गोरखपुर मंडल के कमिश्‍नर ने जारी की अमर उजाला न पढ़ने की विज्ञप्ति

E-mail Print PDF

: अखबार ने किया जीडीए के करोड़ों के घोटाला की साजिश रचने का भंडाफोड़ : गोरखपुर में अमर उजाला की भंडाफोड़ करने वाली खबर से बौखलाए गोरखपुर मंडल के कमिश्‍नर ने बाकायदा विज्ञप्ति और पत्र जारी कर लोगों से अमर उजाला न पढ़ने की गुजारिश कर डाली, उन्‍होंने इसे दूसरे अखबारों में भी प्रकाशन के लिए भेज दिया. बाद में जब उन्‍हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्‍होंने तत्‍काल विज्ञप्ति और पत्र को वापस मंगवा लिया.

इसको लेकर गोरखपुर के पत्रकारों ने कमिश्‍नर को खूब खरी खोटी सुनाई. जानकारी के अनुसार अमर उजाला, गोरखपुर एडिशन में प्रदीप श्रीवास्‍तव की एक बाइलाइन खबर छपी है - पांच अरब निपटाने की तैयारी. इस खबर में जीडीए के घालमेल की योजना का भंडाफोड़ किया गया है. खबर के अनुसार जीडीए की डेढ़ सौ एकड़ जमीन का एलाटमेंट 1997 में दो बिल्‍डरों को किया गया था. उस दौरान वन विभाग ने इस जमीन पर अपनी आपत्ति जता दी थी, जिसके बाद जमीन का आबंटन निरस्‍त कर दिया गया था.

इसके बाद तमाम कागजी कार्रवाई के बाद उक्‍त जमीन को 2009 में उक्‍त जमीन को पुराने रेट पर ही आबंटित करने की तैयारी की जाने लगी. खबर के अनुसार पुराने रेट के हिसाब से इस जमीन की कीमत लगभग पचीस करोड़ के आसपास है जबकि वर्तमान में इस जमीन की कीमत पांच अरब रुपये के आसपास हो चुकी है. जीडीए के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने मिलीभगत करके उक्‍त जमीन को पुराने रेट पर ही आबंटित करने की पर्दे के पीछे तैयारी कर ली थी.

अगर चर्चाओं की माने तो इस जमीन को पुराने रेट पर आबंटित करने के बाद बीच के कई करोड़ रकम की बंदबाट किए जाने की योजना था. इसके लिए गोरखपुर से लेकर लखनऊ तक में पूरी सेंटिंग कर ली गई थी, बस बोर्ड की बैठक करके इस पर मुहर लगना ही बाकी था. बाकी सारी सेंटिंग पूरी कर ली गई थी. इस दौरान जिन अधिकारियों ने इस डील का विरोध किया उन्‍हें जीडीए से रुखसत करा दिया गया.

बताया जा रहा है कि इस बीच जब यह खबर अमर उजाला में छप गई तो जीडीए प्रशासन बौखला गया. खासकर कमिश्‍नर के रविंद्र नायक तो पूरी तरह बौखला गए. उन्‍होंने अमर उजाला पर किसी अधिकारी का वर्जन लिए बिना खबर प्रकाशित करने का आरोप लगाते हुए अखबार के खिलाफ एक विज्ञप्ति तथा पत्र जारी कर दिया, जिसमें उन्‍होंने लिखा कि अखबार भ्रामक खबर प्रकाशित करता है, कृपया इस अखबार को लोग ना पढ़े.

सूत्रों का कहना है कि इसके लिए उनको अमर उजाला के कुछ प्रतिद्वंद्वी मीडिया हाउस वालों ने सलाह दी थी. खबर से बौखलाए कमिश्‍नर ने अमर उजाला को छोड़कर सभी अखबारों को विज्ञप्ति जारी भी कर दी. हालांकि बाद में जब कमिश्‍नर को अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्‍होंने आनन-फानन में अपने लोगों को भेजकर अखबारों में दी गई विज्ञप्ति वापस मंगवा ली. सूत्रों का कहना है कि उन्‍होंने अमर उजाला अखबार के प्रबंधन से मौखिक रुप से खेद भी जताया.

