वित्‍त विभाग की रिपोर्ट से हुआ हिंदुस्‍तान के एक करोड़ के फर्जीवाड़ा का भंडाफोड़

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मुंगेर। बिहार सरकार के वित्त (अंकेक्षण) विभाग की प्रतिवेदन संख्या- 195/2005-2006 ने उजागर कर दिया कि पटना स्थित बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के शीर्ष अधिकारियों की मिलीभगत से केवल दो वित्तीय वर्ष 2002-03 और 2003-04 के दौरान सरकारी विज्ञापन प्रकाशन मद में मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड ने सरकारी खजाने को कुल एक करोड़ 32 हजार 272 रुपए 16 पैसे की चपत लगाई।

अंकेक्षण कार्य में लगी टीम ने जो रिपोर्ट सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना को दिया, उस रिपोर्ट खुलासा करती है कि किस प्रकार देश के शक्तिशाली मीडिया हाउस ‘मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड’ ने प्रेस की स्वतंत्रता की आड़ में पीत पत्रकारिता की और कागजातों में जालसाजी-हेराफेरी और सच्चाई को छुपाकर साजिश के तहत अवैध ढंग से सरकारी विज्ञापन मद में एक करोड़ 32 हजार 272 रुपए 16 पैसे की निकासी सरकारी खजाने से की।

वित्त (अंकेक्षण) विभाग ने अपने वित्‍तीय प्रतिवेदन में सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना को अविलंब मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड से अवैध भुगतान की राशि एक करोड़ 32 हजार 272 रपए 16 पैसे की वसूली का आदेश दिया। यह आदेश वर्ष 2005 के दिसंबर माह में जारी किया गया था।

आखिर सरकारी विज्ञापन घोटाला क्या है : टीम  ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड का हिन्दी दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ का पटना संस्करण कुल ग्यारह संस्करणों में क्षेत्रवार प्रकाशित होता है और हिन्दुस्तान के पटना संस्करण की पंजीयन संख्या-4438/86/पटना है। इसी ग्यारह संस्करणों में हिन्दुस्तान का मुजफफरपुर और भागलपुर मुद्रण केन्द्र है। भागलपुर और मुजफफरपुर मुद्रण केन्द्रों से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ का अलग से कोई ‘पंजीयन संख्या’ और अलग से ‘प्रिंट लाइन’ नहीं है इसलिए मुजफफरपुर और भागलपुर मुद्रण केन्द्रों से प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान को स्वतंत्र प्रकाशन यानी अलग अखबार नहीं समझा जा सकता है।

वित्‍तीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में आगे लिखा है कि --‘‘भागलपुर और मुजफ्फरपुर से स्वतंत्र प्रकाशन का पंजीयन और प्रिंट लाइन नहीं होने के बावजूद अखबार प्रबंधन ने सरकार के विज्ञापन को लौटाकर सरकार पर दवाब बनाने का काम किया और अपने मनोनुकूल ‘संयुक्त विज्ञापन दर’ पर सरकारी विज्ञापन जारी करने को विभाग के विवश कर दिया। यह कार्य पूर्णतः अवैध और अनियमित है। संयुक्त विज्ञापन दर देने से विभागीय नियम से जुड़े सरकारी परिपत्र -328/13-07-1987 के प्रावधानों का उल्लंघन होता है। इस प्रकार, सरकारी राजकोष से विभाग को दैनिक हिन्दुस्तान को अनियमित और अवैध ढंग से एक करोड़ 32 हजार 272 रुपए 16 पैसा का भुगतान करना पड़ा। यह राशि तुरंत वसूलनीय है।’’

यह राशि वसूल हुई या नहीं, आगे के अंक में प्रतीक्षा करें।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट.


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