करप्ट लोग चढ़ने लगे अन्ना के मंच पर!

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: संदेह के घेरे में आने लगी टीम अन्ना : जिस अन्ना हजारे ने कभी एक करोड़ रुपये का एवार्ड इसलिए लेने से मना कर दिया था क्योंकि वह एवार्ड एक शिक्षा माफिया की तरफ से दिया जा रहा था, उसी अन्ना हजारे ने अपनी आंखों के सामने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के अपने मंच से उसी शिक्षा माफिया को अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए देखा. जी हां, ये शिक्षा माफिया और करप्ट परसन कोई और नहीं बल्कि अरिंदम चौधरी है.

अपने एक हालिया लेख में अन्ना हजारे को जमकर गरियाने वाले और सत्ता के पक्ष में खड़े होने वाले अरिंदम चौधरी ने अन्ना समर्थकों की नाराजगी से बचने के लिए किसी शातिर की तरह पैंतरा बदला और भड़ास4मीडिया पर खबर प्रकाशित होते ही अगले दिन रामलीला मैदान पहुंच गया. अरिंदम ने टीम अन्ना को पटाने में कामयाबी हासिल की. मंच पर चढ़ा. अधखुली बुशर्ट और खुला सीना दिखाते किसी लफंगे की माफिक अरिंदम चौधरी ने दूसरा गांधी कहे जाने वाले अन्ना हजारे के मंच से समर्थकों को खूब ज्ञान पिलाया और अन्ना हजारे व उनके आंदोलन की भूरि भूरि प्रशंसा कर डाली. सुनिए, अरिंदम ने अपने भाषण में क्या-क्या कहा और समझिए कि उसकी ये बातें उसके पिछले आलेख (क्लिक करें- अन्ना को अरिंदम ने ये क्या कह डाला) से किस तरह अलग हैं-

''अन्‍ना हजारे का भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध आंदोलन और सिविल सोसायटी की बढ़ती ताकत को जनता का व्‍यापक समर्थन मिला है. यह वह आंदोलन बन गया है जो बीते 60 सालों से नहीं देखा गया. अगर सरकार अन्‍ना और उनकी टीम की आधी मांगों को भी मान लेती है तो दो साल में हम एक नया हिंदुस्‍तान देखेंगे. भ्रष्‍टाचार के लिए सरकार और सरकारी नीतियां जिम्मेदार हैं. देश में सबसे ज्‍यादा भ्रष्‍टाचार बड़े ओद्यौगिक घरानों में होता है. सिर्फ इन घरानों को पांच से छह लाख करोड़ रुपए की कर राहत दी जाती है. इस रकम को अगर विकास में खर्च किया जाए तो देश से गरीबी का नामोनिशान मिट सकता है. देश में खाद्य वितरण में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार भी चिंतनीय है. हमारे देश में 200 मिलियन लोग 40 साल की उम्र से पहले मर जाते हैं. इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि 60 मिलियन टन अनाज सिस्‍टम में फैले भ्रष्‍टाचार के चलते उन लोगों तक नहीं पहुंच पाता है. सरकार हर बजट में अमीरों के लिए कुछ नए प्रावधान जरूर करती है, लेकिन उसका एक भी फैसला भ्रष्‍टाचार को समाप्‍त करने वाला नहीं होता. सरकार इस ओर बिल्‍कुल ध्‍यान नहीं देती. सरकार की इसी नजरअंदाजी के कारण ही अन्‍ना हजारे को सड़क पर आना पड़ा है. अन्‍ना भ्रष्‍टाचार को मिटाना चाहते हैं. यह लोकपाल बिल बहुत उपयोगी बिल है. इसी बिल ने अमेरिका और इंग्‍लैंड जैसे देशों को बदला है. इसके साथ ही स्‍वीडन और सिंगापुर जैसे देशों से भी भ्रष्‍टाचार पर लगाम लगाने में भी लोकपाल बिल का बहुत बड़ा योगदान है. दक्षिण कोरिया और इंडो‍नेशिया में भी अगर भ्रष्‍टाचार पर नकेल कसी जा सकी है तो लोकपाल की वजह से. कोरिया में इस लोकपाल के लिए प्रतिनिधियों का चयन सिर्फ छह दिन में हो गया था, अमेरिका में इसके लिए छह महीने का वक्‍त लगा वहीं भारत में 20-30 साल का समय लग गया ऐसे लोगों को सामने आने में. अन्‍ना का यह आंदोलन काबिलेतारीफ है. जिस तरह से इस आंदोलन को दिशा दी गई है उसके लिए अन्‍ना और उनकी टीम का काम काबिले तारीफ है. मैं अन्‍ना हजारे से अपना अनशन समाप्‍त करने का अनुरोध करता हूं. यह आंदोलन और विरोध चलता रहना चाहिए. अन्‍ना समर्थकों को चाहिए कि सांसदों के घरों के बाहर धरना प्रदर्शन करने से बेहतर रहेगा कि स्‍थायी समिति के 14 सदस्‍यों के घरों के बाहर धरना दिया जाए. अन्‍ना को अपनी सेहत का खयाल रखना चाहिए और आगे चुनाव और न्‍यायिक सुधार की जंग के लिए भी हमारा मार्गदर्शन करना चाहिए.''

