अपनी असफलता का ठीकरा पुराने स्टाफ पर फोड़ते हैं एनके सिंह

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अभी तक के अपने तीन माह के कार्यकाल में एनके सिंह (पीपुल्स समाचार, भोपाल के एडिटर) ने सिर्फ दो मुद्दों पर विशेष टिप्पणी लिखी. एनके सिंह की दिनचर्या में स्थानीय संपादकों को किसम-किसम के मेल भेजना, नोटिस देना और नौकरी से हटाने की धमकी देना शामिल है. पीपुल्स समाचार पत्र के स्टाफ की ख्वाइश एनके सिंह को काम करते देखने की है.

दोपहर 12 से 01 बजे के बीच में दफ्तर आकर एनके सिंह शाम को विश्राम के बाद 06 बजे तक दोबारा दफ्तर आते हैं. रात को 10 बजे विदाई लेने से पूर्व उनका अधिकांश समय मेल, नोटिस और स्टाफ को हतोत्साहित करने में बीतता है. रोजाना आठ-दस मेल करना एनके सिंह के लिए मामूली बात है. स्थानीय संपादकों का अधिकांश समय एनके सिंह की मिजाजपुर्सी और स्पष्टीकरण देने में गुजरता है. संपादक के व्यवहार से आजिज आ चुकी निज सचिव ने पिछले दिनों पीपुल्स समूह की दूसरी इकाई में अपनी स्थानांतरण मांग लिया.

निज सचिव के जिम्मे मेल टाइप करना, उनका जवाब मंगवाकर प्रस्तुत करना, सुबह और शाम की खबरों की लिस्ट मंगवाना और अन्य पत्र व्यवहार करना है. एनके सिंह के व्यवहार पर एक स्थानीय संपादक की टिप्पणी थी- एनके सिंह पैंसेजर ट्रेन को बुलेट ट्रेन की तरह चलाना चाहते हैं. एनके सिंह के साथ दैनिक भास्कर में काम करने वाले पत्रकार आज भी उन्हें नोटिस कुमार सिंह कहकर याद करते हैं. उस दौर में मेल का प्रचलन कम था, इसलिए एनके सिंह दिनभर स्टाफ को लिफाफे में नोटिस देकर त्रास दिया करते थे. दैनिक भास्कर के बाद हिन्दुस्तान टाइम्स, भोपाल के स्टाफ के साथ भी ऐसा ही व्यवहार चलता रहा.

दरअसल पीपुल्स समाचार में समूह संपादक रहते हुए अवधेश बजाज ने जो कार्यप्रणाली विकसित की थी, एनके सिंह उसमें रातोरात बेहिसाब परिवर्तन की उम्मीद लगाए बैठे हैं. उन्हें आस थी कि उनके संपादक बनने के बाद पीपुल्स समाचार पत्र में और बेहतर काम करने वालों की कतार लग जाएगी, लेकिन वे चारों संस्करण में कोई खास सहयोगी नहीं जुटा सके. पुराने स्टाफ को अकर्मण्य मानकर चलने वाले एनके सिंह अब बुरी तरह हाफ गए हैं, लेकिन अकड़ के चलते वे सच स्वीकारने को तैयार नहीं. अपनी असफलता का सारा ठीकरा वे पुराने स्टाफ पर फोड़ते हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि उनके आने से पहले भी समाचार पत्र अब से कुछ बेहतर ही प्रकाशित होता था.

सीएम की पीसी में बाइलाइन ली थी एनके सिंह ने

पिछले दिनों मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पत्रकारवार्ता में संपादकों को भी आमंत्रित किया. पत्रकारवार्ता में जो कुछेक संपादक पहुंचे, उसमें एनके सिंह शामिल थे. एनके सिंह ने बीजेपी कवर करने वाले संवाददाता को पीसी में जाने से मना कर दिया और खुद की बाइलाइन से सीएम की पीसी पहले पेज पर छपवाई.

