पत्रिका, इंदौर की स्थिति खराब, कई पत्रकारों ने किया नमस्‍कार

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पत्रिका, इंदौर में परिस्थितियां इतनी खराब हो गई हैं कि अब यहां काम करने वालों का विश्‍वास उठने लगा है. पिछले कुछ समय में करीब एक दर्जन लोग पत्रिका से इस्‍तीफा देकर इससे छोटे ग्रुप दबंग दुनिया में कम सेलरी पर जा चुके हैं. अच्‍छे पत्रकारों की कमी का असर अखबार पर भी दिखने लगा है. यहां न्‍यूज एडिटर रहे अरविंद तिवारी भी टीओआई चले गए.

पिछले कुछ दिनों में लगभग दस लोग पत्रिका छोड़कर दबंग दुनिया के साथ जुड़ गए हैं. दबंग दुनिया जाने वाले सभी भास्‍कर से यहां आए थे. यहां का मैनेजमेंट और एडिटोरियल हेड की मनमर्जी और चाटूकारों की फौज ने सब गुड़गोबर कर दिया है. अभी सबसे बड़ी खबर है भास्‍कर से यहां न्‍यूज एडिटर बनाकर लाए गए अरविंद तिवारी के पत्रिका छोड़ने की. संपादक ने अरविंद तिवारी को लाकर यहां बेकार कर दिया था, उनके जिम्‍मे कोई काम नहीं था. इसी कारण वो पत्रिका छोड़कर टाइम्‍स ऑफ इंडिया चले गए.

अभी तक जिन बड़े पत्रकारों ने पत्रिका को बाय किया है, उसमें अरविंद तिवारी,  विनोद शर्मा,  गौरीशंकर दुबे, कपिल भटनागर, प्रमोद जैन, प्रदीप जोशी शामिल हैं. अरविंद तिवारी को छोड़कर सभी ने दबंग दुनिया ज्‍वाइन किया है. इसके अतिरिक्‍त मार्केटिंग और दूसरे विभागों से भी कई लोग दबंग दुनिया ज्‍वाइन किया, जिसमें धीरज शर्मा, अविजित चंद्रोकर शामिल हैं. ये दोनों मार्केटिंग में वरिष्‍ठ पदों पर थे. अगर कोठारी जी से ध्‍यान नहीं दिया तो इस एडिशन का बेड़ा गर्क होते टाइम नहीं लगेगा.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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Comments (11)Add Comment
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written by ikrar khan, November 10, 2014
kothari ji gwalior ke dabra me patrika aaj tak koi pehchan nahi bana paya hai or dabra ki tim sabse kajor hai kyoki inki entry pichle darbaje se hue hai aaj dabra me patrika ko koi padhna pasand nahi karta jald hi yaha badlab kare barna aapke akhbar ka koi nam lene bala nahi hoga
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written by ikrar khan, November 10, 2014
gwalior jile ke dabra me bhi patrika ki halat kharab hai bhaskar bale patrika akhbar ko raddi ke liye le ja rahe hai khabro ke mamle me bhi yahi hal hai dar dar kar khabre likhi jati hai patrika me jatibad phela hua hai jise dhekhne bala koi nahi hai or aaj tak ye akhbar koi jagah nahi bana paya hai kothariji ab to jago
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written by Akshay, November 03, 2011
कोठारी जी अगर आप पत्रिका समूह को लगातार स्थापित रखना चाहते है तो समूह के हर इम्प्लोई की हरकत पर नज़र रखें. ऐसा ही हाल भिंड ब्यूरो का है. ग्रुप अच्छा है मगर लोग नहीं.
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written by alifiyabootwala, August 21, 2011
patrika k khilaf bolne wale ye sab log khud kamchor type k hai patrika mein kaam karne walon ko koi pareshani nahi hai yahan dusre akhbaron ki tarah malik aur naukar jaisa bhedbhav to nahi hai anya akhbaron mein unche padon k log sahkarmi ko gulam samajhte hai jara gaur farmaiye?

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written by vinay goel, August 17, 2011
Bhai arun chauhan
sangharsh karne vale hi jung jeetate hain
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written by kumar kaushik, August 13, 2011
adhuri, avishwasniy aur galat jaankari..... kul milakar afwaah!!!!!!!!!!
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written by raj, August 13, 2011
chamchagiri bager yaha kaam nahi chalta
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written by amjad ansari, August 13, 2011
पत्रिका ने arvind tiwari की क़द्र नही की इसलिए १० लोगो ने एक साथ त्याग पत्र दिया हें पत्रिका के साथ यही होना था
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written by d kumar, August 13, 2011
patrika ka beda to pehle hi gerk ho chuka hai bhi logo. ab to ye ulti sans gin raha hai. kailash-mendola ke chakkar me is akhbar ne apni credibiliti to khoi hi, thook bhi chat liya. ab ye na ghar ka raha na ghaat ka. mai patrika mai reh chuka hoon. mai janta hoon isme mp walo ke sath kaisa saluk hota hai. editor to yanha ek kinnar se jyada nahi
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written by rajesh sharma, August 13, 2011
नीमच में भी यही हालत होने वाले है यह भी कामचोरो को रिपोर्टर नियुक्त किया है उनसे कम नहीं हो रहा ह और वे भी जल्दी अलविदा कहने वाले है यह दबंगों के खिलाफ न्यूज़ लगाने के बाद अपने आपको बादशाह समजने लगे है क्यूकी इनकी नियुक्ति कैलाश गौर ने की है साथ ही सभी पंडित है इसलिए जातिवाद हावी हें संपादक अरुण चोहान को कुछ सोचना च्चैये
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written by retesh, August 13, 2011
patika ke hi --news todey--se bhi 2-3 log dabang chale gaye hai. kuchh log aur jane wale hai.

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