कमिश्‍नर के रवैये तथा चौथा स्‍तंम्‍भ माने जाने वाले मीडिया पर गोरखपुर के पत्रकार भड़क उठे. प्रेस क्‍लब के नेतृत्‍व में पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल कमिश्‍नर के रविंद्र नायक से मिला तथा उन्‍हें खूब खरी खोटी सुनाई. कमिश्‍नर के पास पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं था. उन्‍होंने पत्रकारों से उस घटना के लिए खेद जताया. इस संदर्भ में जब अमर उजाला के संपादक मृत्‍युंजय कुमार से बात की गई तो उन्‍होंने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि अखबार सच से किसी कीमत पर समझौता नहीं कर सकता. खबरें अब अधिकारियों के कहे अनुसार थोड़ी ही प्रकाशित की जाएंगी. इतने बड़े घोटाले को होता देखकर हम चुप नहीं रह सकते थे, हमने अपना काम किया, अपने दायित्‍वों का निर्वहन किया.


AddThis
Comments (23)Add Comment
...
written by harish singh, September 07, 2011
lagata hai nikung kamisnar aar bildaron ka dalal hai. yaswant jee par jativad ka aarop lagakar enhnone bata diya hai ki yah kiske kahane par yah sab kar rahe hain.
...
written by sanjay sharma, September 07, 2011
farjee nam se farjee bat kaene vale bhai nikung jii yadi aap jara bhee padhe likhe hain aar pradeep jee ko muradabad s jante hain to yah bhee jante hoenga ki pradeep ji 5 sal se GDA beet dhekh rahen hain. eske bad bhee ve na to jameen le pai na hee apna makan bana pae. pradeep jee jaise Emandar Riporter k bare m aisi bat karna aapne muh par thookne jaisa hai
...
written by nikunj, September 03, 2011
Rahim ji aur anand ji mai b pradeep ko muradabaad k jamane se jaanta hoon. 100-100 rs leker khabre chapta hai aur ek number ka bhrast aadmi hai. isne ye khabar isliye chapi hai qki ise iskliye mota paisa diya gaya hai. darasal is khabar ko likhwane k piche ek builder ka hath hai. khabar sirf wo nahi hoti jo uperi taur per per dekhker lagta hai. aur pradeep srivastav to her khabar paise aur jod-tod k liye hi likhta hai. wahi yashwant is khabar ko isliye positive chapraha hai qki mrityunjay kumar thakur hain aur yashwant b thakur hai. ye yashwant thakuron ki khabrein manage kerta hai
jai ho sampadak..jai ho amar ujala
...
written by sanjay chand kaushik, August 31, 2011
lage raho pradeep ji anna ki tarah,,
...
written by sanjay chand kaushik, August 31, 2011
thanx pradrrp ji aur amar ujala yani sach ka samana comisnor sahab aap jaishe log anna ko anshan karne ko majbur karte hai ab daro LOKPAL aaraha hai....
...
written by sanjay chand kaushik, August 31, 2011
thanx pradeep ji aur amar ujala yani sach ka samana comisnar sahab anna ko ansan karne ke liye aap jaise log protsahit karte hai driye ab LOKPAL aaraha hai.....
...
written by abhai sing, August 31, 2011
lagata hai ki kamisnar IAS naheen balkee baboo hai. ek IAS etnee behudee bat kaise kar sakta hai. abhai. vns
