प्रभात खबर में काम करने वाले मौका मिलते ही क्यों छोड़ जाते हैं साथ?

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: सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है इस अखबार में : बिहार-झारखंड के लीडिंग न्यूजपेपर प्रभात खबर में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. यहां काम करने वाले परेशान हैं. एक तो सेलरी कम, उपर से काम का जबरदस्त बोझ. तीसरे चरम आंतरिक राजनीति. चौथा नौकरी जाने का भय. इन्हीं सब कारणों से प्रभात खबर के कर्मी मौका मिलते ही संस्थान को छोड़ देने में भलाई समझते हैं.

भागलपुर यूनिट में जो कुछ हो रहा है वह प्रभात खबर प्रबंधन के लिए खतरे की घंटी है. कई झटकों को झेल चुका प्रभात खबर अब जिस बड़ी चुनौती से मुखातिब है, उससे पार पाना उसके लिए अब तक का सबसे बड़ा चैलेंज है. हिंदुस्तान और दैनिक भास्कर जैसे अखबार हर कीमत पर प्रभात खबर को खा जाना चाहते हैं. ज्यादा संसाधन और ज्यादा प्रोफेशनल तौर-तरीकों से लैस ये दोनों अखबार अब प्रभात खबर की कमर पर वार कर रहे हैं. बेहतरीन लोगों को तोड़कर अपने पाले में कर रहे हैं. दुर्भाग्य यह कि प्रभात खबर प्रबंधन अपने यहां काम करने वालों की कीमत नहीं समझ रहा. सबके प्रति एक तटस्थ भाव रखा गया है. प्रत्येक कर्मी की समस्याओं को सुनने-समझने का कोई मैकेनिज्म डेवलप नहीं है. कोरी भाषणबाजी और कोरे आश्वासनों से कब तक काम चलाया जा सकता है.

सूत्रों का कहना है कि प्रभात खबर प्रबंधन अपने प्रत्येक कर्मी, प्रत्येक संपादक, प्रत्येक मैनेजर पर शक करता है. इस कारण कोई भी तनावमुक्त होकर काम नहीं कर पाता. प्रबंधन प्रत्येक आदमी से उच्चतर आदर्शों के पालन की उम्मीद करता है पर खुद वह संसाधन और सुविधा देने के नाम पर न्यूनतम से आगे नहीं बढ़ना चाहता. ऐसा भी नहीं कि प्रभात खबर के पास पैसा नहीं है. प्रभात खबर के पास संसाधन और पैसा पर्याप्त है, हर साल यह अखबार करोड़ों का प्राफिट कमाता है पर प्राफिट का छोटा हिस्सा भी कर्मियों के भले पर खर्च नहीं किया जाता. जो लोग शीर्ष पर लंबे समय से काबिज हैं, उनकी नजर में निचले स्तर पर काम करने वाले कीड़े-मकोड़ों से ज्यादा नहीं है.

भड़ास4मीडिया के पास आई एक हालिया मेल में प्रभात खबर के अंदर की कुछ कहानी का जिक्र किया गया है. इस मेल में उल्लखित प्रमुख बातों पर प्रभात खबर प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए उन्हें मेल किया गया पर उधर से मेल का कोई जवाब नहीं आया. मेल इस प्रकार है-

