प्रभात खबर, भागलपुर के संपादक का तबादला नहीं, उन्हें निकाला गया

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भड़ास पर प्रभात खबर भागलपुर के बारे में जो भी खबर आई है वो सत्य से परे है. मैं भी प्रभात खबर भागलपुर की लांचिंग के समय के साथ इससे जुड़ा हूँ. भागलपुर के संपादक चन्दन शर्मा ने यहाँ का माहौल अत्यंत खराब कर रखा था. उनके कार्यकाल में काम कम, राजनीति ज्यादा होती थी. समाचार पत्र में खबरों को लेकर कोई प्लानिंग नहीं होती थी. एक दूसरे को आपस में लड़ाने में ही संपादक व्यस्त रहते थे.

पिछले कुछ दिनों से कार्यालय का माहौल खराब होता जा रहा था. जिन लोगों को राजेन्द्र तिवारी जी ने नियुक्त किया था, उन्हें वह देखना भी नहीं चाहते थे. जब भी कोई सहयोगी उनसे किसी खबर पर चर्चा करना चाहता था तो स्वयं को हरवंश जी का सबसे खास आदमी बताते हुए उसे यही कहते कि कुछ दिन ऐसे ही चलने दें, बहुत सुधार की चिंता ना करें, जल्द ही मैं तिवारी जी के लोगों की छुट्टी करा दूँगा. उसके बाद अपनी मर्ज़ी से अखबार चलाया जायेगा.

श्री तिवारी जी द्वारा नियुक्त डेस्क के एक स्टाफ को तो वह अपने केबिन में देखना भी नहीं चाहते थे. जब भी वो पेज चेक कराने जाते, गेट से उन्हें लौटा देते थे. उनकी हरकतों से कार्यालय में कई बार मारपीट की भी नौबत आ चुकी थी. उनकी हरकतों को देखते हुए प्रबंधन ने उन्हें पांच सितंबर को फोर्सली छुट्टी पर भेजा था. उसके बाद एचआर हेड अंजन शर्मा जी रांची से स्वयं भागलपुर कार्यालय के संपादकीय विभाग की जांच के लिए आये थे. यहाँ सभी ने एचआर हेड से यही कहा कि चन्दन शर्मा के रहते कार्यालय का माहौल कभी सुधर नहीं सकता.

एचआर हेड की रिपोर्ट के बाद चन्दन शर्मा से संस्थान ने इस्तीफा मांग लिया. ऐसे ही समाचार संपादक अजीत सिंह के इस्तीफ़ा की खबर भी गलत है. वह अभी भी कार्यालय में काम कर रहे हैं. हालाँकि अजीत सिंह का परिवार भोपाल में है, और वह स्वयं भोपाल जाना चाहते हैं, मगर इसके लिए वह प्रबंधन द्वारा कोई दूसरी व्यवस्था कर दिए जाने का इन्तज़ार कर रहे हैं. सिटी चीफ प्रसन्न सिंह से इस्तीफा लिया गया है, मगर उनके हिंदुस्तान से जुड़ने की खबर गलत है. इसी प्रकार जिस सफ़दर मोमिन कि बात की गयी है, वह यहाँ ट्रेनी के रूप में थे, सफदर लखनऊ के रहने वाले हैं और वह जुलाई में ही यहाँ से जा चुके हैं.

फिलहाल चन्दन शर्मा को हटाये जाने के बाद संस्थान में सभी बहुत खुश हैं. चन्दन शर्मा अब लोगों को भड़काने के लिए भड़ास पर गलत जानकारी दे रहे हैं, मगर उनकी बातों में कोई आने वाला नहीं. आपसे आग्रह है कि अपने साईट की विश्वसनीयता को देखते हुए आप हमारी बात को भी अपनी साईट पर जगह देंगे. आपसे आग्रह है कि यदि संभव हो तो मेरा नाम गोपनीय रखें. आपका आभारी रहूँगा .

प्रभात खबर, भागलपुर में कार्यरत एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित


