संपादक ने कार्टून पर कैंची चलाई, कार्टूनिस्ट ने फेसबुक पर पीड़ा बताई

E-mail Print PDF

उत्तराखंड में रमेश पोखरियाल निशंक के पतन और बीसी खंडूड़ी को नया सीएम बनाए जाने की परिघटना को मीडियावाले अपने-अपने तरीके से व्याख्यायित कर रहे हैं. खंडूड़ी को आमतौर पर लोग भाजपा का चुनावी मोहरा मान रहे हैं. लोगों का यह भी कहना है कि अगर भाजपा करप्शन के खात्मे को लेकर सीरियस होती तो निशंक के खिलाफ जांच चल रही होती और निशंक संगठन में बड़ा पद पाने की जगह जेल में होते.

लोग यह भी कह रहे हैं कि निशंक के हटने से भ्रष्टाचार का खात्मा नहीं होने वाला. भ्रष्टाचार नए तौर-तरीके और नए रंग-रूप में उसी वेग से जारी रहेगा जैसे पहले था. इन्हीं सब हालात और ऐसे ही प्रकरण पर कार्टूनिस्ट अरविंद शेखर ने एक कार्टून तैयार किया. इस कार्टून को देहरादून से प्रकाशित मंथली न्यूज मैगजीन ‘युगवाणी’ ने कवर पेज पर छापा भी. पर संपादक महोदय ने कार्टून तक को एडिट कर दिया. कार्टून का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा उन्होंने उड़ा दिया. देश में शायद यह पहली घटना होगी जिसमें संपादक ने कार्टूनिस्ट को विश्वास में लिए बगैर कार्टून को अपने ही लेवल पर एडिट करा दिया.

कार्टून पर संपादक की कैची चलने से कार्टूनिस्ट अरविंद शेखर बेहद खफा हो गए. उन्होंने अपनी नाराजगी दर्ज कराने के लिए फेसबुक का सहारा लिया. उन्होंने अपने वाल पर लिखा- This was the complete cartoon for yugwani's cover page but they edited it. I think You can guess the resons. अरविंद शेखर ने अपना मूल कार्टून भी फेसबुक पर पब्लिश कर दिया है. उधर, युगवाणी के संपादक संजय कोठियाल ने पत्रिका का कवर पेज फेसबुक पर डाल दिया था जिसमें संपादित कार्टून है. कार्टूनिस्ट अरविंद शेखर ने फेसबुक पर जब हकीकत का बयान किया तो मैग्जीन के संपादक संजय कोठियाल की स्थिति सांप-छछूंदर जैसी हो गई. संजय को सफाई देनी पड़ गई. उन्होंने कार्टून को एडिट किए जाने का कारण बताया. उन्होंने लिखा कि कवर पेज पर स्पेस की कमी के कारण कार्टून के एक हिस्से को उड़ा देना पड़ा.

मैग्जीन के कवर पेज पर प्रकाशित कार्टून

मैग्जीन के कवर पेज पर प्रकाशित कार्टून

कार्टूनिस्ट द्वारा बनाया गया असली कार्टून

कार्टूनिस्ट द्वारा बनाया गया असली कार्टून


AddThis