राजस्‍थान में सिरमौर बना पत्रिका

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मुम्बई। भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आईआरएस) की मुम्बई में वर्ष 2011 की दूसरी तिमाही के लिए ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट में पत्रिका समूह की कुल पाठक संख्या 1 करोड़ 82 लाख 51 हजार हो गई है। आईआरएस के गत जून में समाप्त हुई इस तिमाही के आंकड़ों में राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु व पश्चिमी बंगाल में प्रकाशित राजस्थान पत्रिका और मध्यप्रदेश में प्रकाशित पत्रिका की औसत पाठक संख्या को मिलाने पर समूह देश के किसी भी भाषा के शीर्ष दस समाचार पत्रों में छठे नम्बर पर आ गया है।

राजस्थान में कुल हिन्दी पाठकों में करीब 84 फीसदी पाठक राजस्थान पत्रिका पढ़ते हैं। राजस्थान में सिरमौर रहने के साथ मध्यप्रदेश व इसके भोपाल व इन्दौर सरीखे बड़े शहरों में भी पत्रिका सबसे तेज गति से बढ़ने वाला अखबार बना है। आईआरएस के आंकड़ों के अनुसार जयपुर संस्करण में 38 लाख 54 हजार कुल पाठक संख्या के साथ पत्रिका समूह शीर्ष पर है। उल्लेखनीय है कि ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (एबीसी) के ताजा प्रमाण पत्र में भी राजस्थान पत्रिका को जयपुर संस्करण व जयपुर शहर में शीर्ष पर प्रमाणित किया गया है।

आईआरएस के अनुसार राजस्थान के अन्य प्रमुख बड़े संस्करण जोधपुर, उदयपुर, कोटा व बीकानेर में राजस्थान पत्रिका की बढ़त बरकरार है। पत्रिका समूह की यह बढ़त पिछले कई सर्वेक्षणों से निरन्तर बनी हुई है और जो दर्शाती है कि उच्च गुणवत्ता और प्रामाणिक खबरों के लिए पाठक पत्रिका पर ही भरोसा करते हैं। पत्रिका समूह 7 राज्यों में अपने 30 संस्करणों के पाठकों की पहली पसंद बना हुआ है।

पत्रिका ने अपनी निष्पक्ष, निर्भीक और निस्वार्थ पत्रकारिता के दम पर कुल पाठक संख्या में लगातार मध्यप्रदेश का सबसे तेज बढ़ता अखबार साबित होने का गौरव प्राप्त किया है। पिछले सर्वेक्षण की तुलना में वर्ष 2011 की दूसरी तिमाही में पत्रिका ने अन्य सभी प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों की तुलना में अपने कुल पाठकों में सर्वाधिक नए पाठक जोड़े हैं। समूह ने मध्यप्रदेश में इस तिमाही में करीब दो लाख से ज्यादा कुल नए पाठक जोड़े हैं। अकेले इन्दौर शहर में इस तिमाही में 49 हजार से ज्यादा औसत पाठक बढ़े हैं।

उल्लेखनीय है कि ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन की रिपोर्ट के अनुसार पत्रिका भोपाल व इंदौर जैसे प्रमुख शहरों के साथ ही सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में नम्बर 1 है। आईआरएस के आंकड़ों में अभी छत्तीसगढ़ प्रदेश में पत्रिका के पाठक शामिल नहीं हैं। अल्प समय में ही अपनी कलम की पैनी धार और अपने सामाजिक सरोकारों से पत्रिका समूह ने राजस्थान के साथ ही मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पाठकों के दिल में एक अलग स्थान बनाया है। साभार : पत्रिका


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