दोहरा चरित्र : अन्ना को पहले लिखकर गाली, फिर मंच पर चढ़कर गुणगान

पढ़ा आपने. कल तक अन्ना को जाने किस किस उपाधियों से नवाजने वाला यह कथित मैनेजमेंट गुरु जब अन्ना के मंच पर पहुंचता है तो उसके सुर बदल जाते हैं और किसी शातिर नेता की तरह भीड़ को अपने पक्ष में लुभाने के लिए वही बोलता है जो अन्ना समर्थकों को पसंद आए. पर बड़ा सवालिया निशान टीम अन्ना पर लग गया है. वे लोग आखिर किस तरह करप्ट लोगों को मंच शेयर करने दे रहे हैं. जो आंदोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ हो रहा है, उसी आंदोलन के पवित्र मंच पर घटिया व अपवित्र लोग चढ़े जा रहे हों और लच्छेदार बातें कहकर खुद को हीरो साबित कर रहे हों, तो यह प्रकरण बताता है कि टीम अन्ना किस कदर दबाव में है.

और, अगर ये लोग आज दबाव में हैं तो कल को जनलोकपाल बिल बन जाने पर क्या गारंटी कि इन्हें कोई भ्रष्टाचारी पटा न ले. अरिंदम चौधरी और उनके आईआईपीएम के खिलाफ दर्जनों प्रकरण, कई जांच आदेश और कई घपले-घोटाले के आरोप हैं. न्यूज चैनल और अखबार इनके खिलाफ कुछ न लिखें, दिखाएं, इस कारण अरिंदम चौधरी हर साल अरबों रुपयों का विज्ञापन इन अखबारों और चैनलों को देता है. साथ ही, खुद के मीडिया हाउस के जरिए वह देश में अपनी छवि एक क्रांतिकारी मैनेजमेंट गुरु की बनाता रहता है. पर इसी अरिंदम चौधरी के मीडिया हाउस की कहानी है कि यहां कई महीनों से लोगों को तनख्वाह नहीं मिली. लड़कियों को दिनदहाड़े आफिस में गरियाया जाता है.

अरिंदम चौधरी का दाहिना हाथ माने जाने वाला शख्स भरी दोपहर दारू पीकर आफिस आता है और लड़कियों को गंदी गंदी गालियां देता है. उसकी दी हुई गालियां की रिकार्डिंग भी भड़ास4मीडिया के पास सुरक्षित है. वह लड़कियों का कई तरह से शोषण करता है और इसे पूरा आफिस जानता देखता है. पर चंद हजार रुपये में इमान बेचने वाले हमारे महान पत्रकार, जो वहां काम करते हैं, विरोध की आवाज तक निकाल नहीं पाते. इसी के मीडिया हाउस में पेड न्यूज का काम धड़ल्ले से किया जाता है. यहां पत्रकारों को विज्ञापन और लायजनिंग का काम करने के लिए मजबूर किया जाता है. इसके भी दस्तावेज भड़ास4मीडिया के पास सुरक्षित है.