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Comments (13)Add Comment
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written by abhishek, September 29, 2011
बेबुनियाद खबर है. भागलपुर आकर पता कर लें. भड़ास को गलत खबर चलाने से बचना चाहिए पहले राघवेन्द्र फिर चन्दन शर्मा जैसे लोगों का जाना. कुशल नेतृत्व, अखबारी योग्यता और सोम्य व्यव्हार के मामले में कोई इन दोनों पर अंगुली नहीं उठा सकता है. सब पर कीचड उछाला जाना प्रभात खबर प्रबंधन का भगवान ही मालिक है. पहले मुजफ्फरपुर फिर भागलपुर में पिटने की बारी है. प्रभात का बोरिया बिस्तर जल्द ही बिहार से बंद होगा. बधाई, भागलपुर के तीसरे और चौथे संपादक संजय जी और जीवेश जनमान सिंह को. रांची से बाहर मुश्किल है प्रभात का सफल होना.
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written by kamlesh Pande, September 28, 2011
Dear Friend, Harivansh jee aur Goenka jee ko mat koso, BGP kee HAWA hee kuchh aisee hai gise badalne kee jaroorat hai. Padhkar afsos hota hai kee kaisee ghinaunee hai patrakarita ke andar kee Rajneeti.......?
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written by Kush, September 27, 2011
Jivesh Ranjan, Bhagalpur ke naye sampadak banenge. Ranchi us unka Transfer hone ki suchna hai.
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written by AGYAT, September 27, 2011
prabhat khaber ke jitene scrap samadak rahe hain, woh aj jahan bhi hain us sansathan ko duba rahe hain, chai raghwendra ho ya anikesh hi kyon na ho. ranchi bhaskar ka raghwendra ne band baja diya. jatiwad, wasooli abhiyan charam par hai, raat main mahfil sajati hai. tisari baat chandan sarma baniya nahi bhumihar hai, PK ko bhumihar aur maithil panditji khane ke chakker main jute hain.
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written by ramesh, September 24, 2011
prabandhan ne ajeet singh ka baat maan liya hai, unko prabhat khabar ka unit kholne bhopal bheja ja raha hai. unko badhayee de dijiye...
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written by pardeshi, September 24, 2011
लोगो को अति भद्र नही होनी चाहिए. चन्दन जी बनिया क्लास से आते थे. जबकि अजित सिंह, परसन्न सिंह राजपूत. राजेंद्र तिवारी जी पंडित. यानि सब फॉरवर्ड. चन्दन जी ने एक पंडित पुष्यमित्र को भी तरजीह देकरअपने पावं में कुल्हारी मारा. पुष्य ने बिनोद राव एबम अन्य को ब्राहमण लोबी बना कर तिवारी जी के शह पर चन्दन जी को किनारा किया. दोस्त हो तो पुष्य कि तरह. चन्दन और पुष्य भोपाल से ही पढ़े हें और अच्छे दोस्त भी थे.
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written by AGYAT, September 24, 2011
Parbhat Khabar ke Matadhiso Ki Pol Khul chuki hai. In logon ko koi Akhbar main jagah nahi milegi kyonki Inki KARANI AUR KATHANI JAG JAHIR HAI. PARBANDHAN KO BURE SAMAY MAIN SAATH DENE KI BAAT KAH Bharmete Hain.
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written by BABA, September 24, 2011
PAAP ka ghara bhar chuka hai. Is karan matadhiso ko presani Ho rahi hai. ARE bhai transfer hone per itna hungama kyon barapa hai. Inko ek hi chinta khye ja rahi hai. LOOT SAKO TO LOOT ANTE KAAL PACHETAIGA JAB PRABHAT KHABAR CHOOT JAYEGA. DOOKANDARI BAND HO JAYEGI, ARE BHAI KABLIYAT HAI TO DIKHIYE, PARIVARTAN SE VIKASH HOTA HAI.
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written by bhai wah, September 23, 2011
यकीं नहीं होता की हरिवंश जी और गोयनका जी का चयन इतना खराब हो सकता है और सालों तक ऐसे लोगों को झेल कैसे लिया गया. कहीं तो झोल है भाई. लगे रहो भडासी.
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written by sanjay, bhagalpur, September 23, 2011
यशवंत जी, पोस्ट करने से पहले भागलपुर के १-२ लोगों से बात भी कर लेते. आप जिस माहौल की चर्चा कर रहे हैं उसमे कोई भी अख़बार सफल नहीं नहीं हो सकता है. समाचार संपादक अजीत सिंह के राजेंद्र तिवारी जी के साथ गोरखपुर और नशे का सम्बन्ध इन सबके जड़ में हैं. सच तो यह है की अजीत सिंह और प्रसन्न सिंह दोनों को निकाला गया है, दोनों का प्रभात खबर से कोई रिश्ता नहीं है. जबकि संपादक चन्दन शर्मा जी १५ दिनों से छुट्टी पर चल रहे हैं. ऐसी बेतुकी ख़बरें या बातें तिवारी जी के लोगों के दिमाग की उपज ही हो सकती है. आशा है आप इसे प्रकाशित करेंगे. आप चाहे तो प्रभात के बड़े-बड़े अधिकारीयों से रांची में भी बात कर सकते हैं. या फिर भागलपुर के किसी भी छोटे से छोटे कर्मचारी से, सच नहीं बदलेगा. हाँ आप सच बताना चाहते है या नहीं ये और बात है.
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written by amit ranjan, September 23, 2011
मेरे भाई..प्रभात खबर में सम्पादक ऐसे ही निकले जाते है, चाहे अविनाश हो या राघवेन्द्र, रवि प्रकाश हो या नरेन्द्र अनिकेत,
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written by ajeet , September 23, 2011
Rajendra tiwari k chief editor ban jane ka sapna dekhiye, fir aap ko sahyad chamchagiri ke badle sampadak banne ka mauka ban jaye. wase aap brahman hain ya nahi nam batate to pata chalta.
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written by kamaal hai, September 23, 2011
agar aisa such hai to chandan sharma jee ki tareef ki jani chahiye ki unhone rajendra tiwari jee ko 1 saal tak khule aam takkar dee.

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