हिंदुस्‍तान ने ज्‍यादा विज्ञापन दर पाने के लिए प्रसार संख्‍या में फर्जीवाड़ा किया

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मुंगेर। मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड, जो बिहार के पटना, मुजफफरपुर और भागलपुर से दैनिक हिन्दुस्तान का प्रकाशन करता आ रहा था, डीएवीपी (विज्ञापन एवं दृष्य प्रचार निदेशालय, नई दिल्ली) से ज्‍यादा विज्ञापन दर प्राप्त करने के लिए कई तरह का आपराधिक हथकंडा अपनाता आ रहा है। वित्त जांच विभाग के विशेष जांच दल, जिसका नेतृत्व वरीय अंकेक्षक दिनेश्वर गोस्वामी कर रहे थे, ने अपनी जांच प्रतिवेदन संख्या- 195 /2005-06 में दैनिक हिन्दुस्तान की प्रसार संख्या के फर्जीवाड़ा का भी सनसनीखेज भंडाफोड़ किया है।

सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना के उप निदेशक (विज्ञापन/लेखा) लीलाकांत झा ने भी विभागीय संचिका की पृष्ठ संख्या-29 पर 19 जून 2006 को उंचा विज्ञापन दर प्राप्त करने के लिए अखबारों के द्वारा प्रसार संख्या बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का मामला उजागर किया, परन्तु अज्ञात कारणों से अखबार मालिकों के द्वारा सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने में किए गए गंभीर भ्रष्टाचार के मामले को आजतक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष पेश तक नहीं किया गया।

नतीजन, देश के शक्तिशाली मीडिया हाउस मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड, जो अब मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, के अखबार दैनिक हिन्दुस्तान के प्रसार संख्या के फर्जीवाड़ा की जांच बिहार सरकार के निगरानी विभाग द्वारा आजतक नहीं की जा सकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार से राज्य की जनता मांग करती है कि वे पूरे मामले की जांच निगरानी विभाग को सौंप दें और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करें। न्याय की नजर में राजा और रंक एक सामान होते हैं।

दैनिक हिन्दुस्तान का प्रसार संख्या फर्जीवाड़ा क्या है : वित्त जांच रिपोर्ट संख्या -195/2005-06 के पृष्ठ- 6 पर लिखा है -‘‘दैनिक हिन्दुस्तान, पटना के लिए 01 अक्‍टूबर, 2002 से 30 सितम्बर, 2003 तक की प्रसार संख्या 2, 07, 939 अंकित है, जबकि प्रसार प्रमाण पत्र में जुलाई, 2002 से दिसंबर, 2002 के बीच पटना की प्रसार संख्या 01,51,698 है और जुलाई, 2003 से दिसंबर ,2003 के बीच प्रसार संख्या 01, 83, 205 है।’’

वित्त जांच रिपोर्ट यूं मंतव्य देता है -‘‘अर्थात दैनिक हिन्दुस्तान का प्रसार कभी भी 02, 07, 939 नहीं रहा है।’’ रिपोर्ट में आगे लिखा है- ‘‘जब क्रमांक -01 पर पटना, हिन्दुस्तान का सम्पूर्ण प्रसार 3, 28, 064 था, तब विज्ञापन का संयुक्त-दर 308 रुपया 90 पैसा था और जब क्रमांक -02 पर सम्पूर्ण प्रसार 3, 06, 678 हो गया तो अलग-अलग दर करने से संयुक्त विज्ञापन दर 326 रुपया 66 पैसा हो गया।’’

उद्देश्य : रिपोर्ट में आगे लिखा है कि -‘‘अलग-दर करने का एकमात्र उद्देश्य संयुक्त रूप से अधिक दर पर भुगतान प्राप्त करना था।’’

निदेशालय में खूब चर्चा, परन्तु कार्रवाई शून्य : हिन्दुस्तान के प्रसार संख्या फर्जीवाड़ा में वित्त जांच रिपोर्ट सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना को मिलने के बाद निदेशालय में चर्चा गर्म रही और विभागीय संचिकाओं में काफी कुछ लिखा-पढ़ी हुई, परन्तु विभाग ने दोषी दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधकों के विरुद्ध किसी प्रकार की कानूनी या विभागीय कार्रवाई नहीं की।

लीलाकांत झा की रिपोर्ट : सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, पटना के उप-निदेशक (विज्ञापन/लेखा) लीलाकांत झा ने विभागीय संचिक के पृष्ठ-29 पर 19 जून, 2006 को दैनिक हिन्दुस्तान के प्रसार संख्या फर्जीवाड़ा पर जो टिप्पणी दी है, उसे मैं हू-ब-हू पेश कर रहा हूं - ‘‘जहां तक प्रसार संख्या की जांच का प्रश्न है, इस संबंध में विभाग द्वारा कार्रवाई की जा रही है। दर निर्धारण कमिटी की बैठक बुलाकर स्वीकृत सूची के वैसे समाचार पत्र, जो वास्तविक प्रसार संख्या का बढ़ा-चढ़ाकर डीएवीपी से विज्ञापन दर निर्धारित करा लेते हैं, उनके दर को कम किया जाना राज्य हित में आवश्यक है। अतएव, दर कमिटी की बैठक बुलाकर इस पर निर्णय किया जा सकता है तथा अंकेक्षण दल को वस्तु स्थिति से अवगत कराया जा सकता है।’’

उपर्युक्त जांच रिपोर्ट के आलोक में अब बिहार सरकार की कार्रवाई का इंतजार सभी नागरिकों को है।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट.


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