इन प्रकरणों पर बात कभी बाद में और विस्तार से किया जाएगा, फिलहाल इतना तो कहा ही जाना चाहिए कि जो खुद नख से शिख तक फर्जीवाड़े में डूबा हो, वो वह शख्स अन्ना के मंच पर चढ़ कर जनता को उपदेश दे तो यह न सिर्फ अन्ना का और इस देश का दुर्भाग्य है बल्कि इस आंदोलन के हश्र को भी बताता है. मीडिया के सभी लोगों और अन्ना के सभी समर्थकों को इस बिंदु पर खुले दिमाग से विचार करना चाहिए.

संभव है, कई लोग मेरी बातों, विचार से सहमत न हों. उनके कमेंट की प्रतीक्षा रहेगी. पर यह खुली बहस का विषय बन गया है कि क्या टीम अन्ना के लोगों ने अरिंदम चौधरी को रामलीला मैदान का मंच उपलब्ध कराकर गलत काम नहीं किया है? और, अरिंदम चौधरी ने अन्ना के साथ मंच पर भाषण देते हुए फोटो खिंचवाकर उसका अपनी ब्रांड इमेज बढ़ाने में, अपने पापों को धोने में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, क्या इसका एहसास टीम अन्ना को है?

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

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Comments (14)Add Comment
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written by brajesh, August 29, 2011
annaji,arvind sir.kiran mam ko mera pranam aap log jo b kar rahe h haamre liye kar rahe h is desh ke bhrasht log jo v kahe par hum aap ke sath h .........jai hind
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written by darshan, August 28, 2011
sayad anna ke aas paas thik log nahi jo vyakti ko pahachan sake,medha patkar jo guj ke sardar dam ka viroth karti thi use dekhna chahiye us ka water aaj kaha jarah hy,or sayad anna ka istimal ye log modi ji ke khilaf bhi kare
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written by Anu D., August 28, 2011
अपना अपना प्रबंधन है यशवंत जी. अन्ना के विरोध में लिखने के बावजूद अरिंदम ने अन्ना का मंच हासिल कर लिया. दरअसल अन्ना बड़ी सोच रखते हैं इसलिए वे मात्र आलोचनाओं से नहीं घबराते. रही बात उनके दाहिने हाथ वाले शख्श की तो उनके जैसा लीडर मीडिया जगत में नहीं होगा.
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written by sanjay thakur, August 27, 2011
sabhi ke comment kaabile taarif hain....padh ke aisa laga ki waakai main kisi loktantrik desh me reh raha hu........lekin sabhi ko abhivyakti ka adhikaar hai.....aur arindam ji bhi hamare hi desh ke hain.......haan yeh baat alag hai ki arindam jo ki achhe buddhijivi hain ne anna ke aandolan ka bhavisya soche bina hi kuch jyada bol diya......ab shabad toh vapas aa nahin sakte.....isliye stage par chad ke unhe sudhara toh ja sakta hai.....

Sanjay thakur
bansal news, jagdalpur
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written by Naresh Chandra Gupta, August 27, 2011
श्री अन्ना हजारे एवं उनकी पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई - खारकर टीम के सर्वश्री अरविन्द केजरीवाल, पर्शांत भूषण , सिसोदिया जी , श्रीमती किरण बेदी तथा मेधापटकर(आपसे वैचारिक बेध के बाद भी ) तथा विशेष रूप से देश की करोड़ों जनता जिनमे माता , बहने, बच्चे , बुजुर्ग देश की ताकत नवजवान भएइयों को बधाई और उनके प्रती आभार जिअनके प्रयासों के हमें अभी आधी सफता मिली है.

राजनैतिक क्षत्रे से भारतीय जनता पार्टी एवं उनके सहयोगी दलों के प्रती आभार जिनके दबाव के कारण ही सरकार को एस निरणय तक पहुचने के लिए बाध्य होना पड़ा. आप लोगों के प्रती भी आभार.

