प्रभात खबर में काम करने वाले मौका मिलते ही क्यों छोड़ जाते हैं साथ?

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: सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है इस अखबार में : बिहार-झारखंड के लीडिंग न्यूजपेपर प्रभात खबर में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. यहां काम करने वाले परेशान हैं. एक तो सेलरी कम, उपर से काम का जबरदस्त बोझ. तीसरे चरम आंतरिक राजनीति. चौथा नौकरी जाने का भय. इन्हीं सब कारणों से प्रभात खबर के कर्मी मौका मिलते ही संस्थान को छोड़ देने में भलाई समझते हैं.

भागलपुर यूनिट में जो कुछ हो रहा है वह प्रभात खबर प्रबंधन के लिए खतरे की घंटी है. कई झटकों को झेल चुका प्रभात खबर अब जिस बड़ी चुनौती से मुखातिब है, उससे पार पाना उसके लिए अब तक का सबसे बड़ा चैलेंज है. हिंदुस्तान और दैनिक भास्कर जैसे अखबार हर कीमत पर प्रभात खबर को खा जाना चाहते हैं. ज्यादा संसाधन और ज्यादा प्रोफेशनल तौर-तरीकों से लैस ये दोनों अखबार अब प्रभात खबर की कमर पर वार कर रहे हैं. बेहतरीन लोगों को तोड़कर अपने पाले में कर रहे हैं. दुर्भाग्य यह कि प्रभात खबर प्रबंधन अपने यहां काम करने वालों की कीमत नहीं समझ रहा. सबके प्रति एक तटस्थ भाव रखा गया है. प्रत्येक कर्मी की समस्याओं को सुनने-समझने का कोई मैकेनिज्म डेवलप नहीं है. कोरी भाषणबाजी और कोरे आश्वासनों से कब तक काम चलाया जा सकता है.

सूत्रों का कहना है कि प्रभात खबर प्रबंधन अपने प्रत्येक कर्मी, प्रत्येक संपादक, प्रत्येक मैनेजर पर शक करता है. इस कारण कोई भी तनावमुक्त होकर काम नहीं कर पाता. प्रबंधन प्रत्येक आदमी से उच्चतर आदर्शों के पालन की उम्मीद करता है पर खुद वह संसाधन और सुविधा देने के नाम पर न्यूनतम से आगे नहीं बढ़ना चाहता. ऐसा भी नहीं कि प्रभात खबर के पास पैसा नहीं है. प्रभात खबर के पास संसाधन और पैसा पर्याप्त है, हर साल यह अखबार करोड़ों का प्राफिट कमाता है पर प्राफिट का छोटा हिस्सा भी कर्मियों के भले पर खर्च नहीं किया जाता. जो लोग शीर्ष पर लंबे समय से काबिज हैं, उनकी नजर में निचले स्तर पर काम करने वाले कीड़े-मकोड़ों से ज्यादा नहीं है.

भड़ास4मीडिया के पास आई एक हालिया मेल में प्रभात खबर के अंदर की कुछ कहानी का जिक्र किया गया है. इस मेल में उल्लखित प्रमुख बातों पर प्रभात खबर प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए उन्हें मेल किया गया पर उधर से मेल का कोई जवाब नहीं आया. मेल इस प्रकार है-

'प्रभात खबर में अफरा-तफरी : झारखण्ड,  बिहार और बंगाल के प्रमुख अखबार प्रभात खबर में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. लगभग एक वर्ष पहले आये कोर्पोरेट एडिटर राजेंद्र तिवारी ने प्रधान संपादक हरिवंश जी को सुझाव दिया है की यदि अखबार को और आगे ले जाना है तो बड़े पैमाने पर लोगों को बदल दें. और हरिवंश जी ने उनका यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. राजेंद्र तिवारी और विनय भूषण ने यह सूची बनाई है और उसे हरिवंश जी को सौंप दिया है. खबर है कि इसी बहाने राजेंद्र तिवारी प्रभात खबर में महत्वपूर्ण पदों पर अपने लोगों को बैठाना चाहते हैं. इसी क्रम में भागलपुर से चंदन शर्मा को हटा कर उनके स्थान पर अजीत सिंह को लाना चाहते हैं. अजीत सिंह को राजेंद्र तिवारी ही लेकर आये हैं.  