जागरण के सेंट्रल डेस्क पर पत्रकारों की कमी, बृजेश सिंह और अनिल निगम भेजे गए

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खुद को देश का सबसे बड़ा समाचार उद्योग बताने वाला दैनिक जागरण समूह आजकल सम्‍पादकीय सहयोगियों की कमी से जूझ रहा है। इस अखबार के सेंट्रल डेस्‍क पर सम्‍पादकीय कर्मियों का टोटा है। यूनिट स्‍तर पर भी सेंट्रल डेस्‍क से समन्‍वय बनाये रखने के लिए लोग नहीं बचे हैं। समूह प्रबंधन ने इस संकट का समाधान अब पोस्टिंग-बाई-फोर्स की नीति अपनाने के तौर पर खोज लिया गया है।

जागरण समूह के सेंट्रल डेस्‍क का हाल कई वर्षों से खराब है। बताते हैं कि करीब पैंतीस सम्‍पादकीय सहयोगियों वाली इस डेस्‍क में अब महज दर्जन भर लोग ही रह गये हैं। समूह के सभी प्रकाशन केंद्रों वाली यूनिटों से समन्‍वय के लिए बनायी गयी इस व्‍यवस्‍था सेंट्रल डेस्‍क पर लोगों की कमी का असर खासा दिक्‍कत तलब होता जा रहा है। यूनिटों में भी कर्मचारियों की भारी कमी के चलते वे भी सेंट्रल डेस्‍क से लगभग कट से गये लगते हैं। इसका असर क्षेत्रवार बनायी गयी डेस्‍क के कामकाज पर भी गंभीर दिख रहा है।

खबर है कि हाल ही हुई एक बैठक में इस समस्‍या से निपटने के लिए जोरशोर के साथ चर्चाएं शुरू हुईं। बैठक में तय किया गया कि सेंट्रल डेस्‍क पर अब कुछ लोगों को पोस्टिंग-बाई-फोर्स की तर्ज पर तैनात किया जाए। इसके लिए हाल ही में दिल्‍ली के एक जिल के ब्यूरो प्रमुख पद से हटाये गये ब्रजेश सिंह को भेजा जा रहा है। चंडीगढ से अनिल निगम भी यहीं लाये जा रहो हैं। खबरों के मुताबिक अभी बड़े पैमाने पर लोगों को सेंट्रल डेस्‍क की ओर रवाना किया जाएग। इसके अलावा भी कई अन्‍य लोगों को यहां भेजा जा रहा हे जो इस पालिसी के तहत कम से कम तीन मास तक सेंट्रल डेस्‍क पर कामकाज को अंजाम देंगे। कुछ ऐसा ही निर्देश यूनिट प्रभारियों को भी दिया गया है।


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