मेरठ में थमने लगा जनवाणी अखबार का तूफान

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: कास्ट कटिंग का काम शुरू : कई सप्लीमेंट बंद : देहात एडिशन खत्म : दाम बढ़ाने से पाठक नाराज : कई लोगों की जा सकती है नौकरी : मेरठ से सूचना है कि हाल में ही लांच हुए गाडविन ग्रुप के हिंदी दैनिक जनवाणी के प्रबंधन ने खर्चे घटाने का काम शुरू कर दिया है. इस क्रम में सबसे पहले अखबार के दो सप्लीमेंट बंद कर दिए गए. सिटी वाणी और आंगन वाणी नाम के दो सप्लीमेंट बंद कर इसे मुख्य अखबार में ही एक पेज में समाहित कर दिया गया है.

रवि वाणी और सिने वाणी नामक दो सप्लीमेंट निकल रहे हैं. खबर है कि शनिवार और रविवार के अखबार का दाम बढ़ाकर दो से तीन रुपये कर दिया गया है. इससे पाठकों में नाराजगी है और वे अपने को छला हुआ महसूस कर रहे हैं. जिन पाठकों ने जनवाणी की स्कीम ली थी, उनका कहना है कि प्रबंधन ने स्कीम में दाम बढ़ाने की बात नहीं कही थी. स्कीम लेने वाले कई पाठकों का कहना है कि उन्हें बैग देने की बात हुई थी पर अभी तक बैग नहीं मिले. सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन ने कागज की क्वालिटी भी घटा दी है. सरकुलेशन, प्रिंटिंग और कागज के जरिए भी दाम घटाने की कवायद की जा रही है.

सेलरी पर भारी भरकम खर्च पर भी प्रबंधन की नजर है और इसे सीमित करने की तैयारी है. इसी कारण माना जा रहा है कि कई लोगों की छंटनी हो सकती है. प्रबंधन ने देहरादून समेत कई और जगहों पर एडिशन लांच करने की घोषणा की थी लेकिन फिलहाल ये प्रोजेक्ट अभी शुरू नहीं हो रहे हैं. संभव है कि मेरठ से ही देहरादून व अन्य जगहों पर सीमित मात्रा में अखबार भेजकर काम चला लिया जाए और इस तरह से खर्चे बचाए जाएं.

अभी तक मेरठ में सिटी और देहात, दो अलग एडिशन निकलते थे. लेकिन देहात एडिशन को खत्म कर उसे सिटी एडिशन में ही समाहित कर दिया गया है. ऐसा करके प्रिंटिंग कास्ट, कागज के कास्ट में तो कमी की ही गई है, यह संकेत भी दिया गया है कि आने वाले दिनों में ऐसी कवायद और तेज हो सकती है. जनवाणी के बैक टू पैवेलियन होते देख मेरठ के जमे जमाए अखबारों की जान में जान आ गई है.

हाल फिलहाल जनवाणी से कई लोगों ने नाता तोड़ा है जिसमें सबसे प्रमुख सरकुलेशन के मोर्चे को देख रहे इंद्रजीत चौधरी हैं. इंद्रजीत को मेरठ के मार्केट की अच्छी समझ है और वे जागरण में लंबे समय तक रहे हैं. उन्हें जागरण ने अपने पाले में फिर से करके जनवाणी को बड़ा झटका दिया था. इधर, रेवेन्यू के मोर्चे पर भी जनवाणी को कोई खास सफलता नहीं मिल रही है. इससे प्रबंधन परेशान है कि आखिर कब तक वह भारी भरकम खर्च को वहन करेगा. अखबार की ब्रांडिंग के लिए होर्डिंग से लेकर प्रचार प्रचार तक में काफी पैसा झोंका गया. अब सारी कवायद को सीमित किया जा रहा है.

मेरठ में लगी प्रिंटिंग मशीन से करीब एक लाख कापियां प्रकाशित की जा रही हैं. इससे ज्यादा छापने की सामर्थ्य मशीन में नहीं है. सूत्रों का कहना है कि सरकुलेशन को अब नियंत्रित करके भी खर्चे कम करने की तैयारी है क्योंकि एक समय के बाद जितना ज्यादा अखबार बिकता है, उतना ही ज्यादा घाटा बढ़ता है. कम समय में जनवाणी ने जो अच्छी खासी सफलता मेरठ में हासिल की, उससे प्रबंधन प्रसन्न तो हुआ लेकिन भारी भरकम खर्च देख कर यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी. प्रबंधन की पूरी गणित अब कम खर्चे में ज्यादा से ज्यादा जगहों तक अखबार पहुंचाने की है.


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Comments (4)Add Comment
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written by gaurav, September 04, 2011
Sardar Brothers ki kab tak ankh band rehegi Ek din to khuleni hi thi ji dheere dhere khool rahi hai. Anadieo ko moti pagaar per rakh kar unke ke pair mai kulhari mar dee hai .kyoki etani moti pagaar unehe koi doosara akhabar nahi de sakta.
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written by gaurav garg, September 02, 2011
haan aakro ka khel hee calta hai.malikan ko bargala kar DNE,NE SR.NE banaye ja rahe hain.jay jagran...jai hindustan....
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written by raja, September 02, 2011
गुरु यह स्तिथि लघभग हर अखबार की हैं ,अब आप सब को छोड़ो आगरा में हिन्दुस्तान को ही पकड़ लो जब से आया हैं साला लघभग स्कीम पर ही चल रहा हैं लाखो की स्कीम बाटकर ही बेचारा केबल छे हजार पांच सो कॉपी ही बेच पा रहा हैं , अगर मेरी बात का विश्वाश नहीं तो सुबह सेंटर पर जाकर देख लो कितनी कॉपी वापसी हो रही हैं और कितनी कॉपी खप रही हैं और कितनी डेली रद्दी हो रही हैं / जय हिंद जय हिन्दोस्तान/ सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा लगातार पित रहा हैं आगरा में हिन्दुस्तान हमारा हमारा सारे जहा से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा हमारा
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written by tarkesh kumar ojha , September 02, 2011
sachmuch bara ajeeb hai akhbar ka khel, jisme kabhi malikan akhbar ko barhane ko utsahit dekhte hain, jiske liye karmchari ji jan laga kar kam karte hain, lekin achanak ghate ki baat kah kar hath samet liya jata jhain. pata nahi aaisa kyon kiya jata hai.
tarkesh kumar ojha, kharagpur (west bengal) contact_ 09434453934

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