तिवारी इसी काम के लिए अभी भागलपुर में ही हैं. इसके अलावा कई स्थानीय संपादकों को भी बदलने की योजना है. खबर है कि कोलकाता के कौशल किशोर त्रिवेदी भी बदले जा सकते हैं. उनके स्थान पर धनबाद से अनुराग कश्यप को भेजा जा सकता है. अनुराग स्वयं प्रकाश के करीबी माने जाते हैं और स्वयं प्रकाश राजेंद्र तिवारी के रवैये से नाराज चल रहे है. तिवारी एक तीर से दो शिकार करना चाहते हैं. तिवारी यह भी चाहते हैं कि रांची के जमशेदपुर से रणजीत को देवघर और संजय मिश्र को जमशेदपुर भेजा जाए. रांची के स्थानीय संपादक विजय पाठक के स्थान पर ब्रिजेन्द्र दुबे को रांची का स्थानीय संपादक बनाया जाये. ब्रिजेन्द्र दुबे को तिवारी ही हिंदुस्तान से लेकर आये हैं. सिर्फ स्थानीय संपादक के स्तर पर नहीं, निचले स्तर पर भी लोगों को बदलने की योजना है. जमशेदपुर के जयनंदन शर्मा को गया भेजा जा सकता है. रांची में भी डेस्क और रिपोर्टिंग के कई वरीय लोगों को बदला जा सकता है. रांची से जीवेश रंजन सिंह को भी किनारे करने के योजना है. तिवारी चाहते हैं कि उन्हें कोई नया प्रोडक्ट निकाल कर किनारे कर दिया जाये और उनके स्थान पर आलोक सिंह को रुरल का इंचार्ज बना दिया. जो व्यक्ति (आलोक) एक मामूली सब एडिटर बन्नने की याग्यता नहीं रखता, उसे तिवारी उप समाचार संपादक बना कर लाये हैं. इस सूचना पर प्रभात खबर में अफरा-तफरी की स्थिति है. जिन लोगों को बदलने की योजना है, उनमें से कई ऐसे हैं, जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थिति में भी प्रभात खबर का साथ नहीं छोड़ा. पर राजेंद्र तिवारी और अब हरिवंश जी के नजर में ऐसे लोग किसी काम के नहीं हैं जो वर्षों से एक ही स्थान पर जमे है. इस प्रस्ताव ने हिंदुस्तान और भास्कर को एक मौका दे दिया है.  झारखण्ड में भास्कर वहां के सबसे मजबूत अखबार प्रभात खबर को तोड़ नहीं पाया था. हरिवंश जी और राजेंद्र तिवारी के फैसले से भास्कर और हिंदुस्तान का काम आसान हो जायेगा. पिछले दिनों सुधीर अग्रवाल रांची आये थे. उन्होंने अपनी टीम पर नाराजगी जताई थी और निर्देश दिया था की दूसरे अखबार से निचले और ऊपर के स्तर पर स्टाफ लायें और यहाँ से बेकार लोगों को हटायें. अब उनकी रह आसान हो गयी लगती है.''

यह तो था भड़ास4मीडिया के पास पहुंचा एक गोपनीय पत्र. हफ्ते भर पहले आए इस पत्र में भागलपुर में जो कुछ अब हो रहा है, उसकी आशंकाएं व्यक्त कर दी गई थीं. इसी तरह के कई फीडबैक भड़ास के पास पहुंचे हैं. अगर आपके पास भी प्रभात खबर में चल रहे अंदरुनी उठापटक को लेकर कोई खबर, जानकारी या चर्चा हो तो हमतक पहुंचाएं, नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए या फिर This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर मेले के जरिए. आपके नाम और पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा. हमारी कोशिश रहेगी कि हम झारखंड और बिहार में चल रहे अखबारी युद्ध से होने वाले उथल-पुथल की छोटी से छोटी जानकारियां आप तक पहुंचाएं.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया


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Comments (28)Add Comment
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written by amit dj, November 09, 2011
tiwari g aap lage rahe accha karne wale ki safalta se sab jalte hai kyoki aapne saalo se mathadheesh bane aur prabhat khabar k naam ko bechne walo ko dara diya hai isi vajah se aise comment aapko padhne ko mil rahe hai
lekin aap lage rahe kyo ki prabhat khabar k shubhchintako ko pata hai ki akhbar pahle se behtar hua hai. prabhat khabar patna k kameeno ki vajah se ye bloging ho rahi hai kyoki bhadas wala patna office me aata jata rahta tha.