पीपुल्स समाचार संकट में, एनके सिंह चले तीर्थाटन पर

जब रोम जल रहा था तब नीरो बंसी बजा रहा था...कुछ उसी तर्ज पर पीपुल्स समाचार के संपादक एनके सिंह चल रहे हैं. एनके सिंह ने सभी स्थानीय संपादकों को मेल भेजकर सूचित किया है कि वे 13 से 16 अक्टूबर तक अवकाश पर रहेंगे. खबर है कि एनके सिंह महाराष्ट्र के तीर्थस्थलों पर मत्था टेकने जा रहे हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि एनके सिंह खुद अपने आप से घबरा गए हैं और अब वे भगवान की शरण में जा रहे हैं. हम कामना करते हैं कि पिछले दिनों जो बातें सार्वजनिक की गई है, उन पर एनके सिंह और पीपुल्स प्रबंधन सकारात्मक रुख अपनाएं ताकि पीपुल्स  समाचार अपने लक्ष्य की ओर निर्बाध्य गति से आगे बढ़ता रहे.

भोपाल के सुशील शर्मा को दिया इंदौर का अतिरिक्त प्रभार

पीपुल्स समाचार भोपाल के स्थानीय संपादक सुशील शर्मा को फिलहाल इंदौर संस्करण का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. संपादक एनके सिंह के निर्देश पर सुशील शर्मा ने मंगलवार को इंदौर का प्रभार संभाल लिया. पीपुल्स समाचार में चर्चा है कि जबलपुर या ग्वालियर के स्थानीय संपादक को इंदौर भेजा जा सकता है.

पीपुल्स प्रबंधन से अपील

  • एनके सिंह बार-बार नौकरी लेने की धमकी देना बंद करें.

  • अगले दिन समीक्षा की बजाय एनके सिंह खुद भी जिम्मा लें.

  • संपादकीय और विशेष खबरों में एनके सिंह का हस्तक्षेप हो.

  • बेहतर परिणाम के लिए पहले बेहतरीन स्टाफ रखा जाए.

  • अन्य संपादकों की तरह वे भी देर रात तक दफ्तर में मौजूद रहे.

  • साप्ताहिक अवकाश के अलावा बार-बार अवकाश लेना बंद करें.

  • मौजूद स्टाफ पर शक की बजाय भरोसा सीखें.

...समाप्त...

प्रवीण खारीवाललेखक प्रवीण खारीवाल इंदौर के पत्रकार हैं. इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं. अभी हाल में ही उन्होंने पीपुल्स समाचार, इंदौर के स्थानीय संपादक के पद से इस्तीफा दिया है. उन्होंने अपने एडिटर एनके सिंह की कार्यशैली पर कुल चार पार्ट में लिखा. यह आखिरी पार्ट था. इसके पहले के तीन पार्ट पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करें..

भोपाल वाले एनके सिंह ने भी जगजीत को उसी समय मार दिया था

यौन अपराधों से संबंधित विधेयक का मजमून ही बदल डाला था एनके सिंह ने

धमकाया था एनके सिंह ने- खबर गलत निकली तो जाएगी नौकरी

इन सभी आरोपों पर अगर पीपुल्स समाचार के एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह की तरफ से कोई जवाब या प्रतिवाद भेजा जाता है तो भड़ास4मीडिया पर उसे भी सम्मान के साथ प्रकाशित किया जाएगा. भड़ास तक कोई भी अपनी बात This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए पहुंचा सकता है.


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Comments (2)Add Comment
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written by गरीब पत्रकार , October 13, 2011
प्रवीण भाई, कृपया और लिखे क्योकि अभी कई पहलू आपने छोड़ दिए| अभी तक आपने सौ प्रतिशत सही लिखा और इसी सत्यता की और उम्मीद करते है|
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written by गरीब पत्रकार, October 13, 2011
प्रवीण भाई, अपने दुष्कर्मो को छुपाने के लिए दूसरो पर शक करना और दूसरो के चरित्र को संदिग्ध बनाना इन महोदय की रणनीति का अहम् हिस्सा रहता है| अगर इन्हें पत्रकारिता करना आती तो शायद उन्हें यह रणनीति न अपनाना पड़ती| मध्य प्रदेश का पत्रकार जगत इन महोदय के तौर-तरीको और क्रिया कलापों से बखूबी परिचित है| भ्रष्ट शासकीय अधिकारिओं, व्यापारियों और संदिग्ध चरित्र के दलालों से गठबंधन करना और उन्हें अपने व्यक्तिगत हितो के लिए संरक्षण देना इन महोदय की रणनीति का अहम् हिस्सा रहा है |

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