karte rhte hai .prntu dar ke karan koi bol nhi paa . in sab pandito dk yhi kam hai inhe ptrkarita se koi mtlab nhi hai.

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