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written by RAJESH CHAUHAN, September 25, 2011
Haribansh babu ke pas patkarita ka lamba anuvab hai wo mere khyal se ki pechhe ki jo pahchan hai wo patrkarita ki he den hai.jb maine unka interview jo ki kisi paper me aaya tha padhkar n jane kyon mujhe aisa laga ki itni jyada anuvab rahne ke bad v uhen aur anuvab ki aawshykta hai.sampadak aise pad par aasin ek aise responsible person dwara ek reporter ko duniya ka failure person samjhna sova nahin ai.bas thori kalpna karne ki aawsykta hai aaj jis tarah se print media ka swarup badal raha hai ab print media city aur metro city se dur rural area me dastak de rahi hai wahin pathak ke dwara v city aur metro city ke khabar ke bajay apne village aur kasbon ki khabar ko jyada ahmiyat de ja rahi hai .Aise me khaskar rural area ka jo v reporter hai jo ki bina kisi mehntana ka kam karte hai mere khyal se we wahin hote hain jinhen wo duniya ka sbse failure person samjhten hai .yadi kaha jay ki corruption aur sosan sabse jyada bhadhawa dene wala media hi hai to jyada sarthak hoga.ek nichle level ke reporter jo ape uper ke coorupt aur sosan ka sikar hoten hain lok lajja ke vay se kuchh v bol aur kar pane me asmarth hote hai halanki unhen kgud dusre ka is prakar ka khabar likhne me adhik aanand ka anuvab kar rahen hoten hai.
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written by prabhat kabhar bhagalpur, September 24, 2011
prabhat kabhar aaj bhi no 1 hai kal bhe hoga magar 5000/6000/7000/7500 ke payment mai aap kitna kam kara logai log aap sai hi kamayagaya na ajit sing kai janai sai to pura bhagalpur unit khus hai wo kamina jab tak tha sirf rajniti hi hoto theagar badalna hai to pura sistam ko badal dalo,jab join kia tha to pata tha ki samaz ka aina hoga BAHAR SAI EMPOLY LANAI SAI ACHA HAI JYDAI PAISA DE KAR HOUSE KAI LOGO SAI SAHI TARIKIA SAI KAM LANAprabhat kabhar lakin khud ka aina nahi ho saka ,
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written by prabhat kabhar bhagalpur, September 24, 2011
Soory Dosto magar chandan sharma yk accha Inssan hi nahi accha sampadak bhe the.agar Bhagalpur mai jo kuch Hua Wo mahaj yk mazak hai .Ajit singh jaisa neech Kamina aur Ganda /Gandhu Insan Pura unit mai koi nahi thaa.Prassana singh Prabhat kabhar ke sahar ki mazboot pilaar tha ,N p singh yek alag kism ka adami hai , wo appni team lai kar mast hai , t p singh unit managar ho gaya kismat ka bhosara hai , wahi sanjay singh yek larki ( KHUSBHU) KAI SATH MASTI MAR RAHA HAI KOI BHI HARIWANSH JEE KO BATTA NAHI HAI WAH RAI PRABHAT KABHAR BHAGALPUR
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written by wwwwwwww, September 24, 2011
bhaskar bihar me kab tak aayega?ye koi bata de....rajendra tiwari do muhi baatein karte hai.
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written by Anirudh Mahato , September 24, 2011
Kisi bhi Bewasai chalane ke liye apne karmiyon par biswash rakhna zaruri hota hai. biswash gaya to bewasai bhi gaya.
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written by ajeet, September 23, 2011
Bhaskar ki nakal karte rahen, jaroor harivansh jee ki kurshi tak pahunch jayenge. jai tiwari baba ki jay.
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written by naveen, September 23, 2011
pata nahi haribanshjee ko kya ho gaya hai. ek-do sall pahle bhi prabhat khabar men wohi log the, jinhone is paper ko bulandio par pahuchay, lekin rajendra tiwary ke aane ke bad wohi log ab kharab ho gaye hain. tiwarijee, brijendra dubey hum niwala, hum pyala ke sathi hain. har roj inki mahphil bhi jamti hai. haribansh jee ko pahle sub kuch pata kar lena chahiye. shyad unhe pata bhi lag hi gaya hoga, kyonki patrikajagat men sabhi jante hain ki unka source kitna strong hai. iske bad bhi agar haribanshjee nahi samajhte hain to, bhagwan bhi is akhabar ko nahi bacha sakega.