ऐसा ही आन्दोलन हमें विदेशी बैंकों में जमा काले धन को जब्त कर देश में वापस लाने के लिए करना है तथा Elected Representatives को Call Back के लिए संविधान संशोधन के लिए करना है.

लोकपाल बिल को टीम अन्ना के अनुसार संसद से पास करने के लिए हमें अपना योगदान आज की तरह ही करना है नहीं तो सरकार रामदेवबाबा या टीम अन्ना के ड्राफ्टिंग कमिटी के साथ जो किया वही इस बिल के साथ भी ना कर सके. सरकार की नियत में बड़ा .....है. इसलिए हम युवाओं को सजग व आन्दोलन के लिए हमेशा तैयार रहना होगा .

युवाओं से अपील है की आज से ही वे इसकेलिए तैयार रहें.
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written by ashok, August 27, 2011

क्या आपसी understanding है.ओमपुरी का पूरा वीडियो तीन घंटे में भी नेट पर नहीं खोज पाया.
स्टार ने बीच मे ही रोक दिया. दुःख भी वयक्त कीया.
सब जगह आधे वीडियो लगे है जनता को पूरी बात तो पता लगने दो.
सेंसर शिप और खुद लगाओ तो ठीक .सरकार लगाय तो गलत.




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written by yours, August 27, 2011
Aap ko bhi ad chahiye kya? lag toh aisa hi raha hai...ha ha ha...
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written by Dr Maharaj Singh Parihar, August 27, 2011
इस सचाई से आप भली भांति परिचित हैं कि देश का मौजूदा मीडिया सरमायेदारों के हैं। आप अन्‍ना के आंदोलन में मीडिया की सकारात्‍मक भूमिका की भले ही सराहना करें लेकिन इस सच को भी आप जानते हैं कि हर अखबार और चैनल में मालिकों की ही चलती है। आज लोकसभा में शरद यादव ने डिब्‍बे का नाम लेकर इसकी जों आलोचना की है उसके निहितार्थ हैं
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written by मदन कुमार तिवारी , August 27, 2011
ग्यानचक्षु खुला या नही ? मैं अन्ना हूं चिल्लाते चल रहे थें । दोष सिर्फ़ अरिंदम का ैै या अन्ना ग्रुप इसके iिये ददोषII है ? अन्ना भी ट्रस्ट माफ़िया हैं । दसस ट्रस्ट के मालिक , करोडो ससaककaार से ले चुके aम अनुदaानक ए uुप में । www.biharmedia.com पर पढिये ।
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written by navneetvyas, August 27, 2011
kya hoga aakhir ish jan lokpal bil ka logo ko na toh pata h nhi jante h phir kyu aandolan kar rahe h 100 mein 5 ko pata hi hoga janlokpal ka matlab
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written by दिनेश, August 27, 2011
दोष अन्ना का नहीं है, उनके साथियों का है जो मंच संचालन कर रहे हैं। इसे आंदोलन के हश्र से न जोड़ें। कल एक मशहूर अभिनेता को सुनकर भी अच्छा नहीं लगा था। बातें एक हद तक सही थीं पर इतने बड़े मंच पर इन्हें कुछ सलीके के साथ रखा जा सकता था। आज शरद यादव ने इनकी खूब खबर ली। अन्ना के आंदोलन ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है इसलिये यह ढलान पर न आये इसके लिये कुछ सावधानी बरतनी चाहिये।
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written by rajkumar, August 27, 2011
bina pendi ka lota hai arindam
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written by [email protected], August 27, 2011
ha ha ha..khabar pad kar aesa laga ki arindam bhi bhadas padta hai..ha ha.. abey uske pas is chutiya site ko padne k alawa aur bhi bahut kam hain..ha ha..maza aa gaya.tumhari khabar ke asar par.
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written by अभिषेक, August 27, 2011
खुली बहस तो बरखा दत्त पर भी होनी चाहिए थी यशवंत जी.. आपलोगों ने तो उसे वीरांगना बना डाला। मुझे पता है आप वैसे कमेंट नहीं छापते जो आपके विचारों से मेल नहीं खाते, लेकिन निजी तौर पर ही पढ़ कर जवाब दे दीजिएगा।

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