''लुटने वाली जनता से लूट करा रहा राजस्‍थान पत्रिका''

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यशवंत जी आपको एक इमेज फाइल भेज रहा हूं. वैसे तो सभी अखबारों में समाचारों एवं भाषा की गुणवत्‍ता में कमी आई है. पर पत्रिका की भाषा एवं समाचारों की गुणवत्‍ता एवं स्‍तर में जो गिरावट पिछले तीन-चार सालों में आई है, वैसी तो देश की राजनीति में भी नहीं आई है. राजस्‍थान पत्रिका ने आज जोधपुर संस्‍करण के फ्रंट पेज पर पेट्रोल की बढ़ोत्‍तरी को लेकर एक खबर छापी है. इस खबर को जनता के पक्ष को ध्‍यान रखते हुए लिखा गया है.

परन्‍तु जब आप इसकी हेडिंग देखेंगे तो पूरा का पूरा मामला ही बदल जाता है. फ्रंट पेज पर छपा है ''सरे बाजार लूटेगी जनता''. इसका सीधा मतलब हुआ कि सरे बाजार अब जनता लूट करेगी. जबकि समाचार का जो आशय है उसके हिसाब से ''सरे बाजार लुटेगी जनता'' होना चाहिए था. ये उन गुलाब कोठारी महोदय का अखबार है, जिनके पिता वेद-विद्वान थे और जो स्‍वयं भाषा के संस्‍कार देने का बीड़ा उठाकर अपने अखबार में 'अक्षर यात्रा' जैसा स्‍तम्‍भ देते हैं. अखबार में लीड खबर में ऐसी गलती वो भी हेडिंग में. धन्‍य है पत्रिका और पत्रिका के पत्रकार और मालिक.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.


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