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written by अनुराग , September 23, 2011
यह बात तो बिलकुल १६ आने सच है की मिस्टर एन पी सिंह अपने द्वारा लाये लोगो को ही तव्वज्जो देते हैं- उनके लाये लोग तो शुरुआत में प्रभात खबर के साथ साथ दूसरी जगह भी कम कर रहे थे..जिनमे एक नाम नीरज सिंह है..जो की पोल खुलने के डर से जल्दी ही निकल लिए. वैसे जितने लोग एन पी लाये थे वो अधिकाँश भाग चुके हैं.. इन सभी चीजों के बीच बस पुराने लोग पिस रहे हैं..काम अभी भी पुराने लोग ही करते हैं और नाम एन पी जी कमाते हैं...कुल मिलकर पुराने लोग गुलाम बन कर रह गए हैं..
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written by Guru Baba, September 23, 2011
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written by Guru Baba, September 23, 2011
Are sabkuch thik kaise chal sakta hai, bihar me to circuolation bigarne ka pura intjam ho gaya hai P.K. Kar ko bahal kar ke wo paisa le rahe hai prabhat khabar se aur aisa lagta hai kaam kar rahe ho hindustan ke liya......................wah re managment.
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written by manish, September 23, 2011
ye kuch prabhat khabar se nikale huwai logo ki bhadas hai.isme koi sachai nahi hai.Isme wo akhbar jo prabhat khabar se healthy competition kar nahi paaye wo below belt jaa kar akhabar mai bhram create kar rahe hai.

Iss khabar mai koi sachai nahi hai.2-4 din mai sabkuch saaf ho hi jaayega.
Yashwantji aapse sirf itna aagrah hai ki aise frustrated logo ke dusprachar ka maadhayam nahi bane.
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written by abhimanyu, September 23, 2011
यशवंत भाई
हरिवंश जी पर से प्रभात खबर के मालिकों का भरोसा उठ चुका है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जिस राजेंद्र तिवारी को कारपोरेट एडीटर बना कर लाया गया है, उनको वह पसंद नहीं करते। राजेंद्र तिवारी पसंद किये जाने लायक संपादक हैं ही नहीं। जम्मू मे मैं उनके साथ काम कर चुका हूं और दावे के साथ कह सकता हूं कि उनमें रत्ती भर भी खबर की तमीज नहीं है। वह खोखले इंसान हैं जो पूरा वक्त फोन कर कर के एक-दूसरे की पोजीशन को समझते हैं। इसी चुतियापे में भास्कर और बाद में हिंदुस्तान से उन्हें किक आउट किया गया। दरअसल, प्रभात खबर को हरिवंश जी ने जिस तरीके से संवारा-संभाला है, वह परिपक्वता राजेंद्र तिवारी में न तो है, न हो सकती है। ये आदमी खाऊ-पकाऊ है और प्रभात खबर का बैंड बजा देंगा। मैं बिहार में अखबार की गति देख कर परेसान हूं। परेशान इसलिए कि मैं प्रभात खबर में ही काम कर रहा हूं। अखबार का प्रसार घटता जा रहा है। हरिवंश जी, अगर आप यूं ही चुपचाप बैठे रहे तो आपकी विरासत, आपके ही आंखों के सामने खत्म हो जाएगी। दो काम कीजिए। पहला-राजेंद्र तिवारी को विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर हटाइए और हिंदुस्तान में बैठे अश्क जी को लाइए। अश्क जी के सामने राजेंद्र तिवारी बालक हैं। अश्क जी ही प्रभात खबर को सुधार सकते हैं, संभालने के लिए आप तैयार रहिए।
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written by jai kumar, September 23, 2011
ek baat aur he, prabhat khabar walon sawdhan rehna, dusre akhbaron ke log aap se bhay khaye huye hai isliye tamam juthi bate uchhalene me lage hai aur lage rehenge, inki baton me na aana, apna kaam karte reho...ye to chahenge hi ki aap sab log jhadadne lage.