'प्रभात खबर में अफरा-तफरी : झारखण्ड,  बिहार और बंगाल के प्रमुख अखबार प्रभात खबर में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. लगभग एक वर्ष पहले आये कोर्पोरेट एडिटर राजेंद्र तिवारी ने प्रधान संपादक हरिवंश जी को सुझाव दिया है की यदि अखबार को और आगे ले जाना है तो बड़े पैमाने पर लोगों को बदल दें. और हरिवंश जी ने उनका यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. राजेंद्र तिवारी और विनय भूषण ने यह सूची बनाई है और उसे हरिवंश जी को सौंप दिया है. खबर है कि इसी बहाने राजेंद्र तिवारी प्रभात खबर में महत्वपूर्ण पदों पर अपने लोगों को बैठाना चाहते हैं. इसी क्रम में भागलपुर से चंदन शर्मा को हटा कर उनके स्थान पर अजीत सिंह को लाना चाहते हैं. अजीत सिंह को राजेंद्र तिवारी ही लेकर आये हैं.  तिवारी इसी काम के लिए अभी भागलपुर में ही हैं. इसके अलावा कई स्थानीय संपादकों को भी बदलने की योजना है. खबर है कि कोलकाता के कौशल किशोर त्रिवेदी भी बदले जा सकते हैं. उनके स्थान पर धनबाद से अनुराग कश्यप को भेजा जा सकता है. अनुराग स्वयं प्रकाश के करीबी माने जाते हैं और स्वयं प्रकाश राजेंद्र तिवारी के रवैये से नाराज चल रहे है. तिवारी एक तीर से दो शिकार करना चाहते हैं. तिवारी यह भी चाहते हैं कि रांची के जमशेदपुर से रणजीत को देवघर और संजय मिश्र को जमशेदपुर भेजा जाए. रांची के स्थानीय संपादक विजय पाठक के स्थान पर ब्रिजेन्द्र दुबे को रांची का स्थानीय संपादक बनाया जाये. ब्रिजेन्द्र दुबे को तिवारी ही हिंदुस्तान से लेकर आये हैं. सिर्फ स्थानीय संपादक के स्तर पर नहीं, निचले स्तर पर भी लोगों को बदलने की योजना है. जमशेदपुर के जयनंदन शर्मा को गया भेजा जा सकता है. रांची में भी डेस्क और रिपोर्टिंग के कई वरीय लोगों को बदला जा सकता है. रांची से जीवेश रंजन सिंह को भी किनारे करने के योजना है. तिवारी चाहते हैं कि उन्हें कोई नया प्रोडक्ट निकाल कर किनारे कर दिया जाये और उनके स्थान पर आलोक सिंह को रुरल का इंचार्ज बना दिया. जो व्यक्ति (आलोक) एक मामूली सब एडिटर बन्नने की याग्यता नहीं रखता, उसे तिवारी उप समाचार संपादक बना कर लाये हैं. इस सूचना पर प्रभात खबर में अफरा-तफरी की स्थिति है. जिन लोगों को बदलने की योजना है, उनमें से कई ऐसे हैं, जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थिति में भी प्रभात खबर का साथ नहीं छोड़ा. पर राजेंद्र तिवारी और अब हरिवंश जी के नजर में ऐसे लोग किसी काम के नहीं हैं जो वर्षों से एक ही स्थान पर जमे है. इस प्रस्ताव ने हिंदुस्तान और भास्कर को एक मौका दे दिया है.  झारखण्ड में भास्कर वहां के सबसे मजबूत अखबार प्रभात खबर को तोड़ नहीं पाया था. हरिवंश जी और राजेंद्र तिवारी के फैसले से भास्कर और हिंदुस्तान का काम आसान हो जायेगा. पिछले दिनों सुधीर अग्रवाल रांची आये थे. उन्होंने अपनी टीम पर नाराजगी जताई थी और निर्देश दिया था की दूसरे अखबार से निचले और ऊपर के स्तर पर स्टाफ लायें और यहाँ से बेकार लोगों को हटायें. अब उनकी रह आसान हो गयी लगती है.''

यह तो था भड़ास4मीडिया के पास पहुंचा एक गोपनीय पत्र. हफ्ते भर पहले आए इस पत्र में भागलपुर में जो कुछ अब हो रहा है, उसकी आशंकाएं व्यक्त कर दी गई थीं. इसी तरह के कई फीडबैक भड़ास के पास पहुंचे हैं. अगर आपके पास भी प्रभात खबर में चल रहे अंदरुनी उठापटक को लेकर कोई खबर, जानकारी या चर्चा हो तो हमतक पहुंचाएं, नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए या फिर This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर मेले के जरिए. आपके नाम और पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा. हमारी कोशिश रहेगी कि हम झारखंड और बिहार में चल रहे अखबारी युद्ध से होने वाले उथल-पुथल की छोटी से छोटी जानकारियां आप तक पहुंचाएं.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया


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