हिंदी के टॉप टेन अखबारों में कोई बदलाव नहीं, जागरण फिर अव्‍वल

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: आईआरएस 2011 की दूसरी तिमाही के आंकड़े जारी : आईआरएस 2011 की दूसरी तिमाही के आंकड़े आ गए हैं. हिंदी के टॉप टेन अखबारों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. जागरण इस बार भी नम्‍बर एक पर बना हुआ है. टॉप टेन में राजस्‍थान पत्रिका, पंजाब केसरी तथा नई दुनिया को पाठकों का नुकसान उठाना पड़ा है, परन्‍तु इससे किसी के रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है. शेष अन्‍य अखबारों के पाठक संख्‍या में अच्‍छी खासी बढ़ोत्‍तरी देखने को मिली है.

दूसरी तिमाही में जागरण 1 करोड़ 63 लाख 93 हजार पाठकों के साथ नम्‍बर एक पायदान पर मौजूद है. पिछली तिमाही में जागरण की पाठक संख्‍या 1 करोड़ 59 लाख 10 हजार थी. दैनिक भास्‍कर भी पिछली तिमाही के पाठक संख्‍या 1 करोड़ 40 लाख 16 हजार से बढ़ाकर 1 करोड़ 41 लाख 74 हजार करके मजबूती से दूसरे नम्‍बर पर काबिज है. तीसरे नम्‍बर पर हिंदुस्‍तान मौजूद है, जिसने अपनी पाठक 1 करोड़ 19 लाख 85 हजार तक पहुंचा दी है. पिछली तिमाही में इसके आंकड़े 1 करोड़ 18 लाख 10 हजार थी.

चौथे पायदान पर इस बार भी अमर उजाला मौजूद है. इसने भी अपनी पाठक संख्‍या 87 लाख 47 हजार से बढ़ाकर 88 लाख 91 हजार तक पहुंचा दी है. पांचवे नम्‍बर पर मौजूद राजस्‍थान पत्रिका को इस बार झटका लगा है. पत्रिका की पाठक संख्‍या 70 लाख 33 हजार से घटकर 69 लाख 41 हजार रह गई है. पहली तिमाही में भी पत्रिका ने अपने पाठक गंवाए थे. छठवें स्‍थान पर 34 लाख 14 हजार पाठकों के साथ पंजाब केसरी ने अपनी पकड़ मजबूत की है. नवभारत टाइम्‍स 26 लाख 50 हजार पाठकों के साथ सातवें स्‍थान पर मौजूद है. प्रभात खबर 18 लाख 93 हजार पाठकों के साथ आठवें स्‍थान पर अपना कब्‍जा बरकरार रखा है. नौवे स्‍थान पर 17 लाख 14 हजार पाठकों के साथ नई दुनिया तथा दसवें नम्‍बर पर 14 लाख 37 हजार पाठकों के साथ हरिभूमि ने अपनी पकड़ मजबूत की है. स्रोत आईआरएस


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Comments (4)Add Comment
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written by Noval Thakur, September 30, 2011
जागरण का हिमाचल, विशेषकर शिमला में क्या सूरते हाल है? जागरण प्रबंधन को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। साम, दाम, दंड, भेद अपनाने के बाद भी शिमला शहर में जागरण की रीडर शिप लगातार गिर रही है।
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written by surinder singh, September 30, 2011
badhai ho jagran parivar walon ko no 1 banne ki keep it up
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written by अमित बैजनाथ गर्ग, जयपुर, राजस्थान., September 30, 2011
इन सर्वों की विश्वसनीयता क्या रह जाती है, जब सभी अखबार अपने आप को सबसे आगे बताने से गुरेज नहीं करते हैं. इस सर्वे के बाद किसी भी अखबार को देख लीजियेगा, सभी अपने आपको सबसे आगे बताते लम्बे-चौड़े खबरनुमा भाषण छापेंगे औए बड़े-बड़े होम विज्ञापन देंगे...!
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written by MIHIR, September 30, 2011
वैसे आईआरएस ये सर्वे खुद तो जारी नहीं करता हंसा रिसर्च ही इन्हें अपने सब्सक्राइबर को देता है आपने यह कौन सा नया स्रोत खोज लिया जरा हमें भी बताइये हम भी वहीं से देख लें. लिकं ही दे दीजिए

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