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written by jai kumar, September 23, 2011
dukh hota hai ki patrakar sathi mithya charchaon par samay nasta karte he...achchayee-buraayee to har insaan me hoti hai lekin prabhat khabar me bahar se bhale rajnit aur anban dikhayee de rahe ho lekin jis akhbaar me harivanshji jaisa vision rakhne wala vyakti ho, anuj sinha, swayamprakash, vinai bhushan, kaushal, vijai pathak, np singh, ranjeet, rajendra tiwari, shakeel akhtar, kislay jaise diggaj patrakaer ho, us akhbaar ka koi bal-banka bhi nahe kar paya aur na kar payenge.In logon ke beech bhale bhedbhav rehta ho lekin jab akhbaar ke prati nishtha aur pratishta ki baat aati he to ye sab log milkar ek aisha shashtra ban jaate he, jo roj akhbaar me dikhta he aur prtiyogita ko dhool chatata rehta he.
dusri taraf, prabandha bhi gonka ji aur dattajee jaise log sambhal rehe hai jinhone apna sarvasva prabhat khabar ko arpit kar rakha...in longo ne purane mulyon ko banaye rakhte huye jo nayi baate laagu kar rhe hai,unhi ka natija hai ki prabhat pichhale do saal me itni pragati ki he jitni dusre akhbar ek dashak me bi nahe kar pate. Inhe karno se media industry ke diggaj log, chahe production ho, circulation ho, hr ho, accounts ho ya editorial ho, inki team me judte jaa rahe he. Aisi samarpit team aur professional yadi koi badlav bhi lati he to vo unnati ka marg he prashasht karega.
isliye meri aap sab mitron se prarthna he ki prabhat khabar ki is leader team ke naye prayongo se seekh le kyunki 25 sall se inke har prayiog safal he rahe hai....ye team dimag se hi nahe dil se bi kaam karne wali team he, mithyalap aur mithya charchaon se inka baal bi banka nahi hone wala.


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written by surendra, September 23, 2011
प्रभात खबर पत्रकारिता में फैली तमाम बुराईयों की जननी है। अखबार नहीं आंदोलन का नारा देने वाले इस समाचारपत्र ने झारखंड में सबसे ज्यादा गंदगी फैला रखी है। आदरणीय हरिवंशजी लंबी-चौड़ी बातें करते हैं। हाल ही में उन्होंने पत्रकारों से अपनी संपत्ति की घोषणा करने की सलाह दी। मेरी राय में उन्हें खुद से इसकी पहल करनी चाहिए। हाल के दिनों में रांची में सबसे ज्यादा कार प्रभात खबर के संवाददाताओं ने खरीदी है। दलाली और कमीशनखोरी सबसे ज्यादा यही करते हैं। आंदोलन के नाम पर उषामार्टिन कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए अखबार निकलता है। देरसवेर पाठक भी इसे समझ रहा है। ये घड़ाम से गिरेंगे। शुक्र मनाइए कि राज्य में मजबूत सरकार नहीं बन रही है जिस दिन कोई दमदार व्यक्ति झारखंड का सीएम बना इस अखबार की बोलती बंद हो जाएगी। हाल ही में लौह अयस्क फाइंस के निर्यात क नीति बनवाकर प्रभात खबर ने अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाने की पूरी तैयारी कर ली थी। वह तो भला हो दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर का। दोनों अखबारों ने गोरखधेधे का पर्दाफाश किया और सरकार को आदेश वापस लेना पड़ा।
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written by rk sing, September 23, 2011
आपकी खबर हिला देने वाली है. बदलाव जरूरी है. स्वयंप्रकाश का नाराज होना खतरे की घंटी है. राजेंद्र तिवारी जी कहीं भास्कर के संपर्क में अब भी तो नहीं है? आपने आशंका जताई है कि भास्कर प्रभात को तोड़ने में लगा है. यह काम अपने सुझावों के जरिये वे बखूबी कर रहे हैं. अनुराग को कोलकाता भेजने की बात हजम नहीं होती. कौशल कोलकाता में कूछ नहीं उखाड़ पाये तो धनबाद में क्या कर लेंगे. कौशल को आमेप्रकाश अशक जी कोलकाता लाये. अश्क जब कोलकाता प्रभात खबर में थे तो कौशल उन्हें घर का बना खीर का सेवन कराते थे. धनबाद में यह जोड़ी बनी तो प्रभात खबर का डूबना तय है. मगर धैय रखिये, हरिवंश जी शायद नकारात्मक बदलाव नहीं होने देंगे.
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written by sanjeev, September 22, 2011
प्रभात खबर अगर बचा हुआ है तो मठाधीशों के ही कारण. नए लोग तो माल लुटने आये है. लुटेंगे और चल देंगे.
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written by ameresh kaushik, September 22, 2011
lagta hai prabhat khabar me rajendra tiwari ka sikka chalne laga hai. hariwansh jee retire hone wale hain... nahin to unke chelon ko hatane kee yojna banana asaan nahi tha. khabar bataeye kab chief editor banenge tiwarijee....