...
written by susheel, August 31, 2011
bhai pradeep sach samane lane k lia dhanyavad. ummeed hai ki kamisnar aar chor bildaron se aap darenge naheen. susheel. lko
...
written by anil singh, August 31, 2011
bildaron, afsaron k khilaf ladane vale bhai pradeep srivastav aar amar ujla ke sampadak ko paresan nahee hona chahia.
...
written by kamles tiwaree, August 31, 2011
kamisnar ka paglana uchit hai. 4 - 5 karor ka nuksan jo hua hai.
...
written by ‌vijay nandan, August 31, 2011
अमर उजाला वाले पहले अपने घर में विभीषण देखें। अमर उजाला का ही एक डीएनई नोएडा गुमनाम चिट्ठियां भेजता रहता है और एक चीफ रिपोर्टर आफिस में ही नकारात्मक टिप्पणियां करता रहता है। घर में ये हाल है तो बाहर वाले जिसमें अफसर या दूसरे अखबारवाले हैं, मजा तो लेंगे ही।
मेरी इस टिप्पणी का मतलब ये नहीं कि मैं क‌म‌िश्नर की बेवकूफी का समर्थन करता हूं।
...
written by श्याम भारती, August 30, 2011
क‌मिश्नर के चमचों सावधान। अन्ना से डरो
...
written by santos tiwaree, August 30, 2011
kamisnar kya kahana chah rahe hain. kya adhikaree jo kahenge vahee khabar hai. achhee khabar k lia bhai pradeep ko badhay. santosh, jonpur
...
written by rana pratap, August 30, 2011
pradeep shrivastava jee ki khabar sahi ho ya galat, mandalayukt ko akhbar na padhne ki baat nahi kahni chahiye thi. ye galat bayani hai.
...
written by ek patrakar, August 30, 2011
sab sale chor hain. kamishner ki isliye fati ki usko milne wala comison ab nahi milega. jai ho amar ujala ki. sach men, akhbaron ka leader to amar ujala hi hai. reporter ko v badhai. chanp ke chhapa hai raja ne. hamare banaras men aise reporter hote to gajab ho jata.
...
written by farjand rahim, August 30, 2011
मैं प्रदीप जी को मुरादाबाद से जानता हूं। वहां पर भी ये विकास प्राधिकरण देखते थे। नया मुरादाबाद महायोजना में हुए करोड़ों के घोटाले का इन्होंने ही पर्दाफाश किया था। जीडीए की खबर पढ़ने के बाद लगा कि अपने घर जाने के बाद भी तेवर बरकरार है। प्रदीप जी, फाड़े रहिये।
...
written by nirbhay singh, August 30, 2011
ये कमिश्नर कौन होता है अमर उजाला न पढ़ने का फतवा जारी करने वाला। औकात में रहे कमिश्नर।
...
written by sheela kumari, August 30, 2011
मैं पत्रकारिता में यह सोच कर आई थी कि कुछ नया करूंगी। पर, अब तो लगता है कि ट्यूशन पढ़ाना ही ठीक है। सही खबर को गलत साबित करने के लिए जो हथकंडे अपनाये जा रहे हैं, उससे तो मेरा पत्रकारिता से ही मन टूट गया है।
...
written by mohsin khan, August 30, 2011
अमर उजाला के संपादक मृत्युंजय कुमार जिंदाबाद रहें। मर्द संपादक ने क्या जोरदार खबर छापी है। ये जीडीए वाले तो चोर हैं हीं।
...
written by kamlesh raj, August 30, 2011
पूरी खबर पढ़ने के बाद यही लगता है कि सब सही कहा गया है। गोरखपुर के मंडलायुक्त ने लगता है कि पूरी खबर ध्यान से पढ़ी ही नहीं। पूरी खबर जीडीए के अफसरों से बात करके लिखी गई है। खबर में जीडीए के वीसी और प्रमुख सचिव (आवास) का बाकायदा वर्जन पढ़ने को मिला। खबर में भी अमर उजाला ने कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की है। पूरा समाचार जीडीए के वीसी रहे रामसिंह की एक गुप्त रिपोर्ट के आधार पर लिखी गई है, यह कोई भी समझ लेगा। मंडलायुक्त कौन होते हैं लोगों से अमर उजाला न पढ़ने का फतवा जारी करने वाले। कोई भी खबरनवीस अपने बीट में पांच अरब का घोटाला देखते हुये क्यों और कैसे चुप रह सकता है।
...
written by श्याम भारती, August 30, 2011
आनंद सही कह रहे हैं। एक अधिकारी की इतनी हिम्मत तभी होती है जब मीडिया के विभीषण उसे ताकत दे रहे हों। पहले गोरखपुर के पत्रकार ये तय करें कि ये विभीषण कौन है? फिर एकजुटता दिखाकर उस कमिश्नर को उसकी मर्यादा का अहसास कराना चाहिए। लखनऊ के पत्रकार संगठनों को भी इसे संज्ञान में लेना चाहिए और कमिश्नर की निंदा करनी चाहिए।
...
written by jitendra kumar, August 29, 2011
कमिश्नर महोदय को तुगलकी फरमान जारी करके उसे फिर वापस लेकर अपनी बेइज्जती से बचना चाहिए। इस खेल में बड़े लोग शामिल हैं। ये वो लोग हैं, जो जनता की नजरों में कुछ और हैं, रीयल लाइफ में कुछ और। प्रदीप फर्जी खबर लिखने वालों में से नहीं।
09454958146
...
written by anand singh, August 29, 2011
प्रदीप श्रीवास्तव को मैं गत छह साल से जान रहा हूं। प्रदीप जी ने जो खबर लिखी है, वह सोलहो आने सच है। कमिश्नर महोदय को तुगलकी फरमान जारी करके उसे फिर वापस लेकर अपनी बेइज्जती से बचना चाहिए। इस खेल में बड़े लोग शामिल हैं। ये वो लोग हैं, जो जनता की नजरों में कुछ और हैं, रीयल लाइफ में कुछ और। प्रदीप फर्जी खबर लिखने वालों में से नहीं। जब मैं अमर उजाला में था, तब जीडीए की महायोजना वाली खबर सबसे पहले प्रदीप ने ही ब्रेक की थी। तब भी काफी हाय-तौबा मचा था। जीपी श्रीवास्तव सेक्स स्कैंडल को के.के. उपाध्याय जी के जमाने में अमर उजाला ने ही ब्रेक किया था। तब रेलवे के जीएम के ऊपर भी अंगुलियां उठी थी। उन्होंने तो पूरी कोशिश की थी कि अमर उजाला का प्रकाशन ही गोरखपुर से कोरवा दें। जब इसमें नाकाम रहे तो रेलवे का विज्ञापन रोकने की कोशिश की। इसमें वो कुछ हद तक सफल भी रहे पर अंत में सुखबीर सिंह को गोरखपुर से जाना ही पड़ा। पूर्व राज्यमंत्री राजेश त्रिपाठी को बच्चा चोर कहने की हिम्मत इसी अखबार ने की थी। आज तक यह मसला हल नहीं हुआ है। मेरी जानकारी में अमर उजाला के संवाददाता के पास इसके सुबूत आज भी मौजूद हैं। तो, आप यह नहीं कह सकते कि अमर उजाला भ्रामक खबरें छापता है। यह नहीं मानना चाहिए कि मेरे मन में अमर उजाला प्रेम उमड़ आया है। जो प्रेम है, वो तो रहेगा ही पर एक प्रशासनिक अधिकारी का यह कहना कि लोग अमर उजाला न पढ़ें, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान ही है। इसे बेवकूफी इसलिए माना जाएगा क्योंकि कमिस्नर ने खुद माना है कि वह दूसरे अखबार वालों के कहने में आ गए थे। गोरखपुर के पत्रकार भली भांति जानते हैं कि ये दूसरे अखबार वाले कौन हैं। एक ही अखबार है और उसका भी एक पिटा हुआ मोहरा। रस्सी जल गई पर एंठन अभी बाकी है।

Write comment

busy