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written by राघव ध्वनि, September 22, 2011
हरिवंशजी. अगर आपने ऊपर दिया हुआ बदलाव का कार्यक्रम नहीं बनाया है, तो बना दीजिए। ठस हो चुके लोगों को इधर उदर करेंगे तो आपका प्रभात खबर नए संवेग को प्राप्त कर लेगा जो मौजूदा प्रतियोगिता में आपके प्रभात खबर को नई गति प्रदान करेगा।
यशवंत जी, भले ही आपने प्रभात खबर के खिलाफ यह पोस्ट दी हो लेकिन प्रभात खबर को आपका अहसानमंद होना चाहिए कि आपके जरिए उसको इतना बढ़िया आइडिया मिला।
वैसे मैं बता दूं कि मैं भी प्रभात खबर में काम करता हूं। सही नाम इसलिए नहीं दे रहा कि रांची के स्थानीय संपादक और झारखंड के वरिष्ठ संपादक मिलकर मुझे निपटा न दें। इन दोेनों को बदला जाना चाहिए। यदि नहीं बदला गया तो प्रभात खबर ठस अखबार बनकर पिछड़ जाएगा।
यसवंतजी, आपसे मेरा आग्रह है कि यदि प्रभात खबर के मठाधीश हिलाए जाएं तो इसकी खबर भी जरूर छापना।
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written by R Kushwaha, September 22, 2011
Aisa nahi, Prabhat Khabar aj ke date me uppar lable me paisa khub de rahi hai. Yaha kaam v ache tarike se chal raha hai. yaha familyar mahaul me kaam hota hai jo ki or kahi nahi melega.
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written by himashu, September 22, 2011
chaliye tiwari ji ne der se hi sahi but doorust kadam uthaya hai. yah kadam unhe or pahle uthan chahiye tha
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written by Ashok Kumar, September 22, 2011
This is because the exploiting policy of Harivansh jee, who never wanted to provide proper salary to the staff. Even the senior people on the post like Resident Editors and News Editors were getting 10 to 15 thousand only during soe years ago, Thanks to the competitors who compelled the prabhat Khabar Management to increase some salary which is still very low.
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written by दिनेश सिंह, September 22, 2011
दिल्ली प्रभात खबर के दफ्तर में भी राजनीति शुरू हो गई है। क्योंकि इलेक्ट्रोनिक मीडिया में काम करने वाले लोग काम कम राजनीति ज्यादा करते हैं। इसी दिशा में एन पी सिंह ने एक कदम बढ़ा दिया है , और यहां से ब्यूरो चीफ को किनारे करने में जुट गए है ...जिनके लाए गए लोग ही आज भी प्रभात खबर में टिके हुए हैं....पुराने लोगों को कम पैसा दिया जा रहा है और नए लोगों के मुंहमांगी कीमत अदा की जा रही है....गुटबाजी तेज हो गई है...पुराने लोग को किनारे किया जा रहा है और नए लोग को तरजीह दी जा रही है....
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written by rajesh, September 22, 2011
ye to 110 percent sahi hai prabhatkhabar ke kuch purane log scrap mall ho gaye ho. enhe bus apni naukri ki chinta hote rahti hai. ye log naye logon kop parmot nai karna chahte hain har koi enhe comptitor hi najar aata hai jo ho raha hai wo sahi hai yah or pahle hona chahiya tha
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written by rajesh, September 22, 2011
really prabhatkhabar me kai purane log scrap mall hain. enhe hatana jaruri hai. ye log naye logon ko parmot nahi karte enhe apni naukri ki hi padi rahti hai
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written by sushant chandra, September 22, 2011
mai bi PK se pichhale 12 saal se juda hu. PK jaise pratishthit sansthan aur Harivanshji jaise yashashvi sampadak ke baare me aisi jhuthi baaten padhkar dukh hua. Pk ne kuchh mah pehle hi prabandhan ke Apne purane logon ko pherbadal karke achchi growth di hai aur paise bi achche khase badaye hai.
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written by राजेश शर्मा, September 22, 2011
यशवंत जी. राजेंद्र तिवारी और विनय भूषण दोनों प्रभात खबर को खा जाएंगे. मैं प्रभात खबर के साथ पांच वर्ष जुड़ा रहा हूं और 15 वर्ष के अपने पत्रकारिता के करियर में इतना घटिया आदमी नहीं देखा. हरिवंश जी सब जानते हैं, लेकिन जाने क्यों आंखें मूंदे